नई दिल्ली ब्यूरो: आज के दौर में अगर किसी विदेशी या हॉलीवुड फिल्म में भारतीय संस्कृति या सनातन धर्म का जरा सा भी गलत चित्रण हो जाए, तो सोशल मीडिया पर बॉयकॉट ट्रेंड और भारी बवाल तय है। लेकिन सिनेमा के इतिहास में एक ऐसी ब्लॉकबस्टर हॉलीवुड फिल्म भी दर्ज है, जिसमें न सिर्फ हिंदू आस्था के केंद्र मां काली को बेहद डरावने और नकारात्मक रूप में दिखाया गया, बल्कि भारतीयों को ‘वहशी और जंगली’ कीड़ों-मकोड़ों को खाने वाले के तौर पर पेश किया गया। हैरान करने वाली बात यह है कि इस फिल्म में दिग्गज भारतीय अभिनेता अमरीश पुरी ने भी मुख्य खलनायक की भूमिका निभाई थी। आज हम बात कर रहे हैं साल 1984 में आई स्टीवन स्पीलबर्ग की क्लासिक फिल्म ‘इंडियाना जोन्स एंड द टेम्पल ऑफ डूम’ (Indiana Jones and the Temple of Doom) की।
जयपुर में होनी थी शूटिंग, स्क्रिप्ट देखते ही भारत सरकार ने खड़े किए हाथ
‘जुरासिक पार्क’, ‘शिंडलर्स लिस्ट’ और ‘जॉज़’ जैसी मास्टरपीस फिल्में बनाने वाले दुनिया के सबसे मशहूर निर्देशक स्टीवन स्पीलबर्ग इस फिल्म के जरिए भारत की एक रहस्यमयी और काले जादू वाली छवि दुनिया के सामने रखना चाहते थे। साल 1983-84 के दौरान वह फिल्म की शूटिंग के लिए अपनी टीम के साथ भारत आए थे। उन्होंने राजस्थान के जयपुर में स्थित आमेर फोर्ट और सिटी पैलेस का दौरा कर रेकी (Recci) भी पूरी कर ली थी। लेकिन जैसे ही फिल्म की स्क्रिप्ट भारत सरकार के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सामने आई, तो उसमें मौजूद बेहद आपत्तिजनक सामग्री को देखकर सरकार ने स्पीलबर्ग को भारत में शूटिंग करने की अनुमति देने से साफ इनकार कर दिया।
बंदर का दिमाग और इंसानी आंखें खाने वाले दिखाए गए भारतीय!
फिल्म की कहानी में भारतीयों और यहां के खान-पान का बेहद घिनौना और नस्लभेदी (Racist) चित्रण किया गया था। फिल्म के एक शाही भोज (Royal Feast) वाले सीन में मेहमानों को जिंदा सांप, रेंगते हुए कीड़े-मकोड़े, सूप में तैरती इंसानी आंखें और सबसे हैरान करने वाला— ‘ठंडा किया हुआ बंदर का दिमाग’ (Chilled Monkey Brains) खाते हुए दिखाया गया था। इसके अलावा, फिल्म का मुख्य विलेन ‘मोला राम’ (Amrish Puri) मां काली के मंदिर में इंसानों की बलि देता है और उनका दिल जिंदा सीने से बाहर निकाल लेता है। मेकर्स ने देवी काली को एक राक्षसी और खूंखार रूप में पेश किया था, जिसे देखकर कोई भी सनातनी भड़क जाए।
भारत सरकार का सुझाव ठुकराकर श्रीलंका भागे जिद्दी स्पीलबर्ग
भारत सरकार ने स्टीवन स्पीलबर्ग को स्क्रिप्ट में बदलाव करने और इस नस्लभेदी नैरेटिव को हटाने का सुझाव दिया था। लेकिन हॉलीवुड के यह निर्देशक अपनी जिद पर अड़े रहे। भारत से अनुमति न मिलने के बाद वह अपनी पूरी टीम लेकर पड़ोसी देश श्रीलंका चले गए। फिल्म के पहाड़ी और जंगली दृश्यों को श्रीलंका में फिल्माया गया, जबकि महल के अंदरूनी हिस्सों की शूटिंग के लिए उन्होंने ब्रिटेन (UK) के स्टूडियो का रुख किया। सरकार पहले ही भांप चुकी थी कि यह फिल्म वैश्विक स्तर पर भारतीयों की छवि को बुरी तरह धूमिल करेगी, इसलिए फिल्म के रिलीज होने के बाद भारत में इसके प्रदर्शन पर पूरी तरह प्रतिबंध (Ban) लगा दिया गया था।
बैन के बावजूद ग्लोबली ब्लॉकबस्टर रही फिल्म, IMDb पर है धांसू रेटिंग
कड़े विरोध और भारत में बैन होने के बावजूद यह फिल्म अंतरराष्ट्रीय बॉक्स ऑफिस पर बहुत बड़ी हिट साबित हुई। इस एडवेंचर-थ्रिलर फिल्म को आज भी हॉलीवुड के इतिहास की सबसे बेहतरीन फिल्मों में गिना जाता है और लोकप्रिय सिनेमा वेबसाइट IMDb पर इसकी रेटिंग 7.5/10 है। फिल्म में अमरीश पुरी के खूंखार ‘मोला राम’ वाले लुक को देखकर ही उन्हें बाद में बॉलीवुड की फिल्मों में ‘मोगैंबो’ जैसे यादगार विलेन्स के रोल मिलने शुरू हुए थे। हालांकि, समय-समय पर इस फिल्म में दिखाए गए नस्लीय पूर्वाग्रहों और भारतीय संस्कृति के अपमान को लेकर हॉलीवुड में भी आलोचना होती रही है।
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