नई दिल्ली। भारत और अफगानिस्तान के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत और दोस्ताना संबंधों को एक नया आयाम देते हुए भारत सरकार ने एक बेहद बड़ा और ऐतिहासिक एलान किया है। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नई दिल्ली में अफगानिस्तान के कृषि मंत्री मावलवी अताउल्लाह ओमारी के साथ हुई एक हाई-लेवल द्विपक्षीय बैठक में घोषणा की है कि भारत, अफगानिस्तान को उच्च गुणवत्ता वाले उन्नत बीज, आधुनिक कृषि तकनीक और शीर्ष वैज्ञानिकों की विशेषज्ञता (एक्सपर्टाइज) मुफ्त और सहयोग के रूप में उपलब्ध कराएगा। इस बड़े कदम का सीधा मकसद युद्ध और सूखे से प्रभावित अफगानिस्तान में खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना और वहां के किसानों की आय को बढ़ाना है।
कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ ‘गेहूं’ के उत्पादन पर रहेगा विशेष फोकस
द्विपक्षीय बैठक के दौरान अफगान प्रतिनिधिमंडल ने साफ किया कि गेहूं उनके देश की कृषि अर्थव्यवस्था की असली रीढ़ है, लेकिन वहां उन्नत तकनीक और बीजों की भारी किल्लत है। इस पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भरोसा दिलाया कि भारत अफगानिस्तान को उच्च गुणवत्ता वाले गेहूं, मक्का और आलू के बीज मुहैया कराएगा। इसके साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की मदद से वहां ‘बायोफोर्टिफाइड’ और ‘जलवायु-अनुकूल’ फसल की किस्में उगाई जाएंगी, जिन पर बदलते मौसम या कम पानी का कोई विपरीत असर नहीं पड़ेगा।
बूंद-बूंद पानी का होगा हिसाब: भारत सिखाएगा जल प्रबंधन के गुर
अफगानिस्तान में गहराते जल संकट और सूखे की मार को देखते हुए बैठक में आधुनिक जल प्रबंधन पर गंभीर चर्चा हुई। अफगान सरकार ने सिंचाई प्रणालियों को दुरुस्त करने और वर्षा जल संचयन (रैन वॉटर हार्वेस्टिंग) के लिए भारत से मदद मांगी थी। केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि भारत अपनी अत्याधुनिक सूक्ष्म सिंचाई तकनीक (माइक्रो इरिगेशन), फार्म पॉन्ड, चेक डैम और वाटरशेड विकास का पूरा संस्थागत अनुभव अफगानिस्तान के साथ साझा करेगा, ताकि वहां सूखे खेतों तक पानी पहुंचाया जा सके।
वैज्ञानिकों और पशु चिकित्सकों को मिलेगी स्पेशल ट्रेनिंग, बनेगा जॉइंट रोडमैप
कृषि के साथ-साथ दोनों देशों के बीच बागवानी, डेयरी, पोल्ट्री, मत्स्य पालन, पशु स्वास्थ्य, डिजिटल कृषि और सॉइल हेल्थ (मिट्टी की सेहत) प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग बढ़ाने पर अंतिम मुहर लगी है। दोनों देश मिलकर एक संयुक्त कार्य समूह (जॉइंट वर्किंग ग्रुप) का गठन करेंगे और एक पुख्ता रोडमैप तैयार करेंगे। इसके तहत अफगान वैज्ञानिकों, कृषि विस्तार कर्मियों और पशु चिकित्सकों को भारत के शीर्ष संस्थानों में विशेष ट्रेनिंग दी जाएगी। अफगान मंत्री मावलवी अताउल्लाह ओमारी ने इस संकट की घड़ी में भारत द्वारा बढ़ाए गए मदद के हाथ की जमकर सराहना की और कहा कि यह सहयोग दोनों देशों के रिश्तों में एक नया स्वर्णिम अध्याय लिखेगा।
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