2027 के यूपी चुनाव की सियासी बिसात: चंद्रशेखर की आसपा का बड़ा दांव, 45 विधानसभा प्रभारियों के जरिए बसपा और सपा के फॉर्मूले पर टकटकी

उत्तर प्रदेश में 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों को लेकर राज्य का राजनीतिक पारा अभी से चढ़ने लगा है। सत्ताधारी दल से लेकर तमाम क्षेत्रीय और नए दल अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुट गए हैं। इसी कड़ी में नगीना सांसद और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद ने अपनी पार्टी की पकड़ मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाए हैं। पार्टी ने हाल ही में वरिष्ठ पत्रकार यूसुफ अंसारी को अपना नया राष्ट्रीय प्रवक्ता नियुक्त किया है। इसके साथ ही चुनाव की तैयारियों का आगाज करते हुए पार्टी राज्य की 45 महत्वपूर्ण विधानसभा सीटों पर अपने प्रभारियों के नामों का ऐलान कर चुकी है, जिससे राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

बसपा के नक्शेकदम और सोशल इंजीनियरिंग का दांव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चंद्रशेखर आजाद बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के पुराने और आजमाए हुए राजनीतिक फॉर्मूले पर चल रहे हैं। बसपा अमूमन चुनाव से काफी पहले विधानसभा प्रभारियों का ऐलान कर देती है और बाद में उन्हीं प्रभारियों को पार्टी का आधिकारिक उम्मीदवार घोषित किया जाता है। आसपा भी इसी रणनीति पर आगे बढ़ रही है।

चंद्रशेखर द्वारा जारी की गई 45 प्रभारियों की सूची से यह साफ झलकता है कि पार्टी पूरी तरह से ‘सोशल इंजीनियरिंग’ के समीकरण पर काम कर रही है। खास बात यह है कि इस पहली सूची में सवर्ण जातियों (ब्राह्मण या ठाकुर) की बजाय पूरी तरह से दलित, पिछड़े (OBC) और अल्पसंख्यक वर्ग पर फोकस किया गया है। लखीमपुर खीरी की पलिया सीट सिख बहुल होने के कारण वहां सिख समुदाय से ताल्लुक रखने वाले नेता को प्रभारी बनाया गया है। कुल 45 सीटों के समीकरण की बात करें तो 16 सीटों पर ओबीसी, 17 सीटों पर अनुसूचित जाति (SC) और 11 सीटों पर मुस्लिम समाज के नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।

सपा के ‘PDA’ फॉर्मूले की झलक और पश्चिम से पूर्वांचल तक विस्तार

आसपा प्रमुख चंद्रशेखर की इस सूची में समाजवादी पार्टी के चर्चित ‘पीडीए’ (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण की साफ झलक दिखाई देती है। ऐसे में आगामी विधानसभा चुनाव में आसपा को केवल बसपा के लिए ही नहीं, बल्कि मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (SP) के लिए भी एक बड़ी राजनीतिक चुनौती के रूप में देखा जा रहा है। चंद्रशेखर पहले ही भाजपा को छोड़कर अन्य दलों के साथ गठबंधन के संकेत दे चुके हैं, जिससे राजनीतिक समीकरण और अधिक दिलचस्प हो गए हैं।

आसपा ने केवल पश्चिमी उत्तर प्रदेश तक अपने आपको सीमित न रखकर पश्चिम से लेकर पूर्वांचल तक मजबूत घेराबंदी शुरू कर दी है। पार्टी ने शामली की थाना भवन, मुजफ्फरनगर की चरथावल, मेरठ, अलीगढ़, आगरा, बरेली और लखनऊ कैंट के साथ-साथ गोरखपुर, कुशीनगर, मऊ, जौनपुर, गाजीपुर और वाराणसी की रोहनिया जैसी अहम सीटों पर अपने प्रभारी घोषित कर दिए हैं, जो आने वाले चुनाव में कड़े मुकाबले का संकेत दे रहे हैं।

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