
भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत जब भी मैदान पर होते हैं, तो मैच में एक्शन और रोमांच के साथ-साथ भरपूर मनोरंजन की गारंटी अपने आप जुड़ जाती है। पंत चाहे क्रीज पर बल्लेबाजी करते हुए गेंदबाजों के छक्के छुड़ा रहे हों या फिर विकेट के पीछे दस्ताने पहनकर खड़े हों, उनकी ट्रेडमार्क ‘ऋषभ पंती’ कभी बंद नहीं होती। कई बार तो टीवी कमेंटेटर्स भी अपनी कमेंट्री रोककर स्टंप माइक की आवाज सुनते हैं ताकि पंत की मजेदार बातें सुन सकें। ऐसा ही एक बेहद लोटपोट कर देने वाला वाकया भारत और श्रीलंका के बीच गॉल (Galle) में खेले गए पहले टेस्ट मैच के चौथे दिन देखने को मिला। जब दिन का खेल खत्म होने से ठीक पहले कप्तान शुभमन गिल ने पार्ट-टाइम स्पिनर देवदत्त पडिक्कल के हाथों में गेंद थमाई, तो विकेट के पीछे खड़े ऋषभ पंत ने पडिक्कल से एक ऐसी अजीबोगरीब गेंद डालने की मांग कर दी जिसे सुनकर सोशल मीडिया पर फैंस ठहाके लगाने लगे।
‘अच्छा देव, कैरम बॉल डाल यार’: स्टंप माइक में कैद हुई ऋषभ पंत की आवाज
गॉल टेस्ट के चौथे दिन श्रीलंका की दूसरी पारी चल रही थी और दिन का खेल खत्म होने में केवल एक ही ओवर बचा हुआ था। कप्तान शुभमन गिल ने सभी मुख्य गेंदबाजों को आराम देते हुए नंबर-3 के प्रमुख बल्लेबाज देवदत्त पडिक्कल को अप्रत्याशित रूप से गेंदबाजी आक्रमण पर लगा दिया। पडिक्कल अपनी शुद्ध और तकनीकी बल्लेबाजी के लिए जाने जाते हैं और वे नियमित गेंदबाज नहीं हैं।
जैसे ही देवदत्त पडिक्कल अपना रन-अप लेकर गेंद फेंकने के लिए तैयार हुए, विकेट के पीछे खड़े ऋषभ पंत खुद को रोक नहीं पाए। पंत ने जोर से आवाज लगाते हुए कहा, “अच्छा देव, कैरम बॉल डाल यार, कम ऑन (चलो)!” रविचंद्रन अश्विन जैसे दिग्गज स्पिनरों द्वारा फेंकी जाने वाली जटिल ‘कैरम बॉल’ की यह फरमाइश एक पार्ट-टाइम स्पिनर से की गई थी, जिसने मैदान पर मौजूद स्लिप फील्डर्स और अंपायरों के चेहरे पर भी मुस्कान ला दी। स्टंप माइक में कैद हुई पंत की यह आवाज सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गई और फैंस इसे ‘पीक स्टंप-माइक एंटरटेनमेंट’ करार देने लगे।
पडिक्कल का आखिरी ओवर: 5 रन दिए, लेकिन गिल की सोची-समझी रणनीति
चौथे दिन के उस आखिरी ओवर में देवदत्त पडिक्कल ने 6 गेंदें फेंकी, जिसमें उन्होंने 5 रन खर्च किए। हालांकि उन्हें कोई विकेट नहीं मिला, लेकिन उन्होंने दिन का खेल बिना किसी बड़े नुकसान के सुरक्षित समाप्त कराया।
कप्तान शुभमन गिल द्वारा पडिक्कल को आखिरी ओवर सौंपने के पीछे एक चतुर मनोवैज्ञानिक रणनीति भी थी। टेस्ट क्रिकेट में अक्सर देखा गया है कि दिन के आखिरी पलों में जब बल्लेबाज पूरी तरह सेट गेंदबाजों की गति और लाइन से तालमेल बैठा चुके होते हैं, तब अचानक किसी अनजान पार्ट-टाइम गेंदबाज को लाने से बल्लेबाज की एकाग्रता भंग हो जाती है और गलती से विकेट गिरने की संभावना बढ़ जाती है। टीम इंडिया ने श्रीलंका के सामने जीत के लिए 372 रनों का विशाल लक्ष्य रखा था और चौथे दिन का खेल खत्म होने तक भारत ने मेजबान टीम के 84 रन पर 4 बड़े विकेट झटक लिए थे।
बल्ले से गरजा पडिक्कल का बल्ला: 167 रनों की ऐतिहासिक पारी से ठोकी दावेदारी
भले ही गेंदबाजी में पंत ने पडिक्कल की चुटकी ली हो, लेकिन इस पूरे टेस्ट मैच में देवदत्त पडिक्कल टीम इंडिया के सबसे बड़े मैच विनर बनकर उभरे। युवा बल्लेबाज साई सुदर्शन की अनुपस्थिति में पडिक्कल को टेस्ट में नंबर-3 की बेहद महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई थी, जिसे उन्होंने दोनों हाथों से भुनाया।
पडिक्कल ने पहली पारी में 230 गेंदों का सामना करते हुए 15 चौकों और 1 छक्के की मदद से 167 रनों की शानदार शतकीय पारी खेली, जिसने भारत को पहली पारी में 462 रनों के विशाल स्कोर तक पहुंचाया। इसके बाद दूसरी पारी में भी उन्होंने तेजी से रन बनाते हुए 75 गेंदों में 6 चौकों के साथ उपयोगी 44 रन जोड़े। अभ्यास मैच में शतक लगाने के बाद पहले ही टेस्ट में 167 रन ठोककर पडिक्कल ने टेस्ट टीम में नंबर-3 के स्थान के लिए अपनी दावेदारी को बेहद मजबूत कर दिया है।
मैदान पर जीवंत माहौल: क्यों खास है ऋषभ पंत का विकेटकीपिंग अंदाज?
ऋषभ पंत का विकेट के पीछे यह मजाकिया अंदाज सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं होता, बल्कि यह टेस्ट क्रिकेट के लंबे और थकाऊ दिनों में पूरी टीम की ऊर्जा को बनाए रखने का काम करता है। जब टेस्ट मैच के अंतिम सत्र में फील्डर्स थकने लगते हैं, तो पंत की लगातार आवाजें, चुटीले कमेंट्स और गेंदबाजों की हौसलाअफजाई टीम के माहौल को पूरी तरह तरोताजा रखती है।
पंत ने इस मैच में खुद भी बल्ले से ऐतिहासिक प्रदर्शन किया था, जहां उन्होंने दूसरी पारी में 69 गेंदों पर 66 रनों की आक्रामक पारी खेली और टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में सबसे तेज 100 छक्के लगाने वाले दुनिया के पहले बल्लेबाज बने। बल्ले से रिकॉर्डतोड़ आक्रामकता और विकेट के पीछे बेफिक्र मस्ती—यही ऋषभ पंत को आधुनिक क्रिकेट का सबसे बड़ा क्राउड-पुलर और ‘एक्स-फैक्टर’ बनाती है।
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