भारत सहित पूरी दुनिया में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। हालांकि, चिकित्सा विज्ञान में हुई तरक्की के कारण सही समय पर इलाज मिलने से अब इस गंभीर बीमारी को पूरी तरह मात दी जा सकती है। कैंसर के इलाज में सबसे मुख्य और प्रभावी भूमिका ‘कीमोथेरेपी’ (Chemotherapy) निभाती है। कीमो की दवाएं कैंसर सेल्स को जड़ से खत्म करने का काम करती हैं, लेकिन इस प्रक्रिया के दौरान मरीज के शरीर की स्थिति बेहद संवेदनशील हो जाती है।
सीनियर ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. हर्षवर्धन अत्रेय के अनुसार, कीमोथेरेपी के बाद मरीज की हालत बिल्कुल एक नवजात बच्चे जैसी हो जाती है, क्योंकि इस इलाज के कारण शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता (Immunity) लगभग शून्य हो जाती है। ऐसे में अनजाने में खिलाया गया ताजा और हेल्दी खाना भी मरीज के लिए किसी जहर की तरह काम कर सकता है और गंभीर फूड इंफेक्शन का कारण बन सकता है। लखनऊ के रहने वाले और 15 से अधिक वर्षों का अनुभव रखने वाले वरिष्ठ ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. हर्षवर्धन अत्रेय ने कैंसर मरीजों के लिए डाइट के कुछ बेहद जरूरी और चौंकाने वाले नियम साझा किए हैं।
कीमोथेरेपी के बाद क्यों अचानक खत्म हो जाती है इम्यूनिटी?
कीमोथेरेपी की हैवी दवाएं नसों के जरिए, ड्रिप या ओरल मेडिसिन के रूप में मरीज को दी जाती हैं। ये दवाएं तेजी से बढ़ने वाली कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करती हैं, लेकिन इस प्रक्रिया में वे शरीर की स्वस्थ कोशिकाओं को भी नुकसान पहुंचा देती हैं। इसके कारण शरीर में डब्ल्यूबीसी (WBC – व्हाइट ब्लड सेल्स) की संख्या तेजी से गिरने लगती है, जो हमें किसी भी तरह के संक्रमण से बचाते हैं।
कीमो साइकिल पूरा होने के बाद के 7 से 14 दिन मरीज के लिए सबसे ज्यादा संवेदनशील और नाजुक माने जाते हैं। इस दौरान मरीज के शरीर में बैक्टीरिया, वायरस या फंगस का हमला होने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है। ऐसे में अगर खान-पान में जरा सी भी चूक हुई, तो मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती करना पड़ सकता है, जिससे कीमो की अगली साइकिल में देरी होती है और कैंसर के खिलाफ लड़ाई कमजोर पड़ जाती है।
सेहतमंद दिखने वाले ताजे फल और जूस आखिर क्यों बन जाते हैं जहर?
आमतौर पर हम किसी भी बीमार व्यक्ति को ताकत देने के लिए तुरंत ताजे कटे हुए फल, सलाद या कच्चे फलों का जूस देने लगते हैं। लेकिन कीमोथेरेपी करा चुके कैंसर मरीजों के मामले में यह सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है। डॉ. अत्रेय बताते हैं कि कच्चे फलों, बिना उबली सब्जियों के सलाद, कच्चे शहद या खुले में रखे कटे हुए फलों की सतह पर कई तरह के प्राकृतिक बैक्टीरिया और सूक्ष्म जीव मौजूद होते हैं।
एक सामान्य व्यक्ति का शरीर इन बैक्टीरिया से आसानी से लड़ लेता है, लेकिन जीरो इम्यूनिटी वाले कैंसर मरीज के शरीर में प्रवेश करते ही ये बैक्टीरिया जानलेवा इंफेक्शन पैदा कर देते हैं। इसलिए, कीमो के दिनों में बिल्कुल फ्रेश दिखने वाले कच्चे फूड्स भी मरीज के लिए खतरनाक साबित हो जाते हैं।
कीमो के दौरान भूलकर भी मरीज को न दें ये चीजें:
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बासी भोजन: कई घंटों पहले पका हुआ भोजन बिल्कुल न दें।
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कटे हुए फल व सलाद: बाजार के या घर में काफी देर पहले काटकर रखे गए फल और कच्ची सब्जियों का सलाद।
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सड़क किनारे का खाना: किसी भी तरह का स्ट्रीट फूड या रेस्टोरेंट का बाहर का खाना।
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अनपाश्चराइज्ड डेयरी: कच्चा दूध या बिना पाश्चराइज किया हुआ पनीर।
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कच्चा शहद और गुड़: क्योंकि ये पूरी तरह अनप्रोसेस्ड होते हैं और इनमें बैक्टीरिया होने की संभावना सबसे ज्यादा होती है।
डॉ. अत्रेय का ‘थ्री-जोन’ डाइट फॉर्मूला: जानिए मरीज को क्या और कैसे खिलाएं
मरीज के शरीर में एनर्जी बनाए रखने और उसे इंफेक्शन से सुरक्षित रखने के लिए डॉक्टर ने मरीज की भोजन की थाली (Plate) को तीन मुख्य ज़ोन में बांटने की सलाह दी है:
1. ग्रीन ज़ोन (Green Zone) – 50% हिस्सा
मरीज की थाली का आधा हिस्सा पूरी तरह से अच्छी तरह पकी हुई हरी और मौसमी सब्जियों (जैसे लौकी, तोरई, कद्दू, भिंडी) से भरा होना चाहिए। सब्जियों में प्रचुर मात्रा में फाइबर, मल्टी-विटामिंस और एंटीऑक्सीडेंट्स होते हैं, जो आसानी से पच जाते हैं और शरीर को अंदर से मजबूत बनाते हैं। नियम बस इतना है कि सब्जी पूरी तरह घर में बनी हो, ताजा हो और अच्छी तरह पकी हुई हो।
2. येलो ज़ोन (Yellow Zone) – 25% हिस्सा
यह ज़ोन मरीज के लिए ‘स्ट्रेंथ बिल्डर’ यानी ताकत बढ़ाने का काम करता है, जिसमें प्रोटीन रिच फूड्स आते हैं। थाली के एक चौथाई हिस्से में अरहर, मूंग या मसूर की अच्छे से पकी हुई दाल, घर का बना बिल्कुल फ्रेश पनीर, अच्छी तरह उबला हुआ अंडा या पूरी तरह पका हुआ चिकन शामिल कर सकते हैं। ध्यान रहे, इस दौरान मरीज को कृत्रिम प्रोटीन शेक, बाजार का खुला दूध या पानी में भीगे हुए बादाम और काजू देने से बचना चाहिए, क्योंकि इनमें इंफेक्शन का रिस्क अधिक होता है।
3. रेड ज़ोन (Red Zone) – 25% हिस्सा
यह ज़ोन मरीज के शरीर के लिए ‘फ्यूल’ (ईंधन) यानी तुरंत एनर्जी देने का काम करता है। थाली के बाकी बचे 25% हिस्से में आसानी से पचने वाले कार्बोहाइड्रेट जैसे सादा तवा रोटी, उबले हुए चावल या पतली खिचड़ी होनी चाहिए। अक्सर लोग मानते हैं कि रोटी-चावल से शुगर बढ़ती है, लेकिन कीमो के बाद शरीर को रिकवरी के लिए कार्बोहाइड्रेट की सख्त जरूरत होती है जो सिर्फ इसी से मिल सकती है। बस ध्यान रखें कि मरीज को ज्यादा तेल-मसाले वाले पराठे, पूरी या बाहर की भारी बिरयानी खाने को न दें।
कीमोथेरेपी के दौरान मरीज को हमेशा पूरी तरह उबला हुआ और छना हुआ साफ पानी ही पीने को दें। यदि आप डॉक्टर के बताए इस सिंपल, पूरी तरह से पके हुए और स्वच्छ घरेलू भोजन के नियमों का पालन करेंगे, तो कैंसर मरीज के शरीर में पर्याप्त एनर्जी बनी रहेगी, वजन नहीं घटेगा और बिना किसी रुकावट के कीमो की सभी साइकिल समय पर सुरक्षित रूप से पूरी हो सकेंगी।
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