
भारतीय थाली में अचार, पापड़ और चटनी स्वाद बढ़ाने का काम करते हैं, लेकिन डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों के लिए इनका अत्यधिक या असावधानीपूर्वक सेवन सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, यद्यपि ये खाद्य पदार्थ सीधे तौर पर हमेशा ब्लड शुगर को तुरंत नहीं बढ़ाते, लेकिन इनमें मौजूद अत्यधिक सोडियम (नमक), तेल, ट्रांस-फैट और छिपी हुई शक्कर (Sugar) डायबिटीज के साथ-साथ हृदय और किडनी की समस्याओं को तेजी से बढ़ा सकती है।
डायबिटीज में केवल ब्लड शुगर कंट्रोल करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल को भी नियंत्रित रखना पड़ता है। इस लिहाज से अचार, पापड़ और चटनी का सेवन करते समय कुछ बातों को समझना बेहद जरूरी है:
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1. अचार (Pickles) – तेल और सोडियम का संयोजन:
अचार को लंबे समय तक सुरक्षित रखने के लिए भारी मात्रा में नमक और तेल का इस्तेमाल किया जाता है। डायबिटीज के मरीजों में हाई ब्लड प्रेशर और दिल की बीमारियों का खतरा पहले से ही अधिक होता है। अत्यधिक नमक (सोडियम) बीपी बढ़ाकर किडनी पर दबाव डालता है। इसके अलावा, तेल में डूबे अचार से कैलोरी बढ़ती है, जो वजन नियंत्रण में बाधा डालती है। (बिना तेल और कम नमक वाले होममेड फर्मेंटेड अचार को बहुत सीमित मात्रा में लिया जा सकता है)।
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2. पापड़ (Papad) – हिडन साल्ट और फ्राई करने का जोखिम:
पापड़ चाहे उड़द दाल का हो, मूंग का या चावल का, इसे बनाने में पापड़ खार (सोडियम बाइकार्बोनेट) और अतिरिक्त नमक का उपयोग होता है। तला हुआ (Deep Fried) पापड़ ट्रांस-फैट और कैलोरी से भरपूर होता है, जो इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाता है। हालांकि रोस्टेड (भुना हुआ) पापड़ तेल मुक्त होता है, फिर भी इसमें मौजूद उच्च सोडियम ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए सही नहीं माना जाता।
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3. चटनी (Chutney) – मीठी बनाम हरी चटनी का अंतर:
चटनी की पौष्टिकता उसकी रेसिपी पर निर्भर करती है। हरी धनिया, पुदीना, लहसुन, हरी मिर्च और नींबू से बनी ताजा हरी चटनी डायबिटीज के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद होती है क्योंकि इसमें फाइबर और एंटी-ऑक्सीडेंट्स होते हैं। इसके विपरीत, इमली, आम या खजूर की मीठी चटनी में चीनी या गुड़ मिलाया जाता है, जो ब्लड शुगर लेवल में तुरंत स्पाइक पैदा करता है।
डायबिटीज में कैसे करें इनका सुरक्षित सेवन? एक्सपर्ट की अहम सलाह
यदि आप डायबिटीज के मरीज हैं और स्वाद के लिए अचार, पापड़ या चटनी को अपनी डाइट में शामिल करना चाहते हैं, तो न्यूट्रिशनिस्ट और डॉक्टरों के इन सुझावों का पालन करें:
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मीठी चटनी से पूरी तरह दूरी बनाएं: इमली या खजूर की मीठी चटनी के स्थान पर केवल बिना चीनी वाली पुदीना-धनिया या अलसी (Flaxseeds) की ताजा चटनी का ही सेवन करें।
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तलने के बजाय सेक कर खाएं: अगर पापड़ खाना पसंद है, तो इसे तलने (Deep Fry) के बजाय भूनकर (Roasted) खाएं और दिन में एक छोटे पापड़ से अधिक न लें।
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कम नमक वाला होममेड विकल्प चुनें: बाजार के डिब्बाबंद अचार और पापड़ में प्रिजर्वेटिव्स और सोडियम ज्यादा होता है। घर पर बने सिरके या नींबू वाले कम नमक के अचार का इस्तेमाल करें।
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पोर्शन कंट्रोल (Portion Control) रखें: अचार या पापड़ को रोजाना की डाइट का हिस्सा बनाने के बजाय कभी-कभार केवल स्वाद बदलने के लिए एक चुटकी या एक छोटा चम्मच ही लें।
डायबिटीज के मरीजों के लिए हरी चटनी सेहतमंद है, लेकिन अचार और पापड़ का सेवन अत्यधिक सावधानी और सीमित मात्रा में ही किया जाना चाहिए ताकि ब्लड प्रेशर और किडनी पर अतिरिक्त दबाव न पड़े।
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