
पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में पिछले करीब एक महीने से बनी नाजुक शांति और खामोशी अचानक एक बार फिर बारूद के भीषण धमाकों में तब्दील हो गई है। अमेरिका और ईरान के बीच प्रत्यक्ष सैन्य टकराव का नया और बेहद आक्रामक अध्याय शुरू हो चुका है। अमेरिकी सेना के सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने रविवार देर रात दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री व्यापारिक मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के उत्तरी मुहाने पर स्थित रणनीतिक ईरानी द्वीप ‘लारक’ (Larak Island) पर सटीक और भीषण एयरस्ट्राइक की। इस अप्रत्याशित हमले ने दोनों देशों के बीच 29 जुलाई के बाद से चले आ रहे युद्धविराम और सैन्य ठहराव को पूरी तरह तोड़ दिया है।
अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) और यूएस सेंट्रल कमांड के अनुसार, यह सैन्य कार्रवाई फारस की खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अंतरराष्ट्रीय जहाजरानी को सुरक्षित रखने के लिए की गई है। अमेरिकी अधिकारियों ने दावा किया कि उनकी खुफिया एजेंसियों ने ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के जवानों को लारक द्वीप पर भारी रॉकेट लॉन्चर तैनात करते और समुद्री बारूदी सुरंगे (Naval Sea Mines) दागने की तैयारी करते हुए रंगे हाथों ट्रैक किया था। वाशिंगटन ने इसे अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग के लिए ‘तात्कालिक और गंभीर खतरा’ (Imminent Threat) मानते हुए दो सक्रिय रॉकेट लॉन्चिंग पैड्स को बमबारी कर नष्ट कर दिया। इस हमले में ईरानी नौसेना के एक अधिकारी समेत कई सैनिकों और नागरिकों के हताहत होने की पुष्टि ईरानी मीडिया ने की है।
ईरान का जोरदार पलटवार: जॉर्डन में अमेरिकी एयरबेस पर दागीं बैलिस्टिक मिसाइलें
अमेरिकी हमले के चंद घंटों के भीतर ही तेहरान ने अत्यंत आक्रामक रुख अपनाते हुए व्यापक जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी। ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने आधिकारिक बयान जारी कर ऐलान किया कि वह अपनी संप्रभुता पर हुए इस हमले का बदला लिए बिना चुप नहीं बैठेगी। इसके तुरंत बाद ईरान ने जॉर्डन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को निशाना बनाते हुए लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों और कामिकेज ड्रोनों की जोरदार बौछार कर दी।
ईरान की सरकारी मीडिया IRIB और प्रेस टीवी के दावों के अनुसार, आईआरजीसी ने जॉर्डन स्थित अमेरिकी संचालित ‘किंग हुसैन एयरबेस’ और ‘अल-अजरक एयरबेस’ के तकनीकी ढांचे, मेंटेनेंस सुविधाओं और लड़ाकू विमानों की हैंगर पोजीशन्स को भारी नुकसान पहुंचाया है। हालांकि, जॉर्डन की सेना ने दावा किया है कि उसके एकीकृत एयर डिफेंस सिस्टम ने अपने हवाई क्षेत्र में प्रवेश करने वाली कम से कम 8 बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही मार गिराया। इसके अलावा, कतर और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के पास भी अमेरिकी सुरक्षा बलों द्वारा मिसाइल और ड्रोन रोके जाने की खबरें सामने आई हैं, जिससे साफ हो गया है कि ईरान अब पूरे खाड़ी क्षेत्र में अमेरिकी ठिकानों को युद्ध के दायरे में ला चुका है।
होर्मुज जलडमरूमध्य और खार्ग द्वीप पर गहराया संकट: क्यों लारक द्वीप बना जंग का केंद्र?
लारक द्वीप (Larak Island) फारस की खाड़ी में ईरान के दक्षिणी तट पर स्थित है और यह सीधे तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे संकरे हिस्से पर नजर रखता है। यह वही समुद्री गलियारा है जिससे होकर दुनिया के कुल समुद्री कच्चे तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) का लगभग पांचवां हिस्सा (20%) वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। पिछले छह महीनों से चल रहे संघर्ष के दौरान इस जलमार्ग में वाणिज्यिक जहाजों की आवाजाही पहले ही घटकर सामान्य के मुकाबले काफी कम रह गई है।
لارک द्वीप पर हमले के साथ ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर दावा किया कि ईरान का सबसे बड़ा ऊर्जा केंद्र ‘खार्ग द्वीप’ (Kharg Island) भी तबाह होने की कगार पर है। खार्ग द्वीप बुशहर प्रांत के पास स्थित है और युद्ध पूर्व ईरान के 90 प्रतिशत कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप के टर्मिनलों से संचालित होता था। ट्रंप प्रशासन का आरोप है कि ईरान समुद्री बारूदी सुरंगें बिछाकर अंतरराष्ट्रीय व्यापार को बंधक बना रहा है। वहीं, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग के प्रमुख इब्राहिम अजीजी और आईआरजीसी प्रवक्ता जनरल हुसैन मोहेबी ने अमेरिकी कार्रवाई को एक “घातक भूल” बताते हुए चेतावनी दी है कि जब तक अमेरिका अपने वादों को पूरा नहीं करता, तब तक होर्मुज से किसी भी देश का सुरक्षित निकलना मुमकिन नहीं होगा।
अंतरराष्ट्रीय कच्चे तेल बाजार में आया बड़ा भूचाल: वैश्विक अर्थव्यवस्था पर मंडराया संकट
अमेरिका और ईरान के बीच नए सिरे से भड़के इस युद्ध का सीधा और तत्काल प्रभाव अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा बाजार पर देखने को मिला है। लारक द्वीप पर हमले और जॉर्डन में जवाबी मिसाइल हमलों की खबर सार्वजनिक होते ही वैश्विक बाजारों में कच्चे तेल की कीमतों में 2 प्रतिशत से अधिक का भारी उछाल दर्ज किया गया। अंतरराष्ट्रीय बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) की कीमतें बढ़कर 90 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गईं, जबकि यूएस वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) क्रूड भी 85 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया।
समुद्री बीमा कंपनियों (Maritime Insurance Underwriters) ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कमर्शियल टैंकरों के लिए युद्ध-जोखिम प्रीमियम में भारी वृद्धि कर दी है। कई अंतरराष्ट्रीय शिपिंग कंपनियों ने अपने तेल टैंकरों के ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) ट्रांसपोंडर बंद कर दिए हैं या फिर अफ्रीका के ‘केप ऑफ गुड होप’ के लंबे और महंगे रास्ते से जहाजों को मोड़ना शुरू कर दिया है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह अवरुद्ध होता है, तो ऊर्जा संकट के कारण दुनिया भर में मुद्रास्फीति (महंगाई) की नई लहर आ सकती है, जिससे भारत, यूरोप और एशियाई देशों की अर्थव्यवस्थाओं पर सीधा नकारात्मक असर पड़ेगा।
ट्रंप प्रशासन पर राजनीतिक दबाव और पश्चिम एशिया में महायुद्ध का खतरा
अमेरिका में आगामी मध्यावधि (मिडटर्म) चुनावों के मुहाने पर खड़े राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के लिए यह सैन्य कदम घरेलू स्तर पर भी बड़ा विवाद खड़ा कर रहा है। अमेरिकी सीनेट की सशस्त्र सेवा समिति के डेमोक्रेटिक सदस्यों और सीनेटर जैक रीड ने प्रशासन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा है कि छह महीने से अधिक समय बीत जाने के बाद भी इस अंतहीन युद्ध का कोई स्पष्ट राजनीतिक या सैन्य लक्ष्य हासिल नहीं हुआ है, बल्कि इससे पूरे मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। अमेरिकी वित्त मंत्रालय द्वारा ईरान के खिलाफ घोषित ‘ऑपरेशन इकोनॉमिक आउटकास्ट’ के बावजूद तेहरान की सैन्य आक्रामकता कम नहीं हुई है।
सऊदी अरब, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और ओमान जैसे खाड़ी देश इस बात को लेकर बेहद चिंतित हैं कि यदि यह संघर्ष एक क्षेत्रीय ‘ऑल-आउट वॉर’ में तब्दील हुआ, तो उनकी तेल रिफाइनरियां, डिसेलिनेशन प्लांट और नागरिक बुनियादी ढांचा भी ईरानी मिसाइलों की सीधी जद में आ सकता है। उधर, जर्मनी सहित कई जी-20 देशों ने अमेरिका से इस सैन्य तनाव को तुरंत कूटनीतिक बातचीत के जरिए समाप्त करने की मांग की है। लारक द्वीप की यह स्ट्राइक और तेहरान का जवाबी मिसाइल प्रहार यह स्पष्ट संकेत दे रहा है कि पश्चिम एशिया का यह ज्वालामुखी अब किसी भी क्षण एक अनियंत्रित वैश्विक युद्ध का रूप ले सकता है।
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