सोनम वांगचुक को जंतर-मंतर से हटाने पर भड़के अधीर रंजन चौधरी, बोले – ‘कांग्रेस पार्टी मानसून सत्र में संसद के भीतर…’

नई दिल्ली: नीट (NEET) पेपर लीक मामले में केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर 20 दिनों से भूख हड़ताल पर बैठे एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक (Sonam Wangchuk) को पुलिस द्वारा जबरन अस्पताल पहुंचाए जाने के बाद राजनीतिक बवाल थमता नजर नहीं आ रहा है। राहुल गांधी के बाद अब कांग्रेस के दिग्गज नेता अधीर रंजन चौधरी (Adhir Ranjan Chowdhury) ने भी इस कार्रवाई को लेकर केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।

शनिवार (18 जुलाई) को इस घटना को बेहद शर्मनाक करार देते हुए अधीर रंजन चौधरी ने सीधे तौर पर सरकार की लोकतांत्रिक सोच पर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी है कि आगामी मानसून सत्र (Monsoon Session) के दौरान कांग्रेस पार्टी इस मुद्दे पर सरकार को संसद के भीतर और बाहर चैन से नहीं बैठने देगी।

‘विद्वानों को घसीटना शर्मनाक, गांधी के रास्ते पर चलने का दावा झूठा’

अधीर रंजन चौधरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (ट्विटर) पर एक बेहद तीखा पोस्ट साझा करते हुए दिल्ली पुलिस और केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा:

  • गरिमा का अपमान: सोनम वांगचुक जैसे दूरदर्शी स्कॉलर और सामाजिक कार्यकर्ता को अनशन स्थल से जबरन घसीटना बेहद शर्मनाक है। यह पुलिसिया कार्रवाई न सिर्फ एक प्रतिष्ठित व्यक्ति की गरिमा का अपमान है, बल्कि जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण रूप से जारी लोकतांत्रिक विरोध प्रदर्शन पर भी सीधा हमला है।

  • महात्मा गांधी के सिद्धांतों का ढोंग: चौधरी ने सरकार को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि जो सरकार एक जायज मांग को लेकर की जा रही भूख हड़ताल तक की पूरी तरह अनदेखी करती है, वो दुनिया के सामने महात्मा गांधी के अहिंसा और सत्याग्रह के रास्ते पर चलने का दावा कैसे कर सकती है?

  • कांग्रेस का स्टैंड: इसके विपरीत, कांग्रेस पार्टी ने हमेशा जनता की बुनियादी आवाज को सुना है और लोकतांत्रिक तरीके से व्यक्त की जा रही हर असहमति का सम्मान किया है।

‘जनता की आवाज न सुनने वाली सरकार का अंत करीब’

अधीर रंजन चौधरी ने सरकार के इस कड़े रुख को उसकी निरंकुशता का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि देश की जनता इस तानाशाही रवैये को बेहद बारीकी से देख रही है:

अधीर रंजन चौधरी का बड़ा बयान: “जो सरकार अपने ही देश के छात्रों और विद्वानों की आवाज सुनने के लिए तैयार नहीं है और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार करती है, समझ लीजिए कि उस सत्ता का समय अब अपने अंत की तरफ पहुंच रहा है। जनता सब कुछ देख रही है और वक्त आने पर इसका माकूल जवाब देगी।”

मानसून सत्र में विपक्ष की आर-पार की लड़ाई का ऐलान

आगामी सोमवार से शुरू हो रहे संसद के मानसून सत्र से ठीक पहले कांग्रेस ने विपक्षी दलों की एकजुटता और रणनीतिक आक्रामकता का रोडमैप साफ कर दिया है:

कांग्रेस का एक्शन प्लान (Action Plan) नेतृत्व और रणनीतिक मोर्चे (Leadership)
संसद के भीतर महासंग्राम कांग्रेस पार्टी मानसून सत्र के दौरान लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों के भीतर नीट पेपर लीक और सोनम वांगचुक के साथ हुए दुर्व्यवहार को लेकर सरकार को घेरेगी और काम रोको प्रस्ताव जैसे कदम उठा सकती है।
सड़क से संसद तक संघर्ष चौधरी ने साफ किया कि सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खरगे और राहुल गांधी के मजबूत नेतृत्व में कांग्रेस पार्टी इस निरंकुश सरकार के खिलाफ न सिर्फ संसद के भीतर, बल्कि पूरे देश की सड़कों पर अपने विरोध और संघर्ष को और तेज करेगी।

सोनम वांगचुक के अनशन स्थल से हटने के बाद कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रमुख अभिजीत दीप्के द्वारा भूख हड़ताल शुरू करने और सोमवार को ‘संसद मार्च’ के ऐलान के बीच, अधीर रंजन चौधरी के इस बयान ने यह साफ कर दिया है कि इस बार का मानसून सत्र बेहद हंगामेदार रहने वाला है। कांग्रेस, टीएमसी (TMC) और अन्य विपक्षी दल इस मुद्दे पर पूरी तरह से आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुके हैं।

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