बीपी हाई हो या लो, सबसे पहले क्या करना चाहिए? मेदांता के डॉक्टर ने बताया इमरजेंसी एक्शन प्लान

नई दिल्ली: अचानक सिर भारी होना, तेज घबराहट, आंखों के सामने धुंधलापन या चक्कर आना— ये ऐसे लक्षण हैं जो किसी भी व्यक्ति को डरा सकते हैं। अक्सर लोग इन लक्षणों के उभरते ही यह मान लेते हैं कि उनका ब्लड प्रेशर (Blood Pressure) बिगड़ गया है और बिना जांच किए या बिना डॉक्टर की सलाह के पुरानी दवाएं खा लेते हैं। लेकिन मेदांता ग्रुप के मशहूर डॉक्टर मयंक सिंह के अनुसार, ऐसी स्थिति में घबराने के बजाय सही और वैज्ञानिक तरीका अपनाना जरूरी है।

डॉक्टर के मुताबिक, मशीन में एक बार बीपी का आंकड़ा बढ़ा या घटा हुआ दिखना हमेशा किसी बड़ी बीमारी या खतरे की निशानी नहीं होता। आइए जानते हैं कि अगर अचानक ब्लड प्रेशर हाई या लो हो जाए, तो सबसे पहले आपको कौन से कदम उठाने चाहिए।

1. अगर बीपी अचानक बढ़ जाए तो क्या करें? (High BP Immediate Action)

हाई ब्लड प्रेशर (Hypertension) की स्थिति में डॉक्टर ने निम्नलिखित बातों का ध्यान रखने की सलाह दी है:

  • एक बार नहीं, तीन बार करें जांच: अगर मशीन में पहली बार बीपी बढ़ा हुआ आता है, तो तुरंत किसी नतीजे पर न पहुंचें। शांत होकर बैठें और हर 15 मिनट के अंतराल (Gap) पर तीन बार बीपी चेक करें। अगर तीनों बार रीडिंग सामान्य से अधिक आती है, तभी उसे बढ़ा हुआ माना जाएगा।

  • कारण को समझें: कई बार तेज बुखार, मानसिक तनाव, अत्यधिक चिंता या शरीर में किसी तेज दर्द की वजह से भी ब्लड प्रेशर कुछ समय के लिए अचानक बढ़ जाता है। स्थिति सामान्य होने पर यह खुद ठीक हो जाता है, इसलिए तुरंत पैनिक न करें।

  • सक्रिय जीवनशैली: यदि आपका बीपी अक्सर फ्लक्चुएट करता है, तो रोजाना कम से कम 45 मिनट तेज कदमों से पैदल चलने (Bracing Walk) की आदत डालें। यह आपके कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम को मजबूत करता है।

खानपान में करें ये जरूरी बदलाव:

  • भोजन में नमक (Sodium) की मात्रा को तुरंत सीमित करें।

  • तला-भुना, जंक फूड और अत्यधिक चिकनाई (सैचुरेटेड फैट) वाले खाने से पूरी तरह दूरी बनाएं।

  • अपनी डाइट में पर्याप्त मात्रा में लीन प्रोटीन, हरी सब्जियां और फल शामिल करें।

  • मानसिक तनाव को कम करने के लिए रोजाना 10 से 15 मिनट ध्यान (Meditation) या प्राणायाम करें।

2. अगर बीपी बहुत कम हो जाए तो क्या करें? (Low BP Emergency Tips)

लो ब्लड प्रेशर (Hypotension) के मोर्चे पर डॉ. मयंक सिंह ने स्थिति को स्पष्ट करते हुए यह गाइडलाइंस दी हैं:

  • हर कम रीडिंग बीमारी नहीं: कई लोगों का नेचुरल ब्लड प्रेशर हमेशा 90/60 mm Hg या इसके आसपास रहता है। अगर रीडिंग कम है लेकिन व्यक्ति पूरी तरह एक्टिव और सामान्य महसूस कर रहा है, तो इलाज की कोई आवश्यकता नहीं होती।

  • खतरे के लक्षण पहचानें: लो बीपी तब गंभीर माना जाता है जब व्यक्ति को अत्यधिक कमजोरी लगे, आंखों के आगे अंधेरा छाए, बार-बार चक्कर आएं या वह बेहोश (Faint) हो जाए।

  • चक्कर आने या बेहोश होने पर फर्स्ट-एड (First Aid):

    1. सबसे पहले चेक करें कि पीड़ित व्यक्ति की सांसें चल रही हैं या नहीं और उसकी पल्स (धड़कन) कैसी है।

    2. अगर सांस सामान्य है, तो व्यक्ति को तुरंत करवट के बल (Side Position) सीधे जमीन या बेड पर लिटा दें और थोड़ी देर आराम करने दें।

    3. होश आने के बाद: जब व्यक्ति पूरी तरह होश में आ जाए, तो उसे सबसे पहले पानी पिलाएं। यदि संभव हो, तो उसे कुछ मीठा या हल्का नमकीन पानी दें, जिससे इलेक्ट्रोलाइट्स और शुगर लेवल तुरंत रिकवर हो सके। इसके बाद डॉक्टर से संपर्क करें।

डॉक्टर की विशेष सलाह: इन 4 बातों को कभी न भूलें

  1. सेल्फ-मेडिकेशन से बचें: ब्लड प्रेशर की कोई भी दवा बिना डॉक्टर की लिखित सलाह के न तो खुद से शुरू करें और न ही पहले से चल रही दवा को अचानक बंद करें।

  2. होम मॉनिटरिंग: अगर आपके घर में बीपी के मरीज हैं, तो एक डिजिटल बीपी मशीन जरूर रखें और समय-समय पर उसकी रीडिंग नोट करते रहें।

  3. इमरजेंसी के लक्षण: यदि बीपी बिगड़ने के साथ-साथ अचानक सीने में तेज दर्द (Chest Pain), सांस लेने में गंभीर परेशानी, बोलने में लड़खड़ाहट या बेहोशी हो, तो बिना एक मिनट गंवाए मरीज को तुरंत नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में ले जाएं।

  4. इग्नोर न करें: लगातार कई दिनों तक बीपी का सामान्य (120/80 mm Hg) से ऊपर या नीचे बने रहना किसी अंदरूनी बीमारी का संकेत हो सकता है, इसकी उचित जांच कराएं।

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