
आधुनिक जीवनशैली, काम का अत्यधिक दबाव और स्क्रीन के लगातार इस्तेमाल ने लोगों की नींद की साइकिल (Sleep Cycle) को बुरी तरह प्रभावित किया है। स्थिति यह है कि लाखों लोग रात को बिस्तर पर जाने के बाद घंटों करवटें बदलते रहते हैं, लेकिन उन्हें सुकून भरी नींद नहीं आती। मेडिकल भाषा में इसे अनिद्रा (Insomnia) या स्लीपिंग डिसऑर्डर की श्रेणी में रखा जाता है। नींद पूरी न होने से न केवल अगले दिन की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, बल्कि चिड़चिड़ापन, सिरदर्द और इम्युनिटी कमजोर होने जैसी समस्याएं भी घेरने लगती हैं। यदि आप भी रातभर जागने की इस समस्या से परेशान हैं, तो अपनी दैनिक दिनचर्या में कुछ खास बदलाव करके इस परेशानी से निजात पा सकते हैं। आइए जानते हैं उन 5 प्रमुख आदतों के बारे में जिन्हें तुरंत बदलना जरूरी है।
1. सोने से ठीक पहले मोबाइल या स्क्रीन का इस्तेमाल (Screen Time)
आज के समय में नींद उड़ने की सबसे बड़ी वजह बिस्तर पर लेटकर फोन चलाना है। स्मार्टफोन, टैबलेट या लैपटॉप की स्क्रीन से निकलने वाली ‘ब्लू लाइट’ (Blue Light) हमारे मस्तिष्क को यह भ्रमित करती है कि अभी दिन का समय है। इससे नींद लाने वाले हॉर्मोन यानी ‘मेलाटोनिन’ (Melatonin) का उत्पादन रुक जाता है।
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सुझाव: सोने से कम से कम 45 मिनट से 1 घंटे पहले सभी प्रकार की स्क्रीन से दूरी बना लें। इसकी बजाय कोई किताब पढ़ सकते हैं या हल्का संगीत सुन सकते हैं।
2. शाम के बाद कैफीन या भारी भोजन का सेवन
अक्सर लोग थकान मिटाने के लिए शाम के समय चाय या कॉफी का सेवन करते हैं, या फिर रात में बहुत मसालेदार और भारी डिनर करते हैं। कैफीन नर्वस सिस्टम को उत्तेजित करता है, जिससे मस्तिष्क शांत नहीं हो पाता। वहीं, भारी भोजन के कारण पाचन तंत्र को रातभर काम करना पड़ता है, जो शरीर को रिलैक्स नहीं होने देता।
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सुझाव: रात का खाना हमेशा हल्का और सुपाच्य रखें तथा सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले भोजन कर लें। शाम 5 बजे के बाद कॉफी या कैफीन युक्त पेय पदार्थों से बचें।
3. सोने और जागने का कोई निश्चित समय न होना
यदि आपकी दिनचर्या में सोने का कोई तय समय नहीं है—कभी आप रात 10 बजे सोते हैं तो कभी रात के 2 बजे—तो यह आपके शरीर की बायोलॉजिकल क्लॉक (Circadian Rhythm) को पूरी तरह बिगाड़ देता है। शरीर को यह समझ नहीं आता कि उसे कब रिलैक्स होना है।
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सुझाव: सप्ताह के सातों दिन (वीकेंड्स सहित) एक ही समय पर सोने और सुबह एक ही समय पर उठने की आदत डालें। इससे शरीर खुद-ब-खुद उस समय पर नींद के संकेत भेजने लगता है।
4. बेडरूम का असहज माहौल और तेज रोशनी
कमरे का वातावरण आपकी नींद की गुणवत्ता पर सीधा असर डालता है। यदि आपके बेडरूम में तेज सफेद लाइट जल रही है, तापमान बहुत गर्म या ठंडा है, या बाहर का शोर अंदर आ रहा है, तो गहरी नींद आना असंभव हो जाता है।
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सुझाव: अपने बेडरूम में हल्की पीली या डिम लाइट का इस्तेमाल करें, खिड़कियों पर डार्क कर्टन लगाएं और कमरे को शांत व हवादार रखें ताकि आरामदायक माहौल मिल सके।
5. बिस्तर पर लेटकर तनाव या भविष्य की चिंता करना
अक्सर लोग बिस्तर पर जाने के बाद दिनभर की घटनाओं, ऑफिस के तनाव या भविष्य की चिंताओं के बारे में सोचने लगते हैं। मस्तिष्क जब ओवरथिंकिंग (Overthinking) मोड में चला जाता है, तो शरीर ‘फाइट ऑर फ्लाइट’ की स्थिति में आ जाता है, जिससे नींद कोसों दूर हो जाती है।
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सुझाव: बिस्तर का उपयोग केवल सोने के लिए करें। यदि मन में ज्यादा विचार आ रहे हैं, तो एक डायरी में उन्हें लिखकर बंद कर दें या गहरी सांस लेने की एक्सरसाइज (Deep Breathing) करें ताकि मन शांत हो सके।
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