रूस-यूरेन युद्ध के बीच एक ऐसी गुप्त जंग चल रही है, जिसने मॉस्को की नींद उड़ा दी है। रूस के अभेद्य माने जाने वाले सैन्य अड्डों और तेल रिफाइनरियों पर लगातार हो रहे सटीक और घातक हमलों के पीछे यूक्रेन की एक बेहद खतरनाक और सीक्रेट ड्रोन यूनिट है। इस यूनिट के जांबाज पूरी तरह ‘अदृश्य’ होकर जी रहे हैं। न उनका कोई असली नाम जानता है, न चेहरा और न ही कोई फोन नंबर। वे अंधेरे के साए में रहकर राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साम्राज्य को भीतर से खोखला कर रहे हैं।
सख्त गोपनीयता के नियम: माता-पिता तक को नहीं भनक
इस सीक्रेट ड्रोन यूनिट के नियम इतने सख्त हैं कि आम इंसान इसकी कल्पना भी नहीं कर सकता। ‘सेंटर नंबर 1’ नाम की इस यूनिट में तैनात पूर्व नौसैनिक डेनिस (बदला हुआ नाम) बताते हैं कि उनके खुद के माता-पिता और दोस्तों को नहीं पता कि वह क्या करते हैं। इस यूनिट का पहला नियम है—”खुद पर ध्यान मत खींचो, कभी डींग मत मारो।” यहाँ तक कि युद्ध खत्म होने के बाद भी ये सैनिक कभी किसी से अपने अभियानों का जिक्र नहीं कर पाएंगे।
इसी यूनिट ने जून में मॉस्को की एक बड़ी तेल रिफाइनरी को निशाना बनाया था, जिससे रूसी राजधानी का आसमान काले धुएं से ढक गया था। इसके अलावा, सेंट पीटर्सबर्ग में जब एक बड़ा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन चल रहा था, तब भी इसी यूनिट के ड्रोन्स ने वहां तबाही मचाई थी।
‘फ्लाइट मोड’ में जिंदगी: कैश में खरीदारी और बदले जाते हैं ATM
इस यूनिट के सदस्यों की सुरक्षा के लिए उनकी तस्वीरें या वीडियो लेना पूरी तरह प्रतिबंधित है। वोरोन (उपनाम) नाम के एक सैनिक, जो पहले चित्रकार और मार्शल आर्ट ट्रेनर थे, बताते हैं कि उनके परिवार पर हमेशा खतरा मंडराता रहता है। उनकी पत्नी को शक जरूर है, लेकिन वह सवाल नहीं पूछतीं।
सैन्य खुफिया अधिकारी के मुताबिक, ये सैनिक आम जनजीवन में बिल्कुल सामान्य टी-शर्ट और जींस में घूमते हैं। सार्वजनिक जगहों पर ‘टेकऑफ’ या ‘विंग’ जैसे शब्दों को बोलने पर भी पाबंदी है। पकड़े जाने के डर से ये सैनिक केवल नकद (Cash) में लेनदेन करते हैं और हर बार अपना एटीएम (ATM) बदल-बदलकर इस्तेमाल करते हैं।
स्मार्टफोन पर पाबंदी और लाई डिटेक्टर टेस्ट
तकनीकी रूप से रूस को छकाने के लिए इस यूनिट के फोन हमेशा ‘फ्लाइट मोड’ पर रहते हैं। इन्हें केवल बेहद सुरक्षित पोर्टेबल राउटर्स और विशेष रूप से एन्क्रिप्टेड डिवाइसेज से कनेक्ट किया जाता है। किसी भी ऐसे गैजेट को रखने की अनुमति नहीं है जिसमें जियोलोकेशन (GPS) ऑन हो। यूनिट में शामिल होने वाले हर नए सदस्य को कड़े लाई डिटेक्टर (झूठ पकड़ने वाली मशीन) टेस्ट से गुजरना पड़ता है।
यूक्रेन का कहना है कि रूस के ईंधन डिपो पर ये हमले, यूक्रेनी शहरों पर होने वाली रूसी बमबारी का करारा जवाब हैं। डेनिस का कहना है कि अब उनके पास ड्रोन्स की कमी नहीं है, बल्कि दिन में घंटों की कमी है। वे उस दिन का इंतजार कर रहे हैं जब उनका ड्रोन सीधे क्रेमलिन (रूसी राष्ट्रपति भवन) से टकराएगा।
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