तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजे आने और राज्य में नई सरकार के गठन के बाद भी दक्षिण भारत की सियासत में भूचाल थमता नजर नहीं आ रहा है। राज्य के राजनीतिक गलियारों से इस समय की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। तमिलनाडु भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और फायरब्रांड नेता के. अन्नामलाई (K. Annamalai) के पार्टी छोड़ने और अपनी एक नई राजनीतिक पार्टी (New Political Party) लॉन्च करने की अटकलें अचानक बेहद तेज हो गई हैं।
हालाँकि, स्वयं अन्नामलाई या भाजपा के केंद्रीय नेतृत्व ने इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक बयान या पुष्टि नहीं की है, लेकिन कोयंबटूर में उनके समर्थकों द्वारा लगाए गए विशाल पोस्टर्स और सोशल मीडिया पर तैर रही झंडे-नाम की डिजाइनों ने इन अफवाहों को हवा दे दी है।
1. कोयंबटूर की सड़कों पर लगे पोस्टर्स और सोशल मीडिया पर हलचल
अन्नामलाई के नए राजनीतिक सफर की चर्चा तब और पुख्ता हो गई जब उनके जन्मदिन से ठीक पहले कोयंबटूर शहर के प्रमुख चौराहों और मुख्य सड़कों पर बड़े-बड़े होर्डिंग्स और पोस्टर्स लगा दिए गए।
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पोस्टर के स्लोगन: इन पोस्टर्स पर अन्नामलाई की तस्वीर के साथ लिखा है—”Fearless minds have no limits” (निडर दिमागों की कोई सीमा नहीं होती) और “हमारे नेता, आओ और हमारा नेतृत्व करो”।
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सोशल मीडिया पर कैंपेन: एक्स (X) और अन्य प्लेटफॉर्म्स पर अन्नामलाई के समर्थकों द्वारा उनकी नई संभावित पार्टी के नाम और झंडे के रंग-रूप को लेकर लगातार डिजाइन्स शेयर की जा रही हैं। उनके फैंस एसोसिएशन ‘अन्नामलाई अन्बू कूट्टम’ में नए सदस्यों को जोड़ने का अभियान भी तेजी से चल रहा है।
2. क्यों नाराज चल रहे हैं पूर्व आईपीएस (IPS) अन्नामलाई?
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, अन्नामलाई और भाजपा के शीर्ष नेतृत्व के बीच पिछले कुछ समय से ‘वैचारिक और रणनीतिक’ मतभेद खुलकर सामने आ रहे थे:
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AIADMK से गठबंधन पर नाराजगी: साल 2023 में अन्नामलाई के आक्रामक नेतृत्व के कारण ही भाजपा का अन्नाद्रमुक (AIADMK) से गठबंधन टूटा था। अन्नामलाई तमिलनाडु में भाजपा को बिना किसी बैसाखी के स्वतंत्र रूप से खड़ा करना चाहते थे। लेकिन हालिया विधानसभा चुनाव में केंद्रीय नेतृत्व ने दोबारा AIADMK के साथ गठबंधन कर लिया, जिससे अन्नामलाई बेहद असहज थे। हालांकि, पार्टी लाइन पर चलते हुए उन्होंने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के लिए प्रचार जरूर किया था।
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तीन-भाषा (Three-Language) नीति पर केंद्र का विरोध: हाल ही में केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) द्वारा कक्षा 9 के छात्रों के लिए इसी सत्र से तीन भाषाएं अनिवार्य करने की अधिसूचना जारी की गई। अन्नामलाई ने अपनी ही केंद्र सरकार के इस फैसले का कड़ा विरोध किया और शिक्षा मंत्रालय को पत्र लिखकर इस फैसले को वापस लेने व पूर्व निर्धारित वर्ष 2029-30 से ही लागू करने की मांग की। इसे तमिलनाडु की भाषाई भावना से जोड़कर देखा जा रहा है।
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प्रदेश अध्यक्ष पद से हटाया जाना: पार्टी ने कुछ समय पहले ही अन्नामलाई को प्रदेश अध्यक्ष पद से मुक्त कर वरिष्ठ नेता नैनार नागेंद्रन को यह जिम्मेदारी सौंपी थी, जिसके बाद से ही उनकी सक्रियता राज्य की बैठकों में काफी कम हो गई थी।
विपक्षी खेमे से भी मिले संकेत: कार्ति चिदंबरम का ट्वीट
इस पूरे घटनाक्रम के बीच कांग्रेस के वरिष्ठ सांसद कार्ति चिदंबरम (Karti Chidambaram) के एक ट्वीट ने सियासी कयासों को और ज्यादा हवा दे दी। कार्ति चिदंबरम ने एक्स पर लिखा:
“तमिलनाडु में एक और राजनीतिक दल आने की तैयारी में है, मंथन की गति तेज हो गई है। (इसके प्रस्तावित नाम के पीछे एक बेहद दिलचस्प तर्क है)।”
क्या दिल्ली में थामेंगे बड़ी जिम्मेदारी या करेंगे बगावत?
अन्नामलाई इस समय दिल्ली में मौजूद हैं और उनके भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन व अन्य शीर्ष नेताओं से मुलाकात करने की खबरें हैं। भाजपा का एक धड़ा इन दावों को पूरी तरह खारिज कर रहा है। उनका कहना है कि अन्नामलाई भाजपा के एक वफादार सिपाही हैं और उन्हें जल्द ही राष्ट्रीय स्तर पर या दिल्ली संगठन में कोई बहुत बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है या उन्हें आंध्र प्रदेश के कोटे से राज्यसभा भेजा जा सकता है।
फिलहाल, तमिलनाडु में अभिनेता से राजनेता बने विजय (CM Vijay) की गठबंधन सरकार काम कर रही है और अन्नामलाई उनके सबसे बड़े आलोचकों में से एक रहे हैं। ऐसे में क्या पूर्व आईपीएस अधिकारी भाजपा के भीतर ही अपनी नई भूमिका से संतुष्ट होंगे या द्रविड़ राजनीति के इस गढ़ में अपनी नई पार्टी के साथ एक तीसरा विकल्प बनकर उभरेंगे, इसका फैसला अगले कुछ दिनों में पूरी तरह साफ हो जाएगा।
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