क्या बच्चियों को अंडा खिलाने से जल्दी आते हैं पीरियड्स? डॉक्टर ने बताई इस आम मिथक की पूरी सच्चाई

भारतीय समाज और परिवारों में खानपान को लेकर कई तरह की मान्यताएं और दबी-छिपी बातें जुड़ी हुई हैं। इनमें से एक सबसे आम और पुराना मिथक यह है कि छोटी बच्चियों को अंडा, चिकन या अन्य नॉन-वेज फूड्स खिलाने से उनके शरीर में हॉर्मोनल बदलाव तेजी से होने लगते हैं, जिससे उन्हें समय से पहले (प्रीकोसस प्यूबर्टी) पीरियड्स आने की शिकायत हो सकती है। इस डर की वजह से कई परिवार अपनी बढ़ती बच्चियों के आहार से पौष्टिक चीजों को दूर रखने लगते हैं। लेकिन क्या इस बात में वाकई कोई वैज्ञानिक सच्चाई है? आइए जानते हैं देश के जाने-माने डॉक्टर्स और गायनेकोलॉजिस्ट्स की इस पर क्या राय है।

क्या सच में अंडे खाने से जल्दी पीरियड्स आते हैं?

स्त्री रोग विशेषज्ञों और बाल विकास विशेषज्ञों (Paediatricians) के अनुसार, अंडा खिलाने से बच्चियों को जल्दी पीरियड्स आने की बात पूरी तरह से एक बेबुनियाद मिथक (Myth) है। इसका चिकित्सा विज्ञान (Medical Science) में कोई आधार नहीं है। अंडा प्रकृति द्वारा दी गई एक ऐसी संपूर्ण खुराक है, जो प्रोटीन, विटामिन डी, विटामिन बी-12, कोलीन और मिनरल्स से भरपूर होती है। यह बढ़ते बच्चों की हड्डियों को मजबूत बनाने, मांसपेशियों के विकास और मस्तिष्क की क्षमता को तेज करने में अहम भूमिका निभाता है। केवल अंडे के सेवन से किसी बच्ची के हॉर्मोनल सिस्टम पर कोई नकारात्मक या त्वरित असर नहीं पड़ता है।

फिर कम उम्र में पीरियड आने (Precocious Puberty) का असली कारण क्या है?

आज के दौर में कुछ बच्चियों में कम उम्र (जैसे 9 से 11 साल की उम्र) में ही प्यूबर्टी के लक्षण दिखने या पीरियड्स आने की घटनाएं बढ़ी हैं, लेकिन इसके पीछे अंडे या प्राकृतिक नॉन-वेज का कोई हाथ नहीं है। डॉक्टर्स के अनुसार इसके मुख्य और वास्तविक कारण निम्नलिखित हैं:

  1. बचपन का मोटापा (Childhood Obesity): आधुनिक जीवनशैली और शारीरिक श्रम की कमी के कारण बच्चों में मोटापा तेजी से बढ़ रहा है। शरीर में फैट (Adipose tissue) की मात्रा बढ़ने से लेप्टिन और एस्ट्रोजन जैसे हॉर्मोन्स का स्तर समय से पहले सक्रिय हो जाता है, जो कम उम्र में पीरियड्स आने का सबसे बड़ा वैज्ञानिक कारण है।

  2. जंक फूड और पैकेज्ड डाइट: अत्यधिक मात्रा में जंक फूड, कोल्ड ड्रिंक्स, मैदे से बनी चीजें और पैकेज्ड स्नैक्स का सेवन बच्चों के अंतःस्रावी तंत्र (Endocrine System) को बुरी तरह प्रभावित करता है।

  3. पर्यावरणीय कारक (Endocrine Disruptors): प्लास्टिक की बोतलों और टिफिन बॉक्स में गर्म खाना खाने, डिब्बाबंद खाद्य पदार्थों में इस्तेमाल होने वाले केमिकल्स और प्रिजर्वेटिव्स का शरीर पर बुरा असर पड़ता है।

  4. आनुवंशिक इतिहास (Genetics): परिवार में यदि मां या परिवार की अन्य महिलाओं को कम उम्र में माहवारी शुरू हुई हो, तो जेनेटिक कारणों से बच्ची में भी ऐसा होना स्वाभाविक हो सकता है।

पेरेंट्स के लिए डॉक्टर की सलाह

चिकित्सकों का सुझाव है कि बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार देना बेहद जरूरी है। अंडे जैसी हाई-प्रोटीन चीजें बच्चों के शारीरिक विकास के लिए वरदान साबित होती हैं। इसलिए किसी भी सुनी-सुनाई अफवाह या अंधविश्वास में आकर बच्चों के खानपान से पौष्टिक चीजें न हटाएं। इसके बजाय, उनके रूटीन में फिजिकल एक्टिविटी, आउटडोर गेम्स और होममेड हेल्दी फूड को शामिल करें ताकि उनका विकास प्राकृतिक और स्वस्थ तरीके से हो सके।

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