अंकारा/तेहरान। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब पूरी तरह से नियंत्रण से बाहर हो चुका है। तुर्की की राजधानी अंकारा में चल रहे नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दुनिया को स्तब्ध करने वाला एक बड़ा एलान किया है। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमिर जेलेंस्की से मुलाकात से ठीक पहले पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने ईरान को खुली चेतावनी देते हुए कहा कि बुधवार (8 जुलाई) की रात को अमेरिकी सेना ईरान के सैन्य ठिकानों पर अब तक का सबसे जोरदार और विनाशकारी हमला कर सकती है। इस बयान के बाद पूरे मिडल-ईस्ट (पश्चिम एशिया) में परमाणु युद्ध और तबाही की आशंका गहरा गई है।
‘वे सिर्फ समय बर्बाद कर रहे हैं’ — अंतरिम समझौता पूरी तरह खत्म
नाटो समिट में ट्रंप ने कड़े शब्दों में कहा, “मैं एक छोटी सी चेतावनी दे रहा हूँ। हम आज रात उन पर (ईरान पर) ऐसा जोरदार हमला करेंगे कि वे संभल नहीं पाएंगे। पिछले हमलों के बाद भी अगर ईरान अपनी हरकतों से बाज नहीं आया, तो उसे इसके बहुत गंभीर परिणाम भुगतने होंगे।” जब अमेरिकी राष्ट्रपति से दोनों देशों के बीच हुए युद्धविराम (सीजफायर) की स्थिति के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ लहजे में कहा कि मेरे हिसाब से यह अंतरिम समझौता अब पूरी तरह ‘समाप्त’ हो चुका है। हालांकि उन्होंने यह भी जोड़ा कि अमेरिकी प्रतिनिधि बातचीत की मेज पर बने रह सकते हैं, लेकिन मुझे लगता है कि वे सिर्फ अपना समय बर्बाद कर रहे हैं।
होर्मुज जलमार्ग में तनाव के बाद अमेरिका का बड़ा एक्शन
यह पूरा विवाद तब और भड़क गया जब ईरान ने सामरिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण ‘स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज’ में तीन कमर्शियल जहाजों (पोतों) पर हमला कर दिया। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने बुधवार तड़के ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को बमबारी से उड़ा दिया और साथ ही वैश्विक बाजार में ईरान के कच्चा तेल बेचने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय लाइसेंस भी रद्द कर दिए। अमेरिका के इस कड़े प्रहार से बौखलाए ईरान ने भी पलटवार करते हुए बहरीन और कुवैत में मौजूद अमेरिकी नौसेना के ठिकानों पर मिसाइलों और ड्रोनों की बरसात कर दी थी।
खामेनेई के अंतिम संस्कार के बीच सड़कों पर गूंजे ‘मुर्दाबाद’ के नारे
हैरानी की बात यह है कि दोनों महाशक्तियों के बीच यह खूनी खेल ऐसे समय में दोबारा शुरू हुआ है, जब ईरान में पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के कई दिनों से चल रहे कार्यक्रम जारी हैं। खामेनेई इसी साल 28 फरवरी को युद्ध की शुरुआत में मारे गए थे और उनका अंतिम संस्कार गुरुवार को समाप्त होने वाला है। दुनिया को उम्मीद थी कि शोक के इन दिनों में युद्ध थमेगा, लेकिन तेहरान की सड़कों पर लाखों की भीड़ ने डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के खिलाफ जमकर ‘मुर्दाबाद’ के नारे लगाए।
खामेनेई को सुपुर्द-ए-खाक किए जाने के बाद होर्मुज को फिर से खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर लगाम लगाने के लिए बातचीत बहाल होनी थी, लेकिन ट्रंप की इस नई धमकी ने सब कुछ मटियामेट कर दिया है। अमेरिकी धौंस के खिलाफ ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर कड़ा रुख अपनाते हुए लिखा— “अमेरिका की धौंसपट्टी और जबरन वसूली का दौर अब खत्म हो चुका है। इससे कोई नतीजा नहीं निकलेगा। हम किसी के आगे झुकने वाले नहीं हैं।”
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