लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली: हम बचपन से सुनते आए हैं कि तरोताजा रहने के लिए ‘8 घंटे की नींद’ अनिवार्य है। लेकिन क्या आपने कभी गौर किया है कि अलार्म लगाकर 8 घंटे पूरे करने के बाद भी सुबह शरीर भारी लगता है? वहीं, कुछ लोग महज 6 घंटे सोकर भी दिनभर सुपर एक्टिव रहते हैं। आखिर नींद का असली साइंस क्या है? क्या वाकई हर किसी को 8 घंटे ही सोना चाहिए या यह सिर्फ एक औसत आंकड़ा है?
मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल (नोएडा) के रेस्पिरेटरी और क्रिटिकल केयर विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. ज्ञानेंद्र अग्रवाल बताते हैं कि नींद को लेकर यह पुरानी धारणा पूरी तरह सही नहीं है। नींद की जरूरत हर व्यक्ति के शरीर, उसकी जीवनशैली और सबसे महत्वपूर्ण उसकी उम्र पर निर्भर करती है।
उम्र के हिसाब से बदलता है नींद का कोटा
‘नेशनल स्लीप फाउंडेशन’ की गाइडलाइंस के मुताबिक, नींद का कोई ‘वन साइज फिट्स ऑल’ फार्मूला नहीं है। उम्र के विभिन्न पड़ावों पर हमारे शरीर को अलग-अलग समय के विश्राम की आवश्यकता होती है:
-
नवजात शिशु (0-3 महीने): 14 से 17 घंटे की गहरी नींद।
-
स्कूली बच्चे (6-13 साल): शारीरिक विकास के लिए 9 से 11 घंटे।
-
किशोर (14-17 साल): 8 से 10 घंटे की नींद जरूरी।
-
वयस्क (18-64 साल): 7 से 9 घंटे का समय आदर्श।
-
बुजुर्ग (65+ साल): 7 से 8 घंटे की पर्याप्त नींद।
डॉक्टर के अनुसार, वयस्कों के लिए 7 से 9 घंटे के बीच का कोई भी समय सही हो सकता है। यदि आप सुबह बिना अलार्म के उठ रहे हैं और दिनभर ऊर्जावान महसूस करते हैं, तो समझ लीजिए आपकी नींद पूरी हो गई है।
क्वांटिटी नहीं, क्वालिटी पर दें ध्यान
सिर्फ बिस्तर पर 8 घंटे लेटे रहने का मतलब ‘पूरी नींद’ नहीं है। अगर आपकी रात करवटें बदलते बीतती है या बार-बार नींद टूटती है, तो वह नींद बेमानी है। सेहत के लिए ‘डीप स्लीप’ (गहरी नींद) का मिलना अनिवार्य है। इसी फेज में हमारा दिमाग टॉक्सिन्स को साफ करता है, शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत होती है और इम्युनिटी बूस्ट होती है। गुणवत्तापूर्ण 6 घंटे की नींद, बेचैनी भरी 9 घंटे की नींद से कहीं बेहतर है।
कम या ज्यादा सोना, दोनों ही बीमारियों को न्योता
नींद का संतुलन बिगड़ना शरीर के लिए खतरे की घंटी है। डॉक्टर अग्रवाल चेतावनी देते हैं कि जो लोग लगातार 6 घंटे से कम सोते हैं, उनमें मोटापा, टाइप-2 डायबिटीज, हृदय रोग और डिप्रेशन का जोखिम कई गुना बढ़ जाता है। इसके विपरीत, रोजाना 10-11 घंटे से ज्यादा सोना भी सेहत के लिए हानिकारक है। यह सुस्ती, पुराने सिरदर्द और शरीर में इन्फ्लेमेशन बढ़ा सकता है।
सुकून भरी नींद पाने के 5 गोल्डन रूल्स
अगर आप भी नींद पूरी न होने की समस्या से जूझ रहे हैं, तो एक्सपर्ट्स के ये टिप्स आपकी मदद कर सकते हैं:
-
स्लीप शेड्यूल: सोने और जागने का एक ही समय तय करें, चाहे वीकेंड ही क्यों न हो।
-
डिजिटल डिटॉक्स: सोने से 1 घंटा पहले मोबाइल, लैपटॉप और टीवी बंद कर दें। गैजेट्स से निकलने वाली ब्लू लाइट ‘मेलाटोनिन’ हार्मोन को बाधित करती है।
-
कैफीन से तौबा: शाम 6 बजे के बाद चाय या कॉफी का सेवन न करें।
-
हल्का डिनर: रात का खाना हल्का रखें और सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले खा लें।
-
माहौल: बेडरूम में अंधेरा और शांति रखें ताकि दिमाग को रिलेक्स होने का संकेत मिले।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया