
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक अस्पताल से छुट्टी मिलने के बाद लद्दाख लौटने से पहले अपनी पत्नी गीतांजलि आंग्मो के साथ बापू को नमन करने राजघाट पहुंचे। हालांकि, भारी पुलिस सुरक्षा के बीच हुए इस दौरे में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) का कोई भी प्रमुख नेता उनके साथ नजर नहीं आया। अभिजीत दीपके, सौरव दास या आशुतोष रांका जैसे छात्र आंदोलन का नेतृत्व कर रहे नेताओं की दूरी ने वांगचुक और सीजेपी के बीच मतभेद की खबरों को हवा दे दी है। 28 जून को अनशन शुरू करने से पहले वांगचुक जब राजघाट गए थे, तब पूरी टीम उनके साथ थी, लेकिन अब अनशन समाप्त होने के बाद यह खाई साफ नजर आ रही है।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर बिगड़ी बात: अनशन समाप्त करने से क्यों नाराज हुई CJP?
वांगचुक और सीजेपी नेतृत्व के बीच टकराव की मुख्य वजह केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग रही। जंतर-मंतर पर अनशन के मुख्य बैनर में प्रधान का इस्तीफा ही सबसे प्रमुख मुद्दा था। 20 जुलाई के संसद मार्च के बाद जब गुरुग्राम के अस्पताल में सरकार के प्रतिनिधि जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने वांगचुक से मुलाकात की, तो वांगचुक ने मंत्री के इस्तीफे की शर्त को छोड़कर सरकार के आश्वासन पत्र पर अनशन तोड़ दिया। हालांकि, जंतर-मंतर पर डटे सीजेपी नेता अभिजीत दीपके ने वांगचुक के अनशन तोड़ने पर खुशी तो जताई, लेकिन साफ कर दिया कि जब तक धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा नहीं देते, तब तक जंतर-मंतर पर प्रदर्शन जारी रहेगा।
पुलिस कार्रवाई और प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर दो फाड़ हुआ स्टैंड
दोनों पक्षों के बीच दूसरा बड़ा मतभेद प्रदर्शनकारियों पर कानूनी कार्रवाई को लेकर सामने आया है। सोनम वांगचुक शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई न होने के सरकारी आश्वासन से संतुष्ट हो गए, जबकि कॉकरोच जनता पार्टी ने देशभर में गिरफ्तार किए गए सभी छात्रों और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामले वापस लेने की मांग रखी है। बिहार समेत कई राज्यों में हुई गिरफ्तारियों को लेकर सीजेपी ने सरकार पर वादाखिलाफी का आरोप लगाते हुए आंदोलन दोबारा शुरू करने की चेतावनी दी है। इस स्थिति ने यह बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या भविष्य में होने वाले किसी भी अगले आंदोलन में सोनम वांगचुक सीजेपी के साथ मंच साझा करेंगे या नहीं।
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