बिखरने लगी थलपति विजय की TVK! नेताओं के खिलाफ कोर्ट पहुंची महिला पदाधिकारी को पार्टी से निकाला; लगे गंभीर आरोप

चेन्नई: अभिनेता से राजनेता और फिर तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बने थलपति विजय (Thalapathy Vijay) की पार्टी तमिलझा वेत्री कड़गम (TVK) में आंतरिक कलह और सियासी घमासान तेज हो गया है। पार्टी के शीर्ष नेताओं और मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार तथा रिश्वतखोरी का संगीन आरोप लगाते हुए मद्रास हाई कोर्ट का रुख करने वाली महिला पदाधिकारी एम. ज्ञानसौंदरी को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखा दिया है।

शनिवार (18 जुलाई) को टीवीके (TVK) नेतृत्व ने आधिकारिक बयान जारी कर इस कड़े ऐक्शन की जानकारी दी। इसके साथ ही पार्टी के अन्य सभी नेताओं और कार्यकर्ताओं को निष्कासित महिला नेता से किसी भी तरह का संपर्क न रखने की सख्त हिदायत दी गई है।

विपक्षी दलों से मिलीभगत का आरोप: 17 जुलाई को हुई कार्रवाई

टीवीके के वरिष्ठ नेता एन. मोहनराज ने मीडिया से बातचीत करते हुए इस अनुशासनात्मक कार्रवाई की वजहों को स्पष्ट किया:

  • प्राथमिक सदस्यता रद्द: पेशे से वकील एम. ज्ञानसौंदरी को 17 जुलाई को ही पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से सस्पेंड कर दिया गया था, जिसकी आधिकारिक घोषणा शनिवार को की गई।

  • छवि खराब करने की साजिश: मोहनराज ने जोर देकर कहा कि ज्ञानसौंदरी ने विपक्षी पार्टियों के साथ मिलीभगत करके अपनी ही पार्टी के नेताओं के खिलाफ झूठे और मनगढ़ंत आरोप लगाए, जिसका मुख्य उद्देश्य पार्टी की साफ-सुथरी छवि को नुकसान पहुंचाना था।

क्या है पूरा विवाद? सरकारी वकीलों की भर्ती में रिश्वत का आरोप

विधानसभा चुनाव में पार्टी के लिए अहम भूमिका निभाने वाली ज्ञानसौंदरी ने हाल ही में एक बड़ा विवाद खड़ा कर दिया था:

हाई कोर्ट में याचिका: ज्ञानसौंदरी ने मद्रास हाई कोर्ट में एक याचिका दायर कर आरोप लगाया था कि टीवीके के बड़े नेता और सरकार के मंत्री सरकारी वकीलों (Government Advocates) की अस्थायी नियुक्ति में भारी धांधली और रिश्वतखोरी कर रहे हैं। याचिका में दावा किया गया था कि वकीलों को अस्थायी पदों पर नियुक्त करने से पहले उनसे मोटी रकम (रिश्वत) की मांग की जा रही है।

मद्रास हाई कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘सिर्फ पब्लिसिटी स्टंट’

टीवीके ने यह निष्कासन ऐसे समय पर किया है जब मद्रास हाई कोर्ट ने भी ज्ञानसौंदरी की याचिका पर सुनवाई के दौरान कड़ा रुख अपनाया। कोर्ट में सुनवाई के दौरान निम्नलिखित तथ्य सामने आए:

कोर्ट की टिप्पणी और सरकारी पक्ष मुख्यमंत्री विजय का भ्रष्टाचार विरोधी कड़ा रुख
याचिका को बताया बढ़ा-चढ़ाकर पेश: हाई कोर्ट ने गौर किया कि इस याचिका को जानबूझकर बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। कोर्ट ने कहा कि आरोपियों की लिस्ट में कुछ मंत्रियों का नाम सिर्फ मीडिया का ध्यान आकर्षित करने (Publicity) के लिए डाला गया है। एंटी-करप्शन हेल्पलाइन: मुख्यमंत्री विजय ने हाल ही में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी मुहिम शुरू करते हुए एक विशेष हेल्पलाइन नंबर जारी किया था। उन्होंने कहा था कि कोई भी सरकारी कर्मचारी या अधिकारी रिश्वत मांगे, तो तुरंत शिकायत करें।
6 महीने का वक्त लगेगा: सरकारी वकील ने अदालत को स्पष्ट किया कि आधिकारिक और स्थाई नियुक्तियों की प्रक्रिया में 6 महीने से अधिक का समय लगेगा, इसलिए प्रशासनिक कार्यों को सुचारू रूप से चलाने के लिए ये अस्थायी नियुक्तियां की गई हैं। मंत्रियों को सख्त निर्देश: मुख्यमंत्री ने अपने सभी मंत्रियों को सख्त हिदायत दी थी कि उनके विभागों में किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। दोषी पाए जाने पर पद या उम्र की परवाह किए बिना कड़ी सजा दी जाएगी।

भ्रष्टाचार विरोधी एजेंडे पर सरकार बनाने वाले थलपति विजय के लिए उनकी ही पार्टी की नेता द्वारा लगाए गए ये आरोप एक बड़ा झटका माने जा रहे थे। हालांकि, कोर्ट से मिली राहत और त्वरित कार्रवाई करते हुए ज्ञानसौंदरी को पार्टी से बर्खास्त कर टीवीके ने यह साफ कर दिया है कि वह सरकार और संगठन के खिलाफ किसी भी तरह की गुटबाजी या साजिश को बर्दाश्त नहीं करेगी।

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