बाबा रामदेव और अभिजीत दीपके में छिड़ी जुबानी जंग: CJP फाउंडर का पलटवार— ‘पतंजलि प्रोडक्ट्स की क्वालिटी और सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी पर दें ध्यान’

देश की सियासत में इन दिनों युवा-नेतृत्व वाली ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) और उसके संस्थापक अभिजीत दीपके के तेवर राजनीतिक गलियारों में चर्चा का केंद्र बने हुए हैं। हाल ही में योग गुरु बाबा रामदेव द्वारा CJP और सड़कों पर होने वाले राजनीतिक विरोध प्रदर्शनों पर सवाल उठाए जाने के बाद, अभिजीत दीपके ने बेहद आक्रामक अंदाज में पलटवार किया है। दीपके ने न केवल बाबा रामदेव को उनके बयानों पर घेरा, बल्कि यह सनसनीखेज दावा भी किया कि उन्हें लगातार धमकियां मिल रही हैं कि यदि वह भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल नहीं होते हैं, तो उनके परिवार के लिए गंभीर मुसीबतें खड़ी कर दी जाएंगी। इस तीखे राजनीतिक घटनाक्रम ने देश की शिक्षा व्यवस्था, विरोध प्रदर्शनों की संस्कृति और सत्ता पक्ष-विपक्ष की राजनीति को एक बार फिर सुर्खियों में ला दिया है।

बाबा रामदेव के बयानों पर अभिजीत दीपके का तीखा पलटवार और पतंजलि विवाद

योग गुरु बाबा रामदेव पर तीखा हमला बोलते हुए अभिजीत दीपके ने समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में कहा कि रामदेव को राजनीति पर अनायास बयानबाजी करने के बजाय अपने उत्पादों और उनकी गुणवत्ता पर ध्यान देना चाहिए। दीपके ने तंज कसते हुए कहा कि जिन पतंजलि उत्पादों को लेकर देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी गंभीर टिप्पणियां की हैं और उन्हें भ्रामक करार दिया है, पहले रामदेव को उन पर विचार करना चाहिए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि जेन-जी (Gen-Z) कल्चर देश और लोकतंत्र को बेहद परिपक्वता से संभाल रहा है, इसलिए रामदेव को अपनी कंपनियों और खराब हो रही पतंजलि प्रोडक्ट्स की क्वालिटी की चिंता करनी चाहिए, अन्यथा स्थिति ऐसी आ सकती है कि पतंजलि को ही बंद करना पड़ जाए। दीपके का यह बयान ऐसे समय आया है जब आयुर्वेदिक उत्पादों के विज्ञापन और गुणवत्ता को लेकर देश भर में तीखी बहस छिड़ी हुई है।

बाबा रामदेव का CJP और सड़क की राजनीति पर कड़ा रुख

गौरतलब है कि इससे पहले योग गुरु बाबा रामदेव ने कॉकरोच जनता पार्टी और उसके आंदोलन के तौर-तरीकों पर खुलकर सवाल उठाए थे। रामदेव ने स्पष्ट शब्दों में कहा था कि देश में शिक्षा मंत्री कौन होगा और कौन नहीं, इसका फैसला सड़कों पर भीड़ या प्रदर्शनों द्वारा तय नहीं किया जा सकता है, बल्कि यह देश के प्रधानमंत्री और संसद के दायरे में आता है। उन्होंने हालिया राजनीतिक प्रदर्शनों और स्वतंत्रता व व्यवस्था के नारों का जिक्र करते हुए कहा था कि प्रह्लाद जोशी के मंत्री बनने या राजनीतिक नियुक्तियों से किसी के पेट में दर्द नहीं होना चाहिए। रामदेव का यह बयान उन युवा प्रदर्शनकारियों के जवाब में आया था जो शिक्षा व्यवस्था और मंत्रियों की नियुक्तियों को लेकर सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ मुखर विरोध दर्ज करा रहे थे।

अमित शाह की जवाबदेही और पुलिस कार्रवाई पर दीपके का बड़ा बयान

इसके अलावा, देश के गृह मंत्री अमित शाह और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बीच चल रहे सियासी द्वंद्व पर भी अभिजीत दीपके ने खुलकर अपनी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी द्वारा लगाए गए आरोपों का समर्थन करते हुए दीपके ने कहा कि प्रदर्शनों के दौरान पुलिस द्वारा की जाने वाली कार्रवाई और बल प्रयोग की सीधी जिम्मेदारी देश के गृह मंत्री अमित शाह की बनती है। उन्होंने तर्क दिया कि चूंकि देश की पुलिस और कानून-व्यवस्था सीधे तौर पर केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन आती है और उसे रिपोर्ट करती है, इसलिए गृह मंत्री को इन तमाम जमीनी घटनाओं और पुलिसिया एक्शन की पूरी जानकारी होना स्वाभाविक है। दीपके के इन बयानों ने एक तरफ जहां सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं, वहीं दूसरी तरफ युवा राजनीति और प्रशासनिक व्यवस्था के बीच के टकराव को और अधिक तीव्र कर दिया है, जिससे आने वाले दिनों में राजनीतिक पारा और अधिक चढ़ने के आसार बन गए हैं।

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