पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन और राजनीतिक उलटफेर के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) के शीर्ष नेताओं और सांसदों पर हो रहे सिलसिलेवार हमलों का दौर थमता नजर नहीं आ रहा है। राज्य में जारी भारी राजनीतिक उथल-पुथल के बीच अब एक और टीएमसी सांसद हिंसक भीड़ के सीधे निशाने पर आ गए हैं।
ताजा मामला दक्षिण 24 परगना जिले के मथुरापुर का है, जहां रविवार को स्थानीय ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों की एक भारी भीड़ ने टीएमसी सांसद बापी हलदर (Bapi Halder) के आलीशान दफ्तर पर अचानक धावा बोल दिया। इस हमले के बाद पूरे इलाके में भारी सांप्रदायिक और राजनीतिक तनाव फैल गया है।
दफ्तर में जमकर तोड़फोड़, खिड़कियां और फर्नीचर चकनाचूर
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार को दोपहर के समय अचानक सैकड़ों लोगों की भीड़ सांसद बापी हलदर के कार्यालय के बाहर जमा हो गई। देखते ही देखते भीड़ बेहद हिंसक हो गई और उसने दफ्तर के भीतर घुसकर तोड़फोड़ शुरू कर दी। उपद्रवियों ने कार्यालय के बाहर लगे पार्टी के साइनबोर्ड, खिड़कियों के शीशे, कंप्यूटर और कीमती फर्नीचर्स को पूरी तरह चकनाचूर कर दिया।
टीएमसी सांसद पर क्या हैं गंभीर आरोप?
आक्रोशित ग्रामीणों और प्रदर्शनकारियों ने टीएमसी सांसद बापी हलदर पर दो बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं:
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बाढ़ राहत सामग्री की चोरी: ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके के गरीब नागरिकों और हाल ही में आई बाढ़ से प्रभावित पीड़ितों के लिए सरकार की तरफ से जो आधिकारिक ‘बाढ़ राहत सामग्री’ भेजी गई थी, उसे सांसद के दफ्तर में अवैध रूप से छिपाकर स्टोर किया गया था, ताकि उसे आम जनता तक न पहुंचाकर उसकी कालाबाजारी की जा सके।
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सरकारी तालाब पर अवैध कब्जा: भीड़ का यह भी दावा था कि टीएमसी सांसद का यह आलीशान दफ्तर एक सार्वजनिक सरकारी तालाब को पाटकर, उस पर अवैध रूप से कब्जा करके बनाया गया है।
“राहत सामग्री अपने पैसों से खरीदी थी”—सांसद बापी हलदर की सफाई
दफ्तर पर हुए इस बड़े हमले और गंभीर आरोपों के बाद सांसद बापी हलदर ने सामने आकर अपनी सफाई दी है। उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इस पूरी घटना के लिए भारतीय जनता पार्टी (BJP) को जिम्मेदार ठहराया।
सांसद ने कहा, “पार्टी कार्यालय में कोई भी सरकारी या अवैध सामान जमा नहीं किया गया था। जो भी राहत सामग्री वहां रखी थी, उसे हमने खुद अपने निजी कोष और पैसों से खरीदा था ताकि क्षेत्र में बाढ़ आने की स्थिति में हम समय रहते स्थानीय गरीब लोगों की मदद कर सकें। यह हमला पूरी तरह से राजनीतिक प्रतिशोध की भावना से प्रेरित है।” मामला हाथ से निकलता देख स्थानीय पुलिस बल ने तुरंत मौके पर पहुंचकर मोर्चा संभाला और लाठीचार्ज कर हिंसक भीड़ को खदेड़ा।
पिछले एक हफ्ते में अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी पर भी हुए हमले
हाल के दिनों में टीएमसी के कई बड़े चेहरे विपक्षी दलों और जनता के गुस्से का शिकार हो चुके हैं:
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अभिषेक बनर्जी पर जूता-पत्थर से हमला: पिछले ही सप्ताह टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव और ममता बनर्जी के भतीजे अभिषेक बनर्जी पर दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर इलाके में जानलेवा हमला हुआ था। उग्र भीड़ ने उन पर अंडे, जूते और पत्थर बरसाए थे। स्थिति इतनी भयावह थी कि अभिषेक बनर्जी को एक क्रिकेट हेलमेट पहनकर और अपने सुरक्षाकर्मियों की मदद से बड़ी मुश्किल से जान बचाकर भागना पड़ा था।
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कल्याण बनर्जी का फूटा सिर: टीएमसी के कद्दावर सांसद कल्याण बनर्जी ने भी रविवार को आरोप लगाया कि हुगली जिले में एक पुलिस थाने के बाहर भाजपा समर्थकों ने उन पर जानलेवा हमला किया, जिसके कारण उनके सिर पर गंभीर चोट आई है। वे वहां चुनाव बाद भड़की हिंसा में गिरफ्तार हुए पार्टी कार्यकर्ताओं के विरोध में ज्ञापन सौंपने गए थे।
ममता बनर्जी का बयान: टीएमसी के सांसदों और विधायकों पर लगातार हो रहे इन हमलों के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने केंद्र सरकार और विपक्ष पर निशाना साधते हुए इसे सीधे तौर पर ‘पश्चिम बंगाल में लोकतंत्र की हत्या’ करार दिया है।
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