
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में कृषि शिक्षा को बढ़ावा देने और अन्नदाताओं के परिवारों को आर्थिक संबल प्रदान करने की दिशा में एक अहम कदम उठाया है। मुख्यमंत्री ने ‘मुख्यमंत्री कृषक छात्रवृत्ति योजना’ (Mukhyamantri Krishak Chhatravriti Yojana) का दायरा और अधिक व्यापक बनाने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। सरकार का यह प्रयास है कि कृषि क्षेत्र में उच्च शिक्षा प्राप्त कर रहे अधिक से अधिक मेधावी विद्यार्थियों को वित्तीय सहायता मिल सके, ताकि वे बिना किसी आर्थिक बाधा के अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें और आधुनिक कृषि व अनुसंधान (Research) में अपना योगदान दे सकें।
योजना के विस्तार से क्या होगा फायदा?
अब तक इस छात्रवृत्ति योजना के दायरे में सीमित संख्या में ही विश्वविद्यालय और पाठ्यक्रम आते थे। मुख्यमंत्री के नए निर्देशों के बाद इस योजना से जुड़े कई बड़े बदलाव देखने को मिलेंगे:
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अधिक छात्रों तक पहुंच: प्रदेश के राजकीय कृषि विश्वविद्यालयों के साथ-साथ मान्यता प्राप्त कृषि महाविद्यालयों में कृषि (Agriculture), बागवानी (Horticulture), डेयरी और वानिकी (Forestry) की पढ़ाई करने वाले छात्रों को भी इसका लाभ मिल सकेगा।
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शोध और अनुसंधान को बढ़ावा: ग्रामीण अंचल और किसान परिवारों से आने वाले मेधावी छात्र जो आर्थिक तंगी के कारण उच्च शिक्षा या रिसर्च से पीछे हट जाते थे, उन्हें इस छात्रवृत्ति से अपनी पढ़ाई और प्रोजेक्ट्स में सीधी मदद मिलेगी।
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एग्री-टेक और आधुनिक कृषि पर जोर: सरकार का मुख्य उद्देश्य उत्तर प्रदेश के युवाओं को पारंपरिक खेती के साथ-साथ आधुनिक कृषि तकनीक, फूड प्रोसेसिंग और कृषि स्टार्टअप्स की ओर आकर्षित करना है।
पारदर्शी तरीके से डीबीटी (DBT) के जरिए होगा भुगतान
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। पात्र विद्यार्थियों के बैंक खातों में डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से समय पर छात्रवृत्ति की राशि भेजी जाएगी, जिससे किसी भी तरह की देरी या धांधली की गुंजाइश न रहे। कृषि विभाग और संबंधित शैक्षणिक संस्थानों को इस संबंध में जल्द ही नए प्रस्तावों को अमलीजामा पहनाने के निर्देश दे दिए गए हैं।
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