पानी में रहने को मजबूर 5 साल का बच्चा: क्या है ‘एक्वाजेनिक अर्टिकेरिया’ और ‘इचिथियोसिस’? जानिए पानी से जुड़ी इस बेहद दुर्लभ बीमारी का सच

पानी से बाहर निकलते ही त्वचा में भयानक जलन होना या पानी के संपर्क में आते ही शरीर पर लाल चकत्ते व खुजली होना मेडिकल साइंस की दुनिया में एक अत्यंत दुर्लभ और जटिल त्वचा रोग (Rare Skin Disease) माना जाता है। इस तरह के मामलों में मुख्य रूप से दो प्रमुख चिकित्सीय स्थितियां जिम्मेदार होती हैं:

  1. एक्वाजेनिक अर्टिकेरिया (Aquagenic Urticaria / वाटर एलर्जी): यह एक ऐसी दुर्लभ स्थिति है जिसमें मरीज की त्वचा जैसे ही पानी (चाहे वह नल का पानी हो, पसीना हो, आंसू हों या बारिश का पानी) के संपर्क में आती है, उसमें तुरंत हिस्टामाइन (Histamine) का स्राव होने लगता है। इसके कारण त्वचा पर तेज जलन, लाल चकत्ते, पित्ती और असहनीय खुजली होने लगती है।

  2. इचिथियोसिस या गंभीर एरिथ्रोडर्मा (Ichthyosis / Severe Erythroderma): कुछ मामलों में बच्चों की त्वचा की ऊपरी सुरक्षात्मक परत (Skin Barrier) जन्मजात रूप से खराब होती है। पानी में रहने पर उनकी त्वचा को नमी मिलती रहती है, लेकिन जैसे ही वे पानी से बाहर आते हैं, वाष्पीकरण (Evaporation) के कारण त्वचा इतनी तेजी से सूखती है कि उसमें खिंचाव, तेज जलन और भयानक दर्द होने लगता है। ऐसे में मरीज को जलन से राहत पाने के लिए घंटों या सालों तक पानी के टब में बैठकर रहना पड़ता है।

पानी से बाहर निकलते ही या नहाने के बाद क्यों होती है तेज जलन?

चिकित्सा विज्ञान के अनुसार, इस बीमारी के पीछे मुख्य रूप से प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune System) और त्वचा के तंत्रिका तंत्र (Nerve Endings) की अति-संवेदनशीलता जिम्मेदार होती है:

  • हिस्टामाइन का अचानक रिलीज होना: जब पानी त्वचा की कोशिकाओं से टकराता है, तो शरीर इसे एक बाहरी खतरे के रूप में देखता है। इससे मस्तूल कोशिकाएं (Mast Cells) तुरंत हिस्टामाइन और अन्य रसायन छोड़ने लगती हैं, जिससे त्वचा में सूजन, जलन और खुजली शुरू हो जाती है।

  • त्वचा की नमी नियंत्रण क्षमता का खत्म होना: जिन मरीजों में जेनेटिक डिस्ऑर्डर (जैसे इचिथियोसिस) होता है, उनकी त्वचा में पानी को रोके रखने वाले प्राकृतिक तेल और प्रोटीन (Filaggrin) का अभाव होता है। हवा के संपर्क में आते ही त्वचा सूखी होकर फटने लगती है और मरीज को लगता है जैसे उसके शरीर में आग लग गई हो।

  • पानी के तापमान और पीएच (pH) का प्रभाव: ठंडा या अत्यधिक गर्म पानी त्वचा की नसों को तेजी से उत्तेजित करता है, जिससे नहाने या पानी से बाहर आने के तुरंत बाद ‘एक्वाजेनिक प्रुरिटस’ (Aquagenic Pruritus) का दौरा पड़ता है।

इस बीमारी के मुख्य लक्षण जिन्हें पहचानना है जरूरी

इस दुर्लभ स्थिति से पीड़ित मरीजों में निम्नलिखित लक्षण मुख्य रूप से देखे जाते हैं:

  1. त्वचा पर लाल चकत्ते और पित्ती: पानी के संपर्क में आने के 5 से 10 मिनट के भीतर त्वचा पर छोटे-छोटे लाल दाने या चकत्ते उभर आते हैं।

  2. असहनीय जलन और सुई चुभने जैसा अहसास: पानी से बाहर निकलते ही या पसीना आते ही शरीर पर एसिड या आग लगने जैसी तीव्र जलन महसूस होती है।

  3. त्वचा का सूखना और छिलना: पानी से बाहर आते ही त्वचा में अत्यधिक खिंचाव होता है और वह मछली की छाल (Fish Scales) की तरह छिलने लगती है।

  4. सांस लेने में तकलीफ (गंभीर मामलों में): कुछ अत्यंत गंभीर मामलों में पानी पीने या मुंह पर पानी लगाने से गले के भीतर सूजन आ जाती है, जिससे मरीज को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।

क्या इसका इलाज संभव है? (प्रबंधन और उपचार के तरीके)

चूंकि यह एक बेहद दुर्लभ और अक्सर जेनेटिक (आनुवंशिक) बीमारी होती है, इसलिए इसका कोई एक स्थायी इलाज (Permanent Cure) उपलब्ध नहीं है, लेकिन सही चिकित्सकीय देखभाल और सावधानियों से लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है:

  • एंटीहिस्टामाइन दवाएं (Antihistamines): डॉक्टर मरीज को पानी के संपर्क में आने से पहले उच्च खुराक वाली एंटीहिस्टामाइन दवाएं देते हैं ताकि शरीर में जलन पैदा करने वाले रसायनों को रोका जा सके।

  • इमोलिएंट्स और बैरियर क्रीम (Emollients & Barrier Creams): नहाने या पानी में जाने से ठीक पहले और तुरंत बाद शरीर पर गाढ़े पेट्रोलियम जेली, लिक्विड पैराफिन या मेडिकल ऑयल की मोटी परत लगाई जाती है ताकि पानी सीधे त्वचा के संपर्क में न आ सके और बाहर आने पर वाष्पीकरण न हो।

  • फोटोथेरेपी (Phototherapy/UVB Light): पराबैंगनी किरणों (UV Light) के जरिए त्वचा की अति-संवेदनशील कोशिकाओं को सुन्न या कम प्रतिक्रियाशील बनाने की कोशिश की जाती है।

  • पानी के तापमान का ध्यान: मरीज के लिए स्पंज बाथ या एक विशिष्ट तापमान (गुनगुने पानी) का उपयोग करने की सलाह दी जाती है।

यदि किसी बच्चे या वयस्क को नहाने के बाद या पानी के संपर्क में आने पर लगातार तेज जलन और खुजली की समस्या होती है, तो उसे तुरंत किसी योग्य डर्मेटोलॉजिस्ट (त्वचा रोग विशेषज्ञ) को दिखाकर विस्तृत जांच करानी चाहिए।

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