अंकित हत्याकांड में इंसाफ न मिलने पर फूटा परिजनों का आक्रोश, पिता सतबीर फौजी ने पुलिस प्रशासन को दिया 4 दिन का अल्टीमेटम

क्षेत्र के चर्चित अंकित हत्याकांड में मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से पीड़ित परिवार और स्थानीय ग्रामीणों का आक्रोश अब चरम पर पहुंच गया है। वारदात के कई दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस के हाथ खाली होने पर मृतक अंकित के पिता एवं पूर्व सैनिक सतबीर फौजी ने पुलिस प्रशासन के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है। उन्होंने दो-टूक शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि अगले 4 दिनों के भीतर अंकित के कातिलों को गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे नहीं भेजा गया, तो पूरा क्षेत्र सड़कों पर उतरेगा और एक ऐसा ऐतिहासिक आंदोलन होगा जिसकी पूरी जिम्मेदारी स्थानीय प्रशासन और पुलिस विभाग की होगी।

अंकित हत्याकांड में पुलिस की सुस्त जांच पर भड़का गुस्सा, पिता सतबीर फौजी ने दिया 4 दिन का अल्टीमेटम

अंकित की नृशंस हत्या के बाद से ही गांव और आसपास के समूचे इलाके में भारी तनाव व मातम का माहौल बना हुआ है। दिनदहाड़े या सुनियोजित तरीके से अंजाम दी गई इस वारदात ने कानून-व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। पीड़ित पिता सतबीर फौजी ने कहा कि उन्होंने देश की सीमाओं की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित कर दिया, लेकिन आज अपने ही बेटे के कातिलों को सजा दिलाने के लिए उन्हें दर-दर की ठोकरें खानी पड़ रही हैं।

परिजनों का सीधा आरोप है कि घटना के संबंध में नामजद व संदिग्ध लोगों की जानकारी पुलिस को उपलब्ध कराने के बावजूद जांच अधिकारी हीला-हवाली कर रहे हैं। परिजनों का कहना है कि पुलिस केवल आश्वासन का झुनझुना थमा रही है, जबकि असली साजिशकर्ता और हमलावर खुलेआम घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार को धमकाने का प्रयास कर रहे हैं। इसी उदासीन रवैये के खिलाफ सतबीर फौजी ने पंचायत और समर्थकों के साथ बैठक कर प्रशासन को 4 दिन की अंतिम समय-सीमा (अल्टीमेटम) तय कर दी है।

महापंचायत और चक्का जाम की तैयारी: न्याय न मिलने पर पूरे क्षेत्र में आंदोलन का ऐलान

सतबीर फौजी के इस अल्टीमेटम को इलाके की विभिन्न सामाजिक संस्थाओं, पूर्व सैनिक संगठनों, किसान यूनियनों और युवा संगठनों का खुला समर्थन मिलना शुरू हो गया है। अल्टीमेटम की मियाद पूरी होने के बाद आंदोलन की जो रूपरेखा तैयार की जा रही है, उसके तहत:

  • सर्वजातीय महापंचायत का आयोजन: तय 4 दिन बीतने के बाद गांव में एक विशाल महापंचायत बुलाई जाएगी, जिसमें जिले भर के प्रमुख प्रतिनिधि और हजारों ग्रामीण शामिल होकर निर्णायक कदम उठाएंगे।

  • प्रमुख मार्गों और हाईवे का चक्का जाम: यदि पुलिस ने ठोस कार्रवाई नहीं की, तो मुख्य मार्गों और जिला मुख्यालय को जोड़ने वाले रास्तों पर अनिश्चितकालीन जाम लगाया जाएगा।

  • पुलिस अधीक्षक (एसपी) कार्यालय का घेराव: आक्रोशित ग्रामीण और सर्व समाज के लोग जिला पुलिस मुख्यालय का घेराव कर धरने पर बैठेंगे।

  • व्यापारिक प्रतिष्ठानों का समर्थन: स्थानीय व्यापार मंडलों से भी इस न्याय की लड़ाई में बाजार बंद रखकर सहयोग करने की अपील की जा रही है।

कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल: पुलिस की कार्यशैली और संदिग्धों की तलाश में जुटी टीमें

अंकित की हत्या के पीछे की वजहों को लेकर इलाके में कई तरह की चर्चाएं हैं। परिजनों के अनुसार यह एक सोची-समझी साजिश का नतीजा है, जिसमें शामिल चेहरे बेखौफ घूम रहे हैं। घटना के बाद से ही इलाके के युवाओं में भारी आक्रोश देखा जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते पुलिस ने कड़ा रुख अपनाया होता, तो अपराधियों के हौसले इतने बुलंद नहीं होते।

मामले के तूल पकड़ने और 4 दिन के अल्टीमेटम के बाद पुलिस महकमे में भी हड़कंप मच गया है। पुलिस के उच्चाधिकारियों का दावा है कि मामले की गुत्थी सुलझाने के लिए विशेष जांच दल (SIT), क्राइम ब्रांच और सर्विलांस की कई टीमों को सक्रिय कर दिया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि संदिग्ध ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है, कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स (CDR) और घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले जा रहे हैं। अधिकारियों ने पीड़ित परिवार से शांति बनाए रखने और जांच में सहयोग करने की अपील करते हुए भरोसा दिलाया है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।

न्याय की गुहार और पीड़ित परिवार का संकल्प: ‘जब तक इंसाफ नहीं, तब तक संघर्ष जारी रहेगा’

बेटे को खो चुके फौजी पिता का दर्द देखकर हर किसी की आंखें नम हैं। सतबीर फौजी ने स्पष्ट किया कि यह लड़ाई सिर्फ उनके बेटे अंकित के लिए नहीं है, बल्कि यह उन तमाम बेकसूर युवाओं और परिवारों की सुरक्षा की लड़ाई है जो बेलगाम अपराधियों के आतंक का शिकार होते हैं। उन्होंने कहा कि एक सैनिक कभी पीछे हटना नहीं सीखता और जब तक उनके बेटे के हत्यारों को कठोरतम कानूनी सजा नहीं मिल जाती, तब तक यह संघर्ष किसी भी कीमत पर रुकने वाला नहीं है।

गांव के बुजुर्गों और प्रबुद्ध नागरिकों ने भी प्रशासन को आगाह किया है कि जनता के सब्र का बांध टूट चुका है। यदि तय 4 दिनों के भीतर पुलिस ने मुख्य आरोपियों को बेनकाब कर जेल नहीं भेजा, तो पैदा होने वाली किसी भी अप्रिय स्थिति, कानून-व्यवस्था के संकट और जनआक्रोश के लिए सीधे तौर पर पुलिस प्रशासन जवाबदेह होगा।

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