लंदन/पेरिस ब्यूरो: इस समय पूरा यूरोपीय महाद्वीप (Europe) रिकॉर्डतोड़ और अभूतपूर्व भीषण गर्मी की चपेट में है। कई देशों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है, जिसने आम जनजीवन और वहां के बुनियादी ढांचे (Infrastructure) को पूरी तरह झकझोर कर रख दिया है। गर्मी का आलम यह है कि सड़कें पिघल रही हैं, ट्राम की पटरियां मुड़ रही हैं, बिजली संकट गहरा गया है और अस्पतालों में हीटस्ट्रोक के मरीजों की कतारें लगी हैं।
लेकिन इन सबके बीच दुनिया भर के पर्यटक और विशेषज्ञ एक बात देखकर हैरान हैं कि इतने विकसित और आधुनिक महाद्वीप के अधिकांश घरों, स्कूलों और दफ्तरों में आज भी एयर कंडीशनिंग (AC) की सुविधा नहीं है। आइए जानते हैं कि आखिर यूरोप के लोग एसी से इतनी दूरी क्यों बनाकर रखते हैं:
1. ऐतिहासिक इमारतों का संरक्षण और ‘अमेरिकी मॉडल’ से परहेज
यूरोपीय शहरों के योजनाकार और प्रशासन अपनी ऐतिहासिक धरोहरों की खूबसूरती को लेकर बेहद संवेदनशील हैं। पेरिस जैसे शहरों में हॉसमैन-युग (Haussmann-era) की प्रसिद्ध ऐतिहासिक चूना पत्थर वाली इमारतों के बाहरी हिस्से (Facades) पर एसी की बाहरी यूनिट (Outdoors) लगाने की सख्त मनाही है।
पेरिस की उप महापौर ऑड्रे पुलवर के अनुसार, यूरोप का लक्ष्य अमेरिकी, ब्राजीलियाई या इतालवी शहरों की तरह बनना नहीं है, जहां इमारतों की दीवारें बदसूरत कन्वेक्टर यूनिट्स से भरी रहती हैं, जो भारी शोर, गर्मी और स्थानीय प्रदूषण फैलाती हैं।
2. पड़ोसियों की अनुमति और कड़े कानून (Noise Regulations)
यूरोप के कई देशों में अपने घर में एसी लगाना केवल आपका व्यक्तिगत फैसला नहीं हो सकता। यदि आप किसी अपार्टमेंट या सोसाइटी में रहते हैं, तो आपको स्थानीय प्रशासन और पड़ोसियों से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) लेना पड़ता है।
फ्रांस जैसे देशों में कानून भवन निर्माण संघों को यह अधिकार देता है कि यदि किसी एसी यूनिट का शोर निर्धारित बेहद कम सीमा (लगभग हल्की हवा जितनी) से अधिक है, तो वे कानूनी मुकदमा कर सकते हैं। शोर संबंधी मामलों के विशेषज्ञों के मुताबिक, अदालतों में इस समय एयर कंडीशनिंग के शोर से जुड़े सैकड़ों मुकदमे लंबित हैं, क्योंकि यह ध्वनि कंक्रीट को भेदकर लोगों को परेशान करती है।
3. जलवायु परिवर्तन और पर्यावरण संबंधी चिंताएं
यूरोपीय देश लंबे समय से एयर कंडीशनरों को पर्यावरण का दुश्मन और अत्यधिक बिजली खपत करने वाली मशीन मानते रहे हैं, जो उनके कार्बन न्यूट्रल (Carbon Neutral) बनने के लक्ष्यों को कमजोर कर सकती हैं। फ्रांस की जलवायु मंत्री मोनिका बारबट ने हर जगह एसी लगाने की मांग का पुरजोर विरोध करते हुए कहा, “क्या एसी लगा देने से जंगलों की आग रुक जाएगी या फसलें बच जाएंगी?”
इसके बजाय यूरोपीय सरकारें प्राकृतिक वेंटिलेशन, मकानों में बेहतर इन्सुलेशन (Insulation), खिड़कियों पर शटर, सड़कों पर पेड़ों की संख्या बढ़ाने और शहरी हरियाली जैसे पारंपरिक व प्राकृतिक विकल्पों को बढ़ावा दे रही हैं।
4. बुनियादी ढांचा केवल ‘ठंड’ के अनुकूल बना है
ऐतिहासिक रूप से यूरोप महाद्वीप की जलवायु हमेशा ठंडी रही है, इसलिए वहां के अधिकांश घर और बुनियादी ढांचे गर्मी को रोकने के लिए नहीं, बल्कि सर्दियों में घर के भीतर गर्मी को फंसाकर रखने (Heat Retention) के लिए बनाए गए थे। आंकड़ों की बात करें तो:
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ब्रिटेन (UK): केवल 5 प्रतिशत घरों में एसी है।
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फ्रांस (France): महज 25 प्रतिशत घरों में एयर कंडीशनिंग है।
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इटली (Italy): यहां यह आंकड़ा कुछ बेहतर 56 प्रतिशत है।
जब तापमान 40 डिग्री पार जाता है, तो ये घर ‘भट्टी’ की तरह तपने लगते हैं, जिसके कारण इस बार हजारों स्कूल बंद करने पड़े और दफ्तरों को कामकाज घटाना पड़ा।
अब राजनीतिक मुद्दा बन गया है ‘AC’
जैसे-जैसे गर्मी जानलेवा होती जा रही है, एयर कंडीशनिंग अब यूरोप में एक बड़ा राजनीतिक बहस का केंद्र बन गई है। फ्रांस की धुर दक्षिणपंथी नेता मरीन ले पेन ने सरकार पर दबाव बनाते हुए पूरे देश में एक व्यापक ‘एयर कंडीशनिंग योजना’ लागू करने की मांग की है।
बदलते हालातों के बीच अब यूरोप में बदलाव के संकेत भी दिख रहे हैं। इंग्लैंड में पोर्टेबल एसी (Portable AC) की बिक्री में रिकॉर्ड उछाल आया है और लंदन के मेयर सादिक खान ने भी अब स्कूलों, अस्पतालों और कार्यालयों में कूलिंग सिस्टम लगाने की वकालत शुरू कर दी है।
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