
पहाड़ी राष्ट्र नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़, भूस्खलन और नदियों के विकराल उफान के बाद देश का सबसे बड़ा आर्थिक स्तंभ यानी पर्यटन उद्योग पूरी तरह चरमरा गया है। हिमालय की हसीन वादियों, शांत झीलों और साहसिक ट्रैकिंग के लिए दुनिया भर में मशहूर नेपाल में इस समय सन्नाटा पसरा हुआ है। राजधानी काठमांडू के मुख्य पर्यटन केंद्र ‘ठमेल’ (Thamel) से लेकर प्राकृतिक सुंदरता से लबरेज पोखरा के लेकसाइड तक की सड़कों पर केवल खामोशी नजर आ रही है। जिन होटलों, लॉज और होमस्टे में इस सीजन में विदेशी और भारतीय पर्यटकों की भारी भीड़ रहती थी, वहां अब कमरों की बुकिंग्स धड़ाधड़ रद्द हो रही हैं और मौजूद सैलानी अपनी यात्रा अधूरी छोड़कर सुरक्षित वतन वापसी की राह पकड़ रहे हैं।
नेपाल के प्रमुख पर्यटन स्थलों जैसे काठमांडू, पोखरा, चितवन, नगरकोट और लुंबिनी में होटल ऑक्युपेंसी 80 से 90 प्रतिशत तक गिर चुकी है। नदियों के किनारे स्थित दर्जनों लक्जरी रिजॉर्ट और कैंपिंग साइट्स बाढ़ के पानी और मलबे की चपेट में आने से क्षतिग्रस्त हो गए हैं। सड़कों के टूटने, प्रमुख पुलों के बहने और लगातार हो रहे भूस्खलन के डर से विदेशी पर्यटकों ने अपनी आगामी यात्राएं अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी हैं। नेपाल टूरिज्म बोर्ड के अधिकारियों का मानना है कि इस अप्रत्याशित आपदा ने आने वाले पूरे पर्यटन सीजन को भारी संकट में डाल दिया है।
सुरक्षित वतन वापसी की होड़: सोनौली और रक्सौल बॉर्डर से लौट रहे हजारों भारतीय सैलानी
नेपाल के पर्यटन में सबसे बड़ी हिस्सेदारी भारतीय सैलानियों की होती है। उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित देश के विभिन्न राज्यों से हर साल लाखों भारतीय नागरिक नेपाल घूमने आते हैं। आपदा के बाद नेपाल में फंसे हजारों भारतीय सैलानियों में सुरक्षित स्वदेश लौटने की होड़ मच गई है। भारत-नेपाल के प्रमुख सीमावर्ती प्रवेश द्वारों—विशेषकर उत्तर प्रदेश के महराजगंज जिले में स्थित सोनौली बॉर्डर और बिहार के पूर्वी चंपारण स्थित रक्सौल बॉर्डर पर वतन वापसी करने वाले भारतीय पर्यटकों का तांता लगा हुआ है।
भारतीय सीमा सुरक्षा बल (SSB), स्थानीय पुलिस और जिला प्रशासन ने सीमा पर विशेष सहायता केंद्र (हेल्प डेस्क) स्थापित किए हैं। बाढ़ प्रभावित इलाकों से निजी टैक्सियों, आपातकालीन बसों और पैदल चलकर बॉर्डर तक पहुंच रहे पर्यटकों का स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और उन्हें उनके गृह जनपदों तक पहुंचाने के लिए परिवहन की व्यवस्था की जा रही है। सीमा पर पहुंचे कई भारतीय परिवारों ने बताया कि वे पोखरा और काठमांडू में छुट्टियां मनाने गए थे, लेकिन लगातार मूसलाधार बारिश, भूस्खलन की भयावह आवाजें और बिजली-इंटरनेट ठप होने से वे दहशत में आ गए और किसी तरह जान बचाकर सीमा तक पहुंचे हैं।
होटल बुकिंग रद्द और एडवेंचर स्पोर्ट्स बंद: ट्रैकिंग सर्किट पर सन्नाटा
नेपाल अपनी साहसिक गतिविधियों जैसे रिवर राफ्टिंग, बंजी जंपिंग, पैराग्लाइडिंग और हिमालयन ट्रैकिंग के लिए पूरी दुनिया के युवाओं की पहली पसंद माना जाता है। लेकिन त्रिशूली और भोटेकोशी जैसी उफनती नदियों के रौद्र रूप को देखते हुए प्रशासन ने सभी प्रकार की वॉटर स्पोर्ट्स और राफ्टिंग गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। अन्नपूर्णा सर्किट और एवरेस्ट बेस कैंप के कई ट्रैकिंग रूट्स पर भूस्खलन और रास्तों के कटने की वजह से गाइड और पोर्टर्स ने अभियान रोक दिए हैं।
चितवन नेशनल पार्क, जो अपने एक सींग वाले गैंडों और जंगल सफारी के लिए प्रसिद्ध है, वहां राप्ती और नारायणी नदी का पानी प्रवेश कर जाने के कारण जंगल सफारी और बोटिंग पूरी तरह बंद कर दी गई है। ट्रेवल एजेंसियों के अनुसार, आगामी शरदकालीन पर्यटन सीजन के लिए यूरोप, अमेरिका और भारत से जो एडवांस बुकिंग्स आई थीं, उनमें से 70 प्रतिशत से अधिक रद्द हो चुकी हैं। होटल व्यवसायियों, टूर ऑपरेटरों और ट्रैकिंग एजेंसियों को प्रतिदिन करोड़ों रुपये का प्रत्यक्ष वित्तीय नुकसान उठाना पड़ रहा है।
प्रमुख राजमार्ग अवरुद्ध: पोखरा-काठमांडू रूट पर फंसी गाड़ियां और एयरलाइंस का बढ़ा दबाव
नेपाल की लाइफलाइन कहे जाने वाले प्रमुख राजमार्गों पर आई आपदा ने आंतरिक यातायात व्यवस्था को पंगु बना दिया है। काठमांडू को भारत की सीमा और पोखरा से जोड़ने वाला पृथ्वी राजमार्ग (Prithvi Highway) और त्रिभुवन राजपथ कई स्थानों पर भारी भूस्खलन और मलबे के कारण अवरुद्ध हो गए हैं। सड़कों पर दोनों तरफ पर्यटकों की गाड़ियां, बसें और आवश्यक वस्तुओं के ट्रक कई दिनों तक फंसे रहे, जिन्हें नेपाली सेना और सशस्त्र पुलिस बल के जवान भारी मशीनरी लगाकर खोलने के प्रयास में जुटे हैं।
सड़क मार्ग के बाधित होने के कारण काठमांडू के त्रिभुवन अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और पोखरा घरेलू हवाई अड्डे पर उड़ानों की मांग अप्रत्याशित रूप से बढ़ गई है। भारतीय पर्यटक किसी भी कीमत पर हवाई टिकट खरीदकर जल्द से जल्द दिल्ली, कोलकाता और वाराणसी पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं। भारी मांग के चलते एयरलाइंस की टिकटों के दाम आसमान छू रहे हैं, जिससे मध्यमवर्गीय पर्यटकों की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। हालांकि, भारतीय दूतावास और नेपाल सरकार ने समन्वय स्थापित कर उड़ानों को नियमित रखने और फंसे यात्रियों को निकालने के लिए विशेष दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नेपाल की आर्थिकी की रीढ़ ‘पर्यटन’ पर गहरा आघात: उबरने में लगेंगे कई महीने
नेपाल की राष्ट्रीय आय और विदेशी मुद्रा भंडार में पर्यटन क्षेत्र का योगदान अत्यधिक महत्वपूर्ण है। देश के लाखों नागरिकों की आजीविका—जिनमें होटल कर्मचारी, गाइड, टैक्सी ड्राइवर, हस्तशिल्प विक्रेता, शेरपा और स्थानीय खानपान के छोटे दुकानदार शामिल हैं—पूरी तरह पर्यटकों पर निर्भर करती है। इस प्राकृतिक आपदा ने केवल भौतिक बुनियादी ढांचे को ही नहीं तोड़ा, बल्कि पर्यटन पर निर्भर हजारों स्थानीय परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गंभीर संकट खड़ा कर दिया है।
अर्थशास्त्रियों और उद्योग विश्लेषकों का आकलन है कि सड़कों के पुनर्निर्माण, पुलों की मरम्मत और दुनिया भर के पर्यटकों के बीच सुरक्षा का भरोसा दोबारा कायम करने में नेपाल को कम से कम 6 से 8 महीने का समय लग सकता है। नेपाल के टूर एंड ट्रैवल एसोसिएशन (NATTA) ने सरकार से पर्यटन क्षेत्र के लिए विशेष आर्थिक राहत पैकेज, टैक्स में छूट और ऋण पुनर्गठन की मांग की है ताकि संकटग्रस्त व्यवसायों को दिवालिया होने से बचाया जा सके। जब तक बुनियादी ढांचा पूरी तरह दुरुस्त नहीं हो जाता, तब तक हिमालय की वादियों में पर्यटन की पुरानी रौनक लौट पाना बेहद चुनौतीपूर्ण दिखाई दे रहा है।
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