पाकिस्तान में तख्तापलट करने वाले हैं सेना प्रमुख आसिम मुनीर? चौतरफा महा-संकट के बीच इस्लामाबाद में बढ़ी सुगबुगाहट

पाकिस्तान अपने इतिहास के सबसे गंभीर आर्थिक, राजनीतिक और सुरक्षात्मक दौर से गुजर रहा है। शहबाज शरीफ सरकार की नाकामी, अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के कड़े प्रतिबंधों से आम जनता पर बढ़ा महंगाई का बोझ और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) व बलूच लिबरेशन आर्मी (BLA) द्वारा किए जा रहे भीषण आतंकी हमलों ने देश को पूरी तरह अस्थिर कर दिया है।

ऐसे में इस्लामाबाद के राजनीतिक गलियारों और वैश्विक कूटनीतिक हलकों में यह चर्चा जोर पकड़ रही है कि पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर (General Asim Munir) देश की कमान पूरी तरह से अपने हाथों में लेने यानी तख्तापलट (Military Coup) की योजना बना रहे हैं। पाकिस्तान के इतिहास को देखते हुए यह कोई नई बात नहीं है—चाहे अयूब खान हों, जिया-उल-हक या परवेज मुशर्रफ, जब भी पाकिस्तान नागरिक और आर्थिक रूप से पंगु हुआ है, सेना ने सत्ता पर सीधा कब्जा किया है।

क्या है आसिम मुनीर की ‘हाइब्रिड मॉडल’ रणनीति?

रक्षा विशेषज्ञों और खुफिया तंत्र के विश्लेषकों का मानना है कि आसिम मुनीर को शायद पारंपरिक रूप से मार्शल लॉ (Martial Law) लगाने की आवश्यकता भी न पड़े, क्योंकि पाकिस्तान में इस समय ‘हाइब्रिड गवर्नेंस’ (Hybrid Governance) का मॉडल चल रहा है।

शहबाज शरीफ सरकार केवल एक मुखौटे (Puppet Government) के रूप में काम कर रही है, जबकि देश के सभी बड़े नीतिगत, आर्थिक और सुरक्षा संबंधी फैसले रावलपिंडी स्थित जनरल हेडक्वार्टर (GHQ) से आसिम मुनीर द्वारा ही लिए जा रहे हैं।

स्पेशल इन्वेस्टमेंट फैसिलिटेशन काउंसिल (SIFC) के जरिए सेना ने पाकिस्तान के खनन, कृषि, ऊर्जा और वित्तीय क्षेत्रों पर पहले ही सीधा अधिकार जमा लिया है। यदि राजनीतिक उथल-पुथल बेकाबू होती है, तो सेना औपचारिक रूप से संसद को भंग करके ‘राष्ट्रीय आपातकाल’ (National Emergency) या प्रत्यक्ष सैन्य शासन लागू करने से पीछे नहीं हटेगी।

3 मुख्य कारण जो दे रहे हैं सैन्य शासन को बढ़ावा

पाकिस्तान में तख्तापलट की संभावनाओं को हवा देने के पीछे निम्नलिखित 3 मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:

  1. बलूचिस्तान और केपीके में सुरक्षा तंत्र की विफलता: बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा में पाकिस्तानी सेना और आईएसआई (ISI) के ठिकानों पर टीटीपी और बीएलए के हमले रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गए हैं। सेना का मनोबल गिर रहा है और आसिम मुनीर पूरी कमान हाथ में लेकर सैन्य अभियानों को और सख्त करना चाहते हैं।

  2. इमरान खान और पीटीआई का उग्र प्रदर्शन: जेल में बंद पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की बढ़ती लोकप्रियता और उनकी पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI) द्वारा सेना के खिलाफ खुला मोर्चा खोलना आसिम मुनीर के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। नागरिक सरकार इमरान समर्थकों को नियंत्रित करने में नाकाम साबित हो रही है।

  3. चरमराती अर्थव्यवस्था और विदेशी कर्ज: पाकिस्तान डिफॉल्ट होने की कगार पर खड़ा है। चीन और खाड़ी देश (सऊदी अरब, यूएई) अब नागरिक सरकार के बजाय केवल सेना प्रमुख (आसिम मुनीर) की गारंटी पर ही निवेश या वित्तीय मदद देने की शर्त रख रहे हैं।

आगे क्या होगा? कूटनीतिक दुनिया की नजरें इस्लामाबाद पर

यदि जनरल आसिम मुनीर औपचारिक रूप से तख्तापलट करते हैं, तो पाकिस्तान के लिए इसके गंभीर परिणाम हो सकते हैं। अमेरिका और यूरोपीय संघ (EU) तख्तापलट की स्थिति में पाकिस्तान पर कड़े प्रतिबंध लगा सकते हैं और आईएमएफ की किश्तें रुक सकती हैं, जिससे देश पूरी तरह कगांल हो सकता है।

वहीं दूसरी ओर, चीन अपने सीपीईसी (CPEC) प्रोजेक्ट्स की सुरक्षा के लिए पाकिस्तान में एक मजबूत सैन्य नेतृत्व का समर्थन कर सकता है। आने वाले कुछ सप्ताह पाकिस्तान की राजनीति और सत्ता के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं।

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