
भारतीय संस्कृति में पान खाने की परंपरा सदियों पुरानी है। स्वास्थ्य के लिहाज से शुद्ध और सादा पान का पत्ता सेहत के लिए बेहद फायदेमंद माना गया है। यह पाचन तंत्र को दुरुस्त करने, मुंह की सेहत बनाए रखने और सर्दी-खांसी में राहत दिलाने में सहायक होता है। हालांकि, समस्या पान के पत्ते में नहीं, बल्कि उसमें मिलाई जाने वाली चीजों में है। जब पान में तंबाकू, सुपारी, गुटखा, चूना और निकोटिन युक्त मसाले मिलाए जाते हैं, तब यही पान एक जानलेवा रूप ले लेता है। विशेषज्ञों के अनुसार, सादा पान कैंसर नहीं फैलाता, लेकिन तंबाकू और सुपारी युक्त पान सीधा ‘ओरल कैंसर’ (Oral Cancer) का कारण बनता है।
चूना और तंबाकू का घातक कॉम्बिनेशन: 10 सेकंड में दिमाग पर हमला
पान में मिलाया जाने वाला चूना मुंह की अंदरूनी कोमल त्वचा में सूक्ष्म घाव पैदा कर देता है। इसके बाद तंबाकू में मौजूद हानिकारक रसायन इन घावों के जरिए सीधे खून की धमनियों में प्रवेश कर जाते हैं। तंबाकू का निकोटिन सेवन के महज 10 सेकंड के भीतर दिमाग तक पहुंचकर ‘डोपामाइन’ नामक न्यूरोट्रांसमीटर रिलीज करता है। इससे व्यक्ति को कुछ पलों के लिए शांति और आनंद का झूठा अहसास होता है। जैसे ही इसका असर कम होता है, दिमाग फिर से नशे की मांग करता है, जिससे व्यक्ति को इसकी तीव्र लत लग जाती है।
डीएनए डैमेज और मुंह का कड़ापन: ऐसे जन्म लेती हैं कैंसर की कोशिकाएं
लगातार तंबाकू और चूने वाला पान चबाने से मुंह के अंदर फाइब्रोसिस होने लगता है, जिससे मुंह की कोशिकाएं कड़ी हो जाती हैं। इसके घातक रसायन कोशिकाओं के डीएनए (DNA) पर सीधा हमला करते हैं। सामान्य स्थिति में डीएनए तय करता है कि कोशिका को कब बढ़ना है और कब नष्ट होना है, लेकिन रसायनों के प्रभाव से यह तंत्र नष्ट हो जाता है। डीएनए डैमेज होने के कारण खराब कोशिकाएं मरना बंद हो जाती हैं और तेजी से नई अनियंत्रित कोशिकाएं बनाने लगती हैं, जो आगे चलकर कैंसर के ट्यूमर का रूप ले लेती हैं।
The News 11 – Hindustan Newspaper, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया