
खगोल विज्ञान और ज्योतिषीय दृष्टिकोण से 12 अगस्त 2026 की तारीख बेहद खास मानी जा रही है। आज साल का पहला पूर्ण सूर्य ग्रहण (Total Solar Eclipse) घटित हो रहा है। जब चंद्रमा, सूर्य और पृथ्वी के बीच पूरी तरह आकर सूर्य के प्रकाश को ढक लेता है, तो उसे पूर्ण सूर्य ग्रहण कहा जाता है।
इस सूर्य ग्रहण की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसके प्रभाव क्षेत्र में आने वाले देशों में दोपहर या ढलती शाम के वक्त लगभग 2 से 6 मिनट तक दिन में ही आधी रात जैसा घनघोर अंधेरा छा जाएगा। आसमान में तारे दिखाई देने लगेंगे और तापमान में अचानक गिरावट महसूस की जाएगी। वैज्ञानिक इसे इस दशक की सबसे विस्मयकारी खगोलीय घटनाओं में से एक मान रहे हैं।
सूर्य ग्रहण की वैश्विक टाइमिंग (IST – भारतीय समयानुसार)
अंतर्राष्ट्रीय समय की गणना के अनुसार, भारतीय समयानुसार (IST) इस सूर्य ग्रहण का घटनाक्रम इस प्रकार रहेगा:
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आंशिक सूर्य ग्रहण का प्रारंभ: 12 अगस्त 2026, शाम 09:04 बजे से (15:34 UTC)
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पूर्ण सूर्य ग्रहण (Totality) का प्रारंभ: 12 अगस्त 2026, रात्रि 10:28 बजे से (16:58 UTC)
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ग्रहण का परमग्रास (Maximum Eclipse): 12 अगस्त 2026, रात्रि 11:16 बजे (17:46 UTC)
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पूर्ण सूर्य ग्रहण का समापन: 13 अगस्त 2026, तड़के 12:04 बजे (18:34 UTC – 12 Aug)
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ग्रहण का पूर्ण समापन: 13 अगस्त 2026, तड़के 01:27 बजे (19:57 UTC – 12 Aug)
क्या भारत में दिखाई देगा यह सूर्य ग्रहण?
नहीं, यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा।
जब दुनिया के अन्य हिस्सों में सूर्य ग्रहण अपनी पूर्णता पर होगा (रात 10:30 से 11:30 बजे के बीच), उस समय भारत में रात हो चुकी होगी और सूर्य क्षितिज से नीचे (Below Horizon) ढल चुका होगा। इसलिए भारतीय उपमहाद्वीप से यह खगोलीय घटना प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखी जा सकेगी।
यह सूर्य ग्रहण कहाँ-कहाँ दिखाई देगा?
यह पूर्ण सूर्य ग्रहण मुख्य रूप से स्पेन, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, आर्कटिक महासागर, उत्तरी पुर्तगाल और रूस के कुछ हिस्सों में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। इसके अलावा पूरे यूरोप, उत्तरी अफ्रीका, उत्तर अमेरिका के कुछ पूर्वी हिस्सों में यह आंशिक सूर्य ग्रहण (Partial Eclipse) के रूप में देखा जा सकेगा।
सूतक काल कहाँ मान्य होगा और कहाँ नहीं?
हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र का नियम है कि सूतक काल केवल उसी स्थान पर लागू और मान्य होता है जहाँ ग्रहण प्रत्यक्ष रूप से दिखाई देता है।
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भारत में सूतक काल: चूँकि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं दे रहा है, इसलिए भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा।
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भारत में मंदिरों के कपाट बंद करने या पूजा-पाठ रोकने की आवश्यकता नहीं है।
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खान-पान, यात्रा और रोजमर्रा के कार्यों पर कोई धार्मिक प्रतिबंध नहीं रहेगा।
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गर्भवती महिलाओं, बच्चों व बुजुर्गों को किसी तरह के कड़े सूतक नियमों का पालन करने की आवश्यकता नहीं है।
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विदेशों में सूतक काल: स्पेन, ग्रीनलैंड, आइसलैंड आदि जिन देशों में यह ग्रहण दिखाई देगा, केवल वहीं पर ग्रहण से ठीक 12 घंटे पहले सूतक काल प्रभावी माना जाएगा।
भारत में रहने वाले श्रद्धालुओं के लिए सलाह
यद्यपि भारत में सूतक काल मान्य नहीं है, फिर भी जो लोग आध्यात्मिक साधना में रुचि रखते हैं, वे सावन अमावस्या के पावन अवसर पर दिन भर भगवान शिव के पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’, गायत्री मंत्र या आदित्य हृदय स्तोत्र का जाप कर सकते हैं। ग्रहण काल के पश्चात या अगले दिन सुबह जरूरतमंदों को गेहूँ, गुड़, काले तिल या वस्त्रों का दान करना अत्यंत पुण्यदायी माना गया है।
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