उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का जाल बिछने के बाद अब वाहन चालकों के सफर को और अधिक सुगम, हाई-टेक और समय बचाने वाला बनाया जा रहा है। इसी कड़ी में राज्य को एक और बड़ी सौगात मिलने जा रही है। अब लखनऊ से कानपुर के बीच का सफर तय करने वाले यात्रियों को टोल टैक्स देने के लिए टोल प्लाजा पर अपनी गाड़ियाँ रोकने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे (NE-6) उत्तर प्रदेश का ऐसा पहला अत्याधुनिक एक्सप्रेसवे बनने जा रहा है, जहां ‘स्टॉप-फ्री’ टोलिंग सिस्टम लागू किया जाएगा। वाहन चालकों के टोल प्लाजा पर पहुंचने से पहले ही उनके बैंक अकाउंट या फास्टैग से पैसे कट जाएंगे और गाड़ी के पहुंचते ही बैरियर अपने आप खुल जाएगा।
एएनपीआर (ANPR) कैमरों से पलक झपकते ही कटेगा टोल
इस एक्सप्रेसवे पर वाहनों की रफ्तार को बिना थामे टोल वसूलने के लिए बेहद आधुनिक एएनपीआर (ANPR – ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे लगाए गए हैं।
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जब कोई वाहन एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड या ग्रीनफील्ड हिस्से पर दौड़ रहा होगा, तो टोल प्लाजा से कुछ सौ मीटर पहले ही ये कैमरे गाड़ी की नंबर प्लेट और फास्टैग (FASTag) को ऑटोमैटिकली रीड कर लेंगे।
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जैसे ही वाहन टोल बैरियर के ठीक करीब पहुंचेगा, सिस्टम से हरी झंडी मिलते ही बैरियर स्वतः खुल जाएगा।
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इससे टोल प्लाजा पर लगने वाले लंबे जाम और ईंधन की बर्बादी से पूरी तरह निजात मिल जाएगी।
वाहनों की अधिकतम गति सीमा (Speed Limit) तय
एक्सप्रेसवे को बेहद सुरक्षित और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिसके तहत वाहनों की अधिकतम स्पीड भी निर्धारित कर दी गई है:
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कार, जीप और एसयूवी (SUV): एलिवेटेड और ग्रीनफील्ड रोड पर इन वाहनों के लिए अधिकतम गति 120 किलोमीटर प्रति घंटा तय की गई है।
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कमर्शियल वाहन (बस और ट्रक): भारी व व्यावसायिक वाहनों के लिए अधिकतम गति सीमा 100 किलोमीटर प्रति घंटा निर्धारित है।
150 की स्पीड पर भी नहीं होगा कंपन, की गई टेस्ट ड्राइविंग
इस एक्सप्रेसवे के निर्माण में बेहद उच्च और आधुनिक सिविल इंजीनियरिंग तकनीक का इस्तेमाल किया गया है। टेस्ट ड्राइविंग के दौरान जब एक एसयूवी गाड़ी को 150 किमी/घंटा की तूफानी रफ्तार पर दौड़ाया गया, तब भी वाहन में कोई कंपन (Vibration) महसूस नहीं हुआ और न ही ड्राइवर को गाड़ी को नियंत्रित करने में कोई परेशानी आई। इस सड़क की स्मूथनेस ऐसी है कि 60 या 80 की स्पीड पर चलने वाले ड्राइवरों को लगेगा कि गाड़ी बेहद धीमी गति से चल रही है।
आबादी वाले इलाकों को शोर से बचाएंगे 10 फीट ऊंचे ‘ध्वनि रोधक बैरियर’
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के एलिवेटेड हिस्से के आसपास रहने वाली घनी आबादी को गाड़ियों के कानफोड़ू शोर और हॉर्न की आवाज से बचाने के लिए भी नई तकनीक का इस्तेमाल किया गया है।
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एक्सप्रेसवे के दोनों किनारों पर 10 फीट ऊंचे आधुनिक ध्वनि रोधक (Noise Barriers) लगाए जा रहे हैं।
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एल्युमिनियम और स्टील के मजबूत फ्रेम से बने इन बैरियरों के बीच में एक विशेष प्रकार का फाइबर भरा गया है।
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जब भी गाड़ियों की तेज आवाज या हॉर्न का शोर इन बैरियरों से टकराएगा, तो इसके अंदर मौजूद फाइबर उस ध्वनि को अपने अंदर सोख (Absorb) लेगा, जिससे एक्सप्रेसवे का शोर बाहर रिहायशी इलाकों तक नहीं पहुंच पाएगा।
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