पंजाब कांग्रेस में फिर भड़की गुटबाजी की चिंगारी: CWC की अहम बैठक में नहीं पहुंचे पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी, PhD परीक्षा का दिया हवाला; राहुल गांधी के दौरे से पहले बढ़ी खींचतान

पंजाब विधानसभा चुनावों की तैयारियों और संगठनात्मक रणनीति के बीच कांग्रेस पार्टी की अंदरूनी खींचतान एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है। नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की महत्वपूर्ण बैठक से पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री और जालंधर से कांग्रेस सांसद चरणजीत सिंह चन्नी (Charanjit Singh Channi) ने किनारा कर लिया। बैठक में न पहुंचने की वजह स्पष्ट करते हुए चन्नी ने कहा कि उसी दिन उनकी पीएचडी (PhD) की परीक्षा निर्धारित थी, जिसके चलते वे दिल्ली नहीं आ सके। हालांकि, चुनावी तैयारियों की समीक्षा के लिए बुलाई गई इस शीर्ष स्तरीय बैठक से चन्नी की अनुपस्थिति को राजनीतिक विश्लेषक और पार्टी के अंदरूनी सूत्र प्रदेश नेतृत्व और आलाकमान के प्रति उनकी संभावित नाराजगी के तौर पर देख रहे हैं।

PhD परीक्षा की टाइमिंग पर सवाल: विरोधी खेमे ने कसा तंज

चन्नी ने भले ही अपनी गैर-मौजूदगी की वजह पढ़ाई और परीक्षा बताई हो, लेकिन पार्टी सूत्रों के अनुसार उनके पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन और पब्लिक पॉलिसी विषयों की परीक्षा के शेड्यूल को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। विरोधी खेमे का दावा है कि परीक्षा की तारीखों के बीच चन्नी दिल्ली आकर बैठक में हिस्सा ले सकते थे।

बैठक में शामिल कांग्रेस सांसद और राजस्थान के प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने चन्नी के न आने पर चुटकी लेते हुए कहा कि हम उन्हें शुभकामनाएं देते हैं और उम्मीद करते हैं कि वे अपनी पीएचडी पूरी करके जल्द डॉक्टर बनेंगे। चन्नी के करीबी नेताओं का हालांकि साफ कहना है कि उनकी अनुपस्थिति केवल पूर्व-निर्धारित शैक्षणिक प्रतिबद्धता के कारण थी और इसका पार्टी नेतृत्व से नाराजगी से कोई संबंध नहीं है।

चन्नी बनाम राजा वड़िंग: पंजाब कांग्रेस में दो धड़ों की जंग

पंजाब कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच शक्ति संतुलन को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही है। पिछले कुछ हफ्तों में राज्य के विभिन्न जिलों में आयोजित पार्टी बैठकों और रैलियों में दोनों नेताओं के समर्थकों के बीच तीखी बयानबाजी और नारेबाजी की घटनाएं भी सामने आई हैं।

चन्नी खेमा जहां राज्य में अपने मजबूत जनाधार और पूर्व मुख्यमंत्री के अनुभव के आधार पर संगठन में बड़ी भूमिका की उम्मीद कर रहा है, वहीं राजा वड़िंग का गुट संगठन पर अपनी पकड़ बनाए रखने में जुटा हुआ है। इस विवाद को शांत करने के लिए पार्टी आलाकमान ने राज्य प्रभारियों को डैमेज कंट्रोल में लगाया हुआ है।

राहुल गांधी के पंजाब दौरे से पहले गरमाया सियासी माहौल

यह पूरा घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब कांग्रेस के शीर्ष नेता राहुल गांधी का पंजाब दौरा प्रस्तावित माना जा रहा है। राहुल गांधी के हरिमंदिर साहिब (स्वर्ण मंदिर) में नतमस्तक होने और पंजाब के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर कलह को शांत करने की चर्चाएं हैं।

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले वरिष्ठ नेताओं द्वारा बैठकें छोड़ना या दूरी बनाना शीर्ष नेतृत्व पर अपनी ताकत का अहसास कराने और चुनावी टिकट वितरण व सांगठनिक फैसलों में अपनी बात मनवाने का एक परखा हुआ राजनीतिक दबाव का तरीका है।

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