
पीरियड्स के दौरान हल्की ऐंठन या मीठा दर्द होना सामान्य माना जाता है, लेकिन कई महिलाओं के लिए यह दर्द इतना भयानक हो जाता है कि उनका सामान्य जीवन ठप पड़ जाता है। एनेस्थीसियोलॉजी और इंटरवेंशनल पेन मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. कुनाल सूद ने यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (UCL) के एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि कुछ महिलाओं में पीरियड्स की क्रैम्प्स (ऐंठन) की तीव्रता हार्ट अटैक के दर्द जितनी गंभीर हो सकती है। हालांकि, विशेषज्ञ साफ करते हैं कि यह तुलना बीमारियों की प्रकृति के आधार पर नहीं, बल्कि केवल दर्द की भयावहता और मरीज को होने वाली शारीरिक पीड़ा के स्तर को दर्शाने के लिए की गई है।
सेकेंडरी डिसमेनोरिया और एंडोमेट्रियोसिस का खतरा
डॉक्टरों के अनुसार, पीरियड्स में होने वाला ऐसा असहनीय दर्द मुख्य रूप से ‘सेकेंडरी डिसमेनोरिया’ (Secondary Dysmenorrhea) की स्थिति में देखा जाता है। इसका सबसे प्रमुख कारण ‘एंडोमेट्रियोसिस’ (Endometriosis) नाम की बीमारी है। इस बीमारी में गर्भाशय (Uterus) के अंदर पाई जाने वाली परत (Tissue) गर्भाशय के बाहर अंडाशय (Ovaries), फैलोपियन ट्यूब्स और पेल्विक हिस्से में उगने लगती है। गंभीर मामलों में यह ऊतक आंतों और मूत्राशय तक पहुंच जाते हैं। इसके चलते महिलाओं को पीरियड के दौरान बहुत तेज दर्द, हैवी ब्लीडिंग, पेट के निचले हिस्से में लगातार सूजन और गर्भधारण (Pregnancy) करने में काफी जटिलताओं का सामना करना पड़ता है।
कब लें विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह?
डॉ. कुनाल सूद का मानना है कि महिलाओं के पीरियड पेन को ‘सामान्य’ समझकर खारिज करने की सामाजिक मानसिकता को बदलना होगा। यदि हर महीने मासिक धर्म का दर्द इतना बढ़ जाता है कि रोजमर्रा के काम करना असंभव हो जाए या पेनकिलर से भी राहत न मिले, तो बिना देरी किए स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) से जांच करानी चाहिए। स्वास्थ्य जगत में इस विषय पर व्यापक रिसर्च और सटीक पेन मैनेजमेंट तकनीकों की आवश्यकता जताई जा रही है ताकि एंडोमेट्रियोसिस का समय पर निदान (Diagnosis) हो सके।
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