पश्चिम एशिया (Middle East) में तनाव कम होने का नाम नहीं ले रहा है। ईरान पर अमेरिका और इजरायल के हालिया संयुक्त हमलों के बाद जब हिजबुल्लाह ने तेहरान के प्रति खुलकर अपना समर्थन जताया, तो इजरायल ने लेबनान के खिलाफ अपनी सैन्य कार्रवाई को बेहद आक्रामक कर दिया।
इसी सैन्य अभियान के तहत इजरायली सेना (IDF) ने लेबनान की सीमा के भीतर गहरी पैठ बनाते हुए सदियों पुराने ऐतिहासिक ब्यूफोर्ट कैसल (Beaufort Castle) और उसके आसपास की पूरी रणनीतिक पहाड़ी रेंज पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल कर लिया है। इस किले पर कब्जे को इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने एक ऐतिहासिक और बहुत बड़ी सैन्य जीत घोषित किया है।
बेंजामिन नेतन्याहू ने किया एलान, यूरोपीय देशों ने की निंदा
किले की सबसे ऊंची चोटी पर इजरायली झंडा फहराने के बाद प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने खुद दुनिया के सामने इसकी आधिकारिक घोषणा की। नेतन्याहू ने अपने बयान में कहा, “आज हम एक बिल्कुल अलग रूप में ब्यूफोर्ट लौटे हैं—एकजुट और पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होकर।”
हालांकि, इजरायल की इस बड़ी सैन्य कामयाबी पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर विवाद शुरू हो गया है। लेबनान के प्रधानमंत्री ने इजरायल पर संप्रभुता के उल्लंघन और ऐतिहासिक धरोहरों को नष्ट करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। वहीं, फ्रांस और ब्रिटेन समेत कई यूरोपीय देशों ने इजरायल के इस कदम की तीखी आलोचना करते हुए इसे बेहद उकसाऊ (Provocative) बताया है।
करीब 900 साल पुराना है इतिहास: क्रूसेडर्स ने बनवाया था ‘खूबसूरत किला’
ब्यूफोर्ट कैसल केवल एक मिलिट्री पोस्ट नहीं है, बल्कि यह मध्य पूर्व के सबसे सुरक्षित और बेहतरीन ऐतिहासिक किलों में से एक है, जो यूनेस्को (UNESCO) की वेबसाइट पर भी दर्ज है:
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भौगोलिक स्थिति: यह किला दक्षिणी लेबनान के नबातियेह (Nabatieh) शहर के करीब, लितानी नदी के ठीक ऊपर एक बेहद खड़ी और ऊंची चट्टान पर स्थित है।
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निर्माण: इस भव्य किले का निर्माण 12वीं शताब्दी (लगभग 900 साल पहले) में क्रूसेडर्स (Crusaders – ईसाई योद्धाओं) ने अपनी सुरक्षा के लिए करवाया था।
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नाम का अर्थ: फ्रांसीसी भाषा में ‘ब्यूफोर्ट’ का शाब्दिक अर्थ “खूबसूरत किला” होता है। वहीं, स्थानीय अरबी भाषा में इसे ‘कलाई अल-शकीफ’ (Qala’at al-Shaqif) के नाम से पुकारा जाता है।
क्यों रणभूमि में ‘गेम चेंजर’ है यह किला? समझिए इसका रणनीतिक महत्व
युद्ध और सैन्य रणनीति के जानकारों के मुताबिक, ब्यूफोर्ट किले का भौगोलिक स्थान ऐसा है कि जो भी इस पर नियंत्रण रखता है, उसे पूरे इलाके में सीधे तौर पर ‘सर्विलांस और रडार’ का सबसे बड़ा रणनीतिक फायदा मिलता है।
| विशेषता | सैन्य और रणनीतिक लाभ |
| अभूतपूर्व ऊंचाई | इस किले से उत्तरी इजरायल के ‘गैलीली पैनहैंडल’ और दक्षिणी लेबनान के ‘नबातियेह’ क्षेत्र का चप्पा-चप्पा और हर एक किलोमीटर का इलाका साफ दिखाई देता है। |
| सटीक निगरानी (Surveillance) | यहाँ आधुनिक रडार और कैमरे लगाकर सेना कई किलोमीटर दूर तक दुश्मन के सैनिकों की मूवमेंट और उनकी हर हरकत को आसानी से ट्रैक कर सकती है। |
| हमलों के लिए सुरक्षा कवच | खड़ी चट्टान पर होने के कारण इस किले पर नीचे से सीधे जमीनी हमला करना दुश्मन सेना के लिए लगभग नामुमकिन होता है। |
44 साल पुराना इतिहास: पहले फिलिस्तीन, फिर इजरायल और हिजबुल्लाह का रहा कब्जा
यह पहली बार नहीं है जब ब्यूफोर्ट कैसल इजरायल और लेबनान के बीच खूनी जंग का मुख्य अखाड़ा बना है। इसका एक लंबा सैन्य इतिहास रहा है:
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1982 का लेबनान युद्ध: इस युद्ध के दौरान इजरायल ने इस किले को ‘फिलिस्तीनी मुक्ति संगठन’ (PLO) से भीषण लड़ाई के बाद छीन लिया था। इसके बाद इजरायल ने इसे अपनी सबसे मजबूत अग्रिम सैन्य चौकी (Military Outpost) में बदल दिया था।
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18 साल का कब्जा: साल 1982 से लेकर 2000 तक (करीब 18 साल) इस ऐतिहासिक किले पर इजरायली सेना का ही कब्जा रहा।
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हिजबुल्लाह का अंडरग्राउंड नेटवर्क: साल 2000 में इजरायल की वापसी के बाद इस पर हिजबुल्लाह ने अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। इजरायली खुफिया खुफिया रिपोर्टों (IDF) के मुताबिक, हिजबुल्लाह ने ईरान की आर्थिक और तकनीकी मदद से इस 900 साल पुराने किले के नीचे और अंदर एक बेहद विशाल, आधुनिक और कंक्रीट का अंडरग्राउंड मिलिट्री इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया था।
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रॉकेट हमलों का लॉन्च पैड: हिजबुल्लाह इसी पहाड़ी और किले की मजबूत प्राकृतिक आड़ लेकर उत्तरी इजरायल के शहरों पर सैकड़ों रॉकेट दाग रहा था, जिसे ध्वस्त करने के लिए इजरायल ने इस बार अपनी पूरी ताकत झोंक दी।
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