उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) ने प्रदेश की भावी पीढ़ी, यानी बच्चों और युवाओं के साथ एक अनोखा और सीधा संवाद स्थापित किया है। मुख्यमंत्री ने “योगी की पाती” शीर्षक से प्रदेश के नौनिहालों और युवाओं के नाम एक खुला भावुक पत्र लिखा है।
इस विशेष चिट्ठी के माध्यम से सीएम योगी ने युवाओं और बच्चों से अपने जीवन के सबसे खास दिनों—जैसे जन्मदिन या घर के किसी भी शुभ अवसर पर अनिवार्य रूप से एक पौधा लगाने और एक सच्चे अभिभावक की तरह उसकी पूरी जिम्मेदारी उठाने की एक बड़ी और अनोखी अपील की है। इसके साथ ही उन्होंने पर्यावरण, जल और प्रकृति संरक्षण को हमारी सनातन संस्कृति का मूल आधार बताया है।
‘सिर्फ पौधा लगाना काफी नहीं, माता-पिता की तरह करें उसकी देखभाल’
मुख्यमंत्री ने राज्य के बच्चों को ‘प्यारे बच्चों’ कहकर संबोधित करते हुए पत्र में लिखा, “मैं आपसे आज एक बेहद विशेष और दिल की बात कहना चाहता हूँ। हर वर्ष जब भी आपका जन्मदिन आए या आपके घर में कोई भी मांगलिक व शुभ अवसर हो, तो प्रकृति के प्रति अपनी कृतज्ञता (Thankfulness) जताते हुए एक पौधा अवश्य लगाएं। लेकिन हमेशा याद रहे, सिर्फ जमीन में पौधा लगा देना ही काफी नहीं है, बल्कि एक सच्चे माता-पिता की तरह उसकी पूरी देखभाल भी करें, जब तक कि वह एक बड़ा और मजबूत वृक्ष न बन जाए।”
युवाओं का आह्वान करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सूबे की युवा ऊर्जा ही इस ‘हरित और समृद्ध उत्तर प्रदेश’ के संकल्प की सबसे बड़ी रीढ़ है। युवाओं को आगे आकर जल संरक्षण, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण और हमारी जीवनदायिनी नदियों के जीर्णोद्धार का सबसे मजबूत आधार बनना होगा।
प्रकृति की पूजा ही सनातन संस्कृति का मूल संदेश
सीएम योगी ने भारतीय संस्कृति और पर्यावरण के अटूट संबंधों को रेखांकित करते हुए लिखा कि हमारी सनातन संस्कृति में वृक्षों, पहाड़ों, पवित्र नदियों और छोटे-बड़े जीव-जंतुओं की पूजा करने की एक अत्यंत गौरवशाली व वैज्ञानिक परंपरा रही है। हमारे वेदों और पुराणों में भी प्रकृति की रक्षा को साक्षात ईश्वर की आराधना के बराबर माना गया है।
चिट्ठी में संस्कृति के तीन ऋणों का उल्लेख:
मुख्यमंत्री ने हमारे शास्त्रों में वर्णित तीन ऋणों—’देव ऋण’, ‘ऋषि ऋण’ और ‘पितृ ऋण’ का जिक्र करते हुए बताया कि इनमें से ‘देव ऋण’ का सीधा संबंध हमारी प्रकृति, पंचभूतों (क्षिति, जल, पावक, गगन, समीरा) और पर्यावरण से है। जल, जंगल, जमीन और जीवों का संरक्षण करके ही हम इस देव ऋण से मुक्त हो सकते हैं। वट सावित्री व्रत और लोक आस्था के महापर्व ‘छठ पूजा’ का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि हमारे सभी त्योहार प्रकृति के साथ इंसानी जुड़ाव का सबसे जीवंत उदाहरण हैं।
यूपी में पर्यावरण संरक्षण को मिल रही नई उड़ान: रामसर स्थलों की संख्या हुई 12
मुख्यमंत्री ने पत्र में शासन स्तर पर पर्यावरण सुधार के लिए उठाए गए बड़े और ऐतिहासिक कदमों की जानकारी भी साझा की:
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एक जनपद एक नदी योजना: ‘जल है तो हम हैं’ के सिद्धांत पर चलते हुए राज्य सरकार ने विलुप्त हो रही नदियों को नवजीवन देने के लिए इस योजना की शुरुआत की है, जिसके बेहद सकारात्मक और जमीनी परिणाम सामने आ रहे हैं।
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रामसर स्थलों में बढ़ोतरी: अलीगढ़ की ऐतिहासिक ‘शेखा झील पक्षी अभ्यारण्य’ को नया दर्जा मिलने के बाद अब उत्तर प्रदेश में अंतरराष्ट्रीय महत्व के कुल ‘रामसर स्थलों’ (Ramsar Sites) की संख्या बढ़कर 12 हो गई है।
चिट्ठी के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी प्रदेशवासियों, युवाओं और बच्चों से जलस्रोतों के संवर्धन (Water Conservation) और धरती को हरा-भरा बनाकर आने वाली पीढ़ियों के लिए एक सुरक्षित व समृद्ध भविष्य के निर्माण का महासंकल्प लेने का भावुक आग्रह किया है।
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