
सनातन धर्म परंपरा में सावन मास का प्रत्येक मंगलवार मां मंगला गौरी यानी शक्ति स्वरूपा माता पार्वती को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मंगला गौरी व्रत के दिन केवल सुबह की पूजा ही नहीं, बल्कि संध्या काल (प्रदोष काल) में की गई साधना और उपाय भी अत्यंत फलदायी होते हैं। आज मंगला गौरी व्रत की पावन संध्या पर मां पार्वती और भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त करने का सबसे उत्तम अवसर है। ज्योतिषशास्त्र और धर्मग्रंथों में बताया गया है कि संध्या समय जब दिन और रात का मिलन होता है, उस समय की गई पूजा-अर्चना से साधक के जीवन के समस्त आर्थिक संकट, कर्ज का बोझ और दरिद्रता हमेशा के लिए समाप्त हो जाती है। यदि आपके जीवन में लंबे समय से धन से जुड़ी समस्याएं बनी हुई हैं या व्यापार में लगातार घाटा हो रहा है, तो आज शाम ढलते ही मां मंगला गौरी की प्रसन्नता के लिए ये 4 विशेष उपाय अवश्य करें।
1. 16 बाति का दीपक और कलावा का चमत्कारी उपाय
मंगला गौरी व्रत की शाम को आटे या पीतल के दीपक में 16 रुई या कलावे की बत्तियां लगाएं। उसमें गाय का शुद्ध देसी घी भरकर घर के मुख्य द्वार पर या मंदिर में मां पार्वती की प्रतिमा के समक्ष प्रज्वलित करें। दीपक जलाते समय ‘ॐ मंगलागौर्ये नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। माना जाता है कि 16 बाती के इस दिव्य प्रकाश से घर की समस्त नकारात्मक ऊर्जा और दरिद्रता भस्म हो जाती है और मां लक्ष्मी व मां पार्वती का घर में स्थायी वास होता है।
2. मां मंगला गौरी को अर्पित करें 16 लौंग और लाल पुष्प
आज शाम की पूजा के दौरान मां मंगला गौरी को 16 साबुत लौंग (बिना टूटी हुई) और 16 लाल गुलाब या मदार के फूल अर्पित करें। इसके साथ ही थोड़ा सा गुड़ और लाल मसूर की दाल मां के चरणों में रखें। पूजा संपन्न होने के पश्चात इन 16 लौंग को एक लाल कपड़े में बांधकर अपनी तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रख दें। यह उपाय धन आकर्षण का काम करता है और रुका हुआ धन वापस दिलाने में मदद करता है।
3. शिव-पार्वती का केसर-दूध से अभिषेक और बेलपत्र उपाय
संध्या काल में किसी निकटतम शिव मंदिर जाएं या घर पर ही शिवलिंग और मां पार्वती की प्रतिमा का केसर मिश्रित कच्चे दूध से अभिषेक करें। इसके बाद 21 बेलपत्रों पर लाल चंदन से ‘राम’ लिखकर शिवलिंग और मां पार्वती को अर्पित करें। आर्थिक तंगी से मुक्ति पाने के लिए यह अचूक उपाय माना गया है। इससे महादेव और माता गौरी दोनों अत्यंत प्रसन्न होकर साधक की झोली धन-धान्य से भर देते हैं।
4. सुहाग सामग्री और अन्न का दान
आज शाम की पूजा पूरी करने के बाद किसी जरूरतमंद महिला या योग्य ब्राह्मणी को 16 प्रकार की सुहाग सामग्री (जैसे सिंदूर, लाल चूड़ियां, बिंदी, मेहंदी, चुनरी आदि) और लाल वस्त्र के साथ अन्न या फल का दान करें। शास्त्रों के अनुसार, मंगला गौरी व्रत पर सुहाग और अन्न का दान करने से पुण्य फलों में कई गुना वृद्धि होती है, परिवार में सुख-समृद्धि आती है और दरिद्रता का नाश होता है।
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