चांदीपुर (ओडिशा)। भारतीय सेना की ताकत में आज एक और बेहद विनाशकारी और अचूक ब्रह्मास्त्र शामिल हो गया है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने बुधवार (8 जुलाई) को ओडिशा के चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण स्थल (ITR) से स्वदेशी ‘पिनाका लंबी दूरी के निर्देशित रॉकेट’ (Pinaka LRGR) का सफलतापूर्वक उड़ान परीक्षण पूरा कर लिया है। इस सफल परीक्षण से जहां भारतीय रक्षा गलियारे में जश्न का माहौल है, वहीं सीमा पार पाकिस्तान समेत तमाम दुश्मन देशों के खेमे में भारी खलबली मच गई है।
चीते जैसी फुर्ती और बम जैसी ताकत: पल भर में तबाह होंगे दुश्मन के बंकर
रक्षा मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, यह विशेष परीक्षण उपयोगकर्ता (भारतीय सेना) द्वारा तय की गई 60 किलोमीटर की न्यूनतम दूरी की मारक क्षमता और उसकी अचूक सटीकता को परखने के लिए किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि परीक्षण के दौरान पिनाका रॉकेट ने हवा में सारे कड़े मानकों को पूरा करते हुए, पहले से तय किए गए रास्ते का बिल्कुल सटीक तरीके से पालन किया और ‘पिन-पॉइंट’ सटीकता के साथ अपने लक्ष्य को नेस्तनाबूद कर दिया। उड़ान के दौरान रेंज में लगे आधुनिक रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और टेलीमेट्री उपकरणों ने रॉकेट के पूरे रूट पर पैनी नजर बनाए रखी थी।
गाइडेड तकनीक से लैस हुआ पिनाका; रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई
आपको बता दें कि पिनाका सिस्टम को पहले ही भारतीय सेना में मल्टी बैरल रॉकेट लॉन्चर (MBRL) के रूप में तैनात किया जा चुका है, जिसने कारगिल युद्ध में भी अपनी ताकत दिखाई थी। लेकिन अब इसके नए ‘निर्देशित’ (Guided Variant) संस्करण के आने से इसकी मारक क्षमता, सटीकता और विनाशकारी शक्ति कई गुना बढ़ गई है। अब यह रॉकेट जीपीएस और इनर्शियल नेविगेशन सिस्टम की मदद से हवा में भी अपना रास्ता बदल सकता है और दुश्मन के सैन्य ठिकानों, बंकरों, तोपखाने की पोजीशन और कमांड सेंटर्स को सीधे निशाना बनाने में सक्षम है। इस ऐतिहासिक कामयाबी पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और रक्षा सचिव व डीआरडीओ अध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने पूरी वैज्ञानिक टीम को बधाई देते हुए इसे आत्मनिर्भर भारत की एक बड़ी उपलब्धि बताया है।
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