
उत्तर प्रदेश के मौसम में एक बार फिर बड़ा और व्यापक बदलाव देखने को मिल रहा है। बीते कुछ दिनों से भीषण उमस और तीखी धूप से बेहाल प्रदेशवासियों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और आंचलिक मौसम विज्ञान केंद्र लखनऊ के ताजा बुलेटिन के मुताबिक, बंगाल की खाड़ी में बने निम्न दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) और सक्रिय मानसून ट्रफ लाइन के उत्तर की ओर खिसकने से राज्य में मानसूनी हवाएं पूरी तरह रफ्तार पकड़ चुकी हैं। 29 अगस्त से शुरू होकर अगले छह दिनों तक प्रदेश के पूर्वी, पश्चिमी, तराई और मध्यवर्ती जनपदों में रुक-रुक कर मूसलाधार बारिश, गरज-चमक और 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने का सिलसिला जारी रहेगा। इस मौसमी बदलाव के चलते राज्य भर में दिन और रात के तापमान में 3 से 6 डिग्री सेल्सियस तक की भारी गिरावट दर्ज की जाएगी, जिससे उमस भरी चिपचिपी गर्मी से पूरी तरह निजात मिलेगी।
6 दिनों का विस्तृत मौसम पूर्वानुमान: जानिए किस दिन कैसा रहेगा मिजाज
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, 29 अगस्त से मानसूनी बादलों का दायरा पूरे प्रदेश में फैलना शुरू हो चुका है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी दोनों तरफ से आ रही नमी युक्त हवाओं के टकराव के कारण वायुमंडल में तीव्र संवहन (convection) की स्थिति बन रही है।
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29 अगस्त: पश्चिमी और पूर्वी यूपी के लगभग 45 से अधिक जिलों में बादलों की आवाजाही के साथ हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर तेज बौछारें।
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30 अगस्त: मध्य यूपी, अवध और तराई बेल्ट के जिलों में घने बादलों का डेरा रहेगा, कई स्थानों पर मेघगर्जन के साथ मध्यम दर्जे की वर्षा होगी।
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31 अगस्त: पूर्वांचल और विंध्य क्षेत्र के जनपदों में मानसून का उग्र रूप देखने को मिल सकता है, जहां भारी से बहुत भारी बारिश और वज्रपात की चेतावनी दी गई है।
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1 सितंबर: पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ-साथ बुंदेलखंड और मध्यवर्ती संभागों में लगातार बारिश का दौर चलेगा, जिससे निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बन सकती है।
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2 सितंबर: पश्चिमी यूपी के राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) से लेकर रुहेलखंड और तराई के जनपदों में अधिकांश स्थानों पर तेज हवाओं के साथ मूसलाधार बारिश का अलर्ट है।
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3 सितंबर: प्रदेश भर में मानसूनी सक्रियता बनी रहेगी, जिसके बाद धीरे-धीरे सिस्टम के आगे बढ़ने से बारिश की तीव्रता में कमी आने की संभावना है।
आंचलिक विश्लेषण: पूर्वांचल, पश्चिमांचल, अवध और बुंदेलखंड में अलर्ट
मौसम विभाग ने स्थानीय भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए संभागवार चेतावनी जारी की है, जिससे जिला प्रशासन और आम जनता समय रहते सतर्कता बरत सके।
पूर्वी उत्तर प्रदेश (पूर्वांचल): वाराणसी, गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, बलिया, गाजीपुर, मऊ, आजमगढ़, जौनपुर, प्रयागराज, मिर्जापुर, सोनभद्र, चंदौली, बस्ती, सिद्धार्थनगर और संतकबीरनगर में 31 अगस्त से 2 सितंबर के दौरान भारी वर्षा, आकाशीय बिजली चमकने और 45 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से अंधड़ चलने की प्रबल संभावना है।
अवध एवं मध्य उत्तर प्रदेश: राजधानी लखनऊ, कानपुर नगर, कानपुर देहात, उन्नाव, बाराबंकी, रायबरेली, अमेठी, अयोध्या, सुल्तानपुर, सीतापुर, हरदोई, लखीमपुर खीरी, गोंडा, बलरामपुर, श्रावस्ती और बहराइच में लगातार मानसूनी फुहारों और मध्यम बारिश का सिलसिला बना रहेगा। इन जिलों में तेज पूर्वी हवाओं के चलते वातावरण में ठंडक घुलेगी।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश और एनसीआर क्षेत्र: नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, हापुड़, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा, आगरा, फिरोजाबाद, मुरादाबाद, बरेली, पीलीभीत, शाहजहांपुर, बदायूं, संभल, अमरोहा, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर में 30 अगस्त की रात से 2 सितंबर के बीच तेज आंधी और गरज-चमक के साथ मूसलाधार बारिश का अनुमान है।
बुंदेलखंड क्षेत्र: झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा और जालौन में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने की घटनाओं को लेकर विशेष यलो अलर्ट जारी किया गया है।
तापमान में भारी गिरावट और मौसमी बदलाव
लगातार मानसूनी बारिश और ठंडी नम हवाओं के चलते प्रदेश के तापमान ग्राफ में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की जाएगी। पिछले हफ्ते जहां अधिकांश शहरों में अधिकतम तापमान 35 से 37 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ था, वहीं आगामी 72 से 96 घंटों के भीतर यह लुढ़ककर 27 से 30 डिग्री सेल्सियस तक आ जाएगा। न्यूनतम तापमान में भी 23 से 25 डिग्री सेल्सियस तक की कमी देखी जाएगी। तापमान में इस अचानक गिरावट से मौसम सुहावना तो होगा, लेकिन मौसम में तेजी से आ रहे इस बदलाव के कारण मौसमी बीमारियां जैसे वायरल फीवर, डेंगू, मलेरिया, सर्दी-जुकाम और गैस्ट्रोएंटेराइटिस का खतरा बढ़ सकता है। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को बदलते मौसम में खान-पान पर विशेष ध्यान देने, बासी भोजन से बचने और केवल शुद्ध या उबला पानी पीने की सलाह दी है।
किसानों और आम नागरिकों के लिए IMD की सुरक्षा एडवाइजरी
कृषि वैज्ञानिकों और मौसम विशेषज्ञों ने इस बारिश को खरीफ की फसलों, विशेषकर धान, बाजरा और गन्ने के लिए बेहद लाभकारी बताया है। हालांकि, तेज हवाओं और जलजमाव को देखते हुए कुछ सावधानियां बरतने की सलाह भी दी गई है:
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धान एवं खरीफ फसलों की सुरक्षा: खेतों में जरूरत से ज्यादा पानी जमा न होने दें। जल निकासी की उचित व्यवस्था रखें ताकि तेज हवाओं के कारण फसलें न गिरें। बारिश और तेज हवा के दौरान कीटनाशकों व उर्वरकों का छिड़काव पूरी तरह स्थगित रखें।
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आकाशीय बिजली (वज्रपात) से बचाव: बादलों की तेज गड़गड़ाहट या चमक के समय खुले खेतों, ऊंचे पेड़ों, बिजली के खंभों या मोबाइल टावरों के नीचे कदापि शरण न लें। तत्काल किसी पक्के मकान या सुरक्षित स्थल के अंदर चले जाएं।
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शहरी क्षेत्रों में जलभराव व यातायात: शहरों के निचले इलाकों, अंडरपास और मुख्य चौराहों पर भारी बारिश से जलभराव हो सकता है। वाहन चलाते समय गति धीमी रखें और भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।
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