उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी और अघोषित बिजली कटौती की मार झेल रही जनता को 1 जून 2026 से एक और बड़ा झटका लगा है। राज्य में बिजली की दरों में 10 फीसदी तक की बढ़ोतरी कर दी गई है। इस फैसले के बाद प्रदेश की सियासत पूरी तरह गरमा गई है।
समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने बिजली दरों में इस वृद्धि को लेकर राज्य की भाजपा सरकार पर तीखा तंज कसा है। अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर पोस्ट साझा करते हुए इस बढ़ोतरी को जनता की जेब पर डाका और आगामी विधानसभा चुनाव से जुड़ा ‘तिकड़मी टैक्स’ करार दिया है।
“जून का बिजली बिल देखकर आंखों के आगे छा जाएगा अंधेरा”
अखिलेश यादव ने ट्वीट करते हुए लिखा, “जून महीने से बिजली का बढ़ा हुआ बिल देखकर प्रदेश की जनता की आंखों के आगे अंधेरा छा जाएगा।” उन्होंने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि बिजली बिलों में की गई यह बढ़ोतरी उपभोक्ताओं को बेहतर बिजली या सुविधाएं देने के लिए नहीं है, बल्कि यह भाजपा सरकार द्वारा आगामी चुनावों की तैयारी के लिए धन जुटाने का एक जरिया है।
अखिलेश का तंज: भाजपा ने वसूला ‘इलेक्शन सरचार्ज’ और ‘बढ़ा हुआ कमीशन’
सपा सुप्रीमो ने बेहद आक्रामक अंदाज में कहा कि बिजली बिल के नाम पर भाजपा सरकार असल में साल 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के खर्चों की एडवांस व्यवस्था कर रही है। उन्होंने इस बढ़ी हुई 10% राशि को ‘इलेक्शन सरचार्ज’ (Election Surcharge) का नाम दिया।
अखिलेश ने दावा किया कि बिजली के बिल में बढ़ोतरी दरअसल कुछ और नहीं, बल्कि भाजपा का बढ़ा हुआ ‘कमिशन’ है, जिसका खामियाजा उत्तर प्रदेश के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को भुगतना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता पहले से ही रिकॉर्डतोड़ महंगाई, बेरोजगारी और रोजमर्रा के बढ़ते खर्चों से त्रस्त है, ऐसे में बिजली महंगी करके आम परिवारों, किसानों और छोटे व्यापारियों की कमर पूरी तरह तोड़ दी गई है।
क्यों और कैसे बढ़ा जून का बिजली बिल? जानिए असली वजह
उत्तर प्रदेश के उपभोक्ताओं को इस महीने (जून) जो बिजली का बिल मिलेगा, वह पिछले महीनों के मुकाबले 10 प्रतिशत अधिक महंगा होकर आएगा। उत्तर प्रदेश पावर कॉर्पोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के इस फैसले की मुख्य बातें इस प्रकार हैं:
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फ्यूल सरचार्ज का झटका: बिजली दरों में यह सीधी बढ़ोतरी ‘ईंधन अधिभार’ (Fuel Surcharge) के तहत की गई है।
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कटौती के बीच बढ़ी दरें: उत्तर प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी के कारण बिजली की भारी किल्लत और ग्रामीण से लेकर शहरी इलाकों तक लंबी कटौती देखने को मिल रही है। ऐसे संकट के समय में सरचार्ज वसूलने के फैसले ने उपभोक्ताओं की नाराजगी को दोगुना कर दिया है।
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अतिरिक्त भुगतान: जून के महीने में आने वाले बिजली बिल के साथ ही उपभोक्ताओं को यह 10% अतिरिक्त ईंधन शुल्क जोड़कर देना होगा।
बिजली पर यूपी की राजनीति में घमासान तेज
बिजली दरों में इस अचानक बढ़ोतरी को विपक्ष ने सरकार के खिलाफ एक बड़ा हथियार बना लिया है। समाजवादी पार्टी का कहना है कि प्रदेश में बिजली आपूर्ति का इन्फ्रास्ट्रक्चर पूरी तरह ध्वस्त है, उत्पादन में कोई अपेक्षित सुधार नहीं हुआ है, लेकिन इसके बावजूद उपभोक्ताओं से लगातार मोटी रकम वसूली जा रही है।
दूसरी तरफ, हालांकि सरकार या यूपीपीसीएल की ओर से अखिलेश यादव के इन राजनीतिक आरोपों पर अभी तक कोई आधिकारिक पलटवार सामने नहीं आया है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह मुद्दा एक बड़ी बहस का रूप ले चुका है। कयास लगाए जा रहे हैं कि आगामी दिनों में इस ‘फ्यूल सरचार्ज’ को लेकर विधानसभा से लेकर सड़क तक सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर और ज्यादा आक्रामक होने वाला है।
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