अमेरिका और ईरान के बीच पिछले 3 महीनों से जारी भीषण सैन्य संघर्ष (US-Iran War 2026) के बीच एक ऐसा अंतरराष्ट्रीय खुलासा हुआ है, जिसने पूरी दुनिया के कूटनीतिक हलकों में हड़कंप मचा दिया है। वैश्विक मंचों पर खुद को एक ‘शांति दूत’ (Peace Broker) के रूप में पेश करने वाले चीन का असली और भयावह चेहरा बेनकाब हो गया है।
अमेरिकी न्यूज आउटलेट एनबीसी न्यूज (NBC News) की एक खोजी रिपोर्ट में बेहद सनसनीखेज दावा किया गया है कि पिछले महीने (अप्रैल 2026) ईरान ने अमेरिका के जिस सबसे आधुनिक और अजेय माने जाने वाले F-15E स्ट्राइक ईगल (F-15E Strike Eagle) लड़ाकू विमान को मार गिराया था, उसमें किसी साधारण हथियार का नहीं, बल्कि चीन निर्मित अत्याधुनिक मिसाइल और रडार तकनीक का इस्तेमाल किया गया था।
चीन निर्मित ‘मैनपैड्स’ (MANPADS) मिसाइल और रडार से हुआ हमला
रिपोर्ट के मुताबिक, चीन एक तरफ तो युद्ध रुकवाने का नाटक कर रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे से वह लगातार ईरान की सैन्य ताकत को मजबूत करने में जुटा हुआ है। अमेरिकी फाइटर जेट को मार गिराने के लिए ईरान ने चीन में निर्मित MANPADS (मैन-पोर्टेबल एयर-डिफेंस सिस्टम – कंधे पर रखकर दागी जाने वाली मिसाइल) का इस्तेमाल किया था।
यही नहीं, रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि चीन ने तेहरान (ईरान) को चोरी-छिपे ‘स्टील्थ एयरक्राफ्ट टेक्नोलॉजी’ और ‘लॉन्ग-रेंज रडार सिस्टम’ भी सप्लाई किए हैं। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इसी चीनी अत्याधुनिक रडार तकनीक की मदद से ही ईरान की सेना अमेरिकी फाइटर जेट की सटीक लोकेशन को ट्रैक करने और उसे आसमान में ही ध्वस्त करने में कामयाब हो सकी।
क्या थी वह पूरी घटना? जब पायलट को बचाने के लिए अमेरिका ने झोंकी पूरी ताकत
यह ऐतिहासिक घटना अप्रैल 2026 की शुरुआत में घटित हुई थी, जब ईरान के दक्षिण-पश्चिमी हिस्से में गश्त कर रहा अमेरिकी ‘एफ-15ई स्ट्राइक ईगल’ अचानक ईरानी हमले का शिकार होकर क्रैश हो गया:
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पायलटों का रेस्क्यू: विमान के तबाह होते ही उसके चालक दल (Crew) के दो सदस्य ‘इजेक्शन सीट’ के जरिए विमान से बाहर निकलने में सफल रहे थे।
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36 घंटे का सर्च ऑपरेशन: इनमें से एक पायलट को अमेरिकी रेस्क्यू टीम ने तुरंत सुरक्षित बचा लिया था, लेकिन दूसरे पायलट को ढूंढने के लिए पेंटागन (Pentagon) को ईरान की धरती पर उतरकर दिन-रात एक करना पड़ा।
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पहाड़ियों में छिपकर बचाई जान: ईरानी सेना से बचने के लिए अमेरिकी पायलट एक सुदूर पहाड़ी इलाके की कंदराओं में छिप गया था। पेंटागन द्वारा चलाए गए 36 घंटे के एक बेहद जोखिम भरे और ऐतिहासिक सर्च ऑपरेशन के बाद, अमेरिकी स्पेशल फोर्सेज ने दो दिन बाद उसे ईरानी सीमा से सुरक्षित एयरलिफ्ट (Airlift) कर लिया था।
दशकों बाद अमेरिका की साख पर लगा सबसे बड़ा झटका
यद्यपि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता को अमेरिकी इतिहास का सबसे गौरवशाली क्षण बताया था, लेकिन अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के शीर्ष जनरलों के मुताबिक यह घटना अमेरिका के लिए एक बहुत बड़ा रणनीतिक झटका थी। पिछले कई दशकों में यह संभवतः पहला ऐसा मौका था जब अमेरिका का कोई अत्याधुनिक और अचूक श्रेणी का फ्रंटलाइन फाइटर जेट दुश्मन देश के सीधे जमीनी हमले का शिकार होकर आसमान से नीचे गिरा था। इसे वैश्विक स्तर पर अमेरिकी वायुसेना की साख और अजेय होने के तमगे पर एक सीधा प्रहार माना गया।
शी जिनपिंग ने ट्रंप को दिया था धोखा?
यह हैरान करने वाला खुलासा एक ऐसे संवेदनशील समय पर सामने आया है जब कुछ ही समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप खुद चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) से मुलाकात करने बीजिंग पहुंचे थे। राष्ट्रपति ट्रंप ने हाल ही में दिए एक इंटरव्यू में दावा किया था कि शी जिनपिंग ने उन्हें व्यक्तिगत रूप से यह पक्का भरोसा दिया है कि चीन इस युद्ध के दौरान ईरान को किसी भी प्रकार की सैन्य या हथियारों की मदद नहीं भेजेगा।
लेकिन एनबीसी न्यूज की यह रिपोर्ट जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन आने वाले दिनों में भी ईरान को ‘बैकडोर’ से मिलिट्री और लॉजिस्टिक सपोर्ट देने के कई गुप्त विकल्पों पर विचार कर रहा है। हालांकि, बीजिंग ने सार्वजनिक तौर पर इन सभी अमेरिकी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा है कि वह किसी भी युद्ध का समर्थन नहीं करता और पूरी तरह से पश्चिम एशिया में क्षेत्रीय शांति बहाली के पक्ष में है।
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