क्या पंजाब में फिर से हाथ मिलाएंगे बीजेपी और अकाली दल? पीएम मोदी से सुखबीर बादल की मुलाकात के बाद 2027 चुनाव से पहले बदला सियासी माहौल, जानें अंदर की बात

पंजाब में वर्ष 2027 में होने वाले विधानसभा चुनावों में अभी समय बाकी है, लेकिन राज्य का राजनीतिक तापमान अभी से तेजी से चढ़ने लगा है। राजधानी नई दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक इस समय सबसे बड़ी चर्चा इस बात की है कि क्या पंजाब में दो दशकों से अधिक समय तक सहयोगी रहे शिरोमणि अकाली दल (SAD) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) एक बार फिर एक साथ चुनाव मैदान में उतर सकते हैं? इस चर्चा को उस वक्त सबसे अधिक हवा मिली जब संसद भवन परिसर में शिरोमणि अकाली दल के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने अचानक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

सितंबर 2020 में केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के विरोध में अकाली दल द्वारा एनडीए (NDA) गठबंधन छोड़ने के बाद, पीएम मोदी और सुखबीर सिंह बादल के बीच यह पहली महत्वपूर्ण सार्वजनिक व प्रत्यक्ष मुलाकात मानी जा रही है। यद्यपि दोनों ही पक्षों की ओर से आधिकारिक तौर पर इसे पंजाब के जनहित से जुड़े मुद्दों पर हुई सामान्य वार्ता बताया गया, लेकिन इसके तुरंत बाद सुखबीर सिंह बादल द्वारा केंद्र सरकार के महिला आरक्षण और परिसीमन (Delimitation) जैसे बड़े एजेंडे का समर्थन करने के फैसले ने राजनीतिक गलियारों में पुरानी बर्फ पिघलने के साफ संकेत दे दिए हैं।

अकाली दल और बीजेपी के रिश्तों का इतिहास हमेशा से पंजाब के सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों की धुरी रहा है। वर्ष 1997 से 2020 तक लगभग 24 वर्षों तक दोनों दलों ने एक मजबूत साझेदार के रूप में चुनाव लड़ा, जिसे राज्य में ‘हिंदू-सिख भाईचारे’ के प्रतीक के रूप में देखा जाता था। हालांकि, कृषि कानूनों के मुद्दे पर एनडीए से अलग होने के बाद दोनों दलों को अकेले चुनाव लड़ने के कारण भारी राजनीतिक नुकसान का सामना करना पड़ा है। 2022 के पंजाब विधानसभा चुनाव में 117 सदस्यों वाली विधानसभा में अकाली दल को मात्र 3 सीटें और बीजेपी को केवल 2 सीटें ही हासिल हो सकी थीं, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) ने 92 सीटें जीतकर एकतरफा सरकार बनाई थी। इसके बाद 2024 के लोकसभा चुनाव में भी दोनों अलग-अलग लड़े, जहां अकाली दल को केवल एक सीट (बठिंडा) मिली और बीजेपी का खाता तक नहीं खुल सका।

‘117 सीटों पर अकेले लड़ेंगे’ या अंदरखाने नया समीकरण? जानिए नेताओं और वोट बैंक का गणित

चुनावी आंकड़ों का सूक्ष्म विश्लेषण करने वाले राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में अलग-अलग लड़कर भी बीजेपी ने करीब 18-19 फीसदी और अकाली दल ने करीब 13.5 फीसदी वोट हासिल किए थे। दोनों के संयुक्त वोट शेयर को मिला दिया जाए तो यह लगभग 33 प्रतिशत बैठता है, जो पंजाब में किसी भी सत्ताधारी दल को चुनौती देने के लिए पर्याप्त है। यही वजह है कि दोनों ही पार्टियों के भीतर एक बड़ा धड़ा यह मानता है कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस को मात देने के लिए ग्रामीण सिख वोट बैंक (अकाली दल का प्रभाव) और शहरी हिंदू वोट बैंक (बीजेपी का आधार) का पुनर्मिलन वक्त की सबसे बड़ी मांग है।

दूसरी ओर, पंजाब बीजेपी के नवनियुक्त प्रदेश अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने पीएम मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात के बाद किसी भी तुरंत गठबंधन की संभावना से इनकार करते हुए कहा है कि पार्टी फिलहाल पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हालांकि, बीजेपी के भीतर पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह और पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुनील जाखड़ जैसे वरिष्ठ नेता लगातार यह वकालत करते रहे हैं कि पंजाब में शांति, सांप्रदायिक सौहार्द और राजनीतिक स्थिरता के लिए पुराने गठबंधन को पुनर्जीवित किया जाना चाहिए।

इस मुलाकात के सामने आते ही पंजाब में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी तीखे राजनीतिक हमले शुरू कर दिए हैं। आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर तंज कसते हुए लिखा कि क्या दोनों दल फिर से साथ आने की तैयारी कर रहे हैं? वहीं, विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष व कांग्रेस नेता प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि दोनों दल अकेले विस्तार करने में विफल रहे हैं, इसलिए मजबूरी में फिर से साथ आने का रास्ता तलाश रहे हैं।

शिरोमणि अकाली दल के लिए जहां अपने खोए हुए पारंपरिक पंथक और ग्रामीण वोट बैंक को वापस पाना अस्तित्व की लड़ाई बन चुका है, वहीं बीजेपी के लिए भी केवल शहरी क्षेत्रों से निकलकर पूरे पंजाब में अपनी मजबूत सरकार बनाना बिना किसी मजबूत क्षेत्रीय साथी के आसान नहीं है। ऐसे में 2027 के महासमर से पहले सुखबीर सिंह बादल और प्रधानमंत्री मोदी की यह मुलाकात इस बात का स्पष्ट संकेत दे रही है कि आने वाले महीनों में सीटों के बंटवारे और शर्तों पर सहमति बनाकर दोनों दल एक बार फिर नए सियासी अवतार में सामने आ सकते हैं।

Check Also

a16z generative ai

Hippocratic AI raises $141M to staff hospitals with clinical AI agents Story Partners with Stability …