तेहरान/अंकारा। अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा गतिरोध अब ज़ुबानी जंग से आगे बढ़कर विनाशकारी महायुद्ध की दहलीज पर पहुंच गया है। तुर्की की राजधानी अंकारा में चल रहे नाटो (NATO) शिखर सम्मेलन से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा “बुधवार आधी रात को ईरान पर भीषण हमले” की धमकी दिए जाने के बाद तेहरान ने बेहद आक्रामक और तीखा पलटवार किया है। ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के बेहद करीबी और वरिष्ठ सलाहकार अली अकबर वेलायती ने अमेरिका को सीधी चेतावनी देते हुए दो-टूक कहा है कि पश्चिम एशिया कोई राजनीतिक जुए का अड्डा नहीं है और ईरान के ‘एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस’ की उंगलियां भी इस वक्त ट्रिगर पर दबी हुई हैं।
ट्रंप की खुली धमकी— “आज रात करेंगे नेस्तनाबूद”
दरअसल, यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के साथ नाटो समिट में बैठे डोनाल्ड ट्रंप ने खुलेआम रिपोर्टर्स से कहा था, “मैं ईरान को पहले ही साफ चेतावनी दे देता हूँ कि आज रात हम उन पर ऐसा जोरदार हमला करेंगे जिसे वे भूल नहीं पाएंगे। आगे देखते हैं क्या होता है।” ट्रंप ने ईरान के साथ जून में हुए सीजफायर को भी पूरी तरह खत्म घोषित कर दिया। ट्रंप के इस बयान से पहले अमेरिकी वायुसेना ने बुधवार तड़के ही ईरान के 80 से ज्यादा ठिकानों को बमबारी से उड़ा दिया था और होर्मुज जलमार्ग में ईरान की 60 मिलिट्री बोट्स को तबाह कर दिया था।
‘अपमान के खिलाफ चुप नहीं रहेगा ईरान’— वेलायती का कड़ा रुख
डोनाल्ड ट्रंप की इस नई धमकी पर भड़के ईरानी शीर्ष नेतृत्व ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (ट्विटर) पर ताबड़तोड़ कई पोस्ट दागकर अमेरिका को दहला दिया। अली अकबर वेलायती ने लिखा, “हमने वाशिंगटन को पहले भी चेतावनी दी थी कि यह पूरा इलाका छोटे देशों या अमेरिकी नेताओं के राजनीतिक जुए की जगह नहीं है, जहाँ वे अपने फायदे के लिए गोटियां सेट करें। हमने बार-बार साबित किया है कि अमेरिका की ऐसी दुस्साहसिक हरकतों का तुरंत और भयानक जवाब दिया जाता है। ट्रंप द्वारा शांति समझौते को रद्द करना एक ज़ुबानी कबूलनामा है, जो इस पूरे क्षेत्र को फिर से महायुद्ध की आग में धकेल रहा है।”
कतर ने भी ईरान को घेरा, पूरे खाड़ी क्षेत्र में तनाव चरम पर
इस बीच, बुधवार को दोनों महाशक्तियों के बीच हुए सीधे वार-पलटवार से हालात काबू से बाहर हो गए हैं। अमेरिका की तड़के हुई बमबारी के जवाब में ईरान ने बहरीन (जहाँ अमेरिकी नौसेना का 5वां बेड़ा तैनात है) और कुवैत के अमेरिकी सैन्य अड्डों पर मिसाइलों और सुसाइड ड्रोनों की भारी बरसात कर दी, जिससे दोनों देशों में हवाई हमले के सायरन गूँज उठे। इस खूनी खेल के बीच कतर की मंत्रिपरिषद ने भी कड़ा रुख अपनाते हुए ईरान से होर्मुज जलमार्ग में अपनी “खतरनाक और आक्रामक गतिविधियां” तुरंत बंद करने की मांग की है। दरअसल, ओमान के तट के पास कतर के एक बेहद कीमती लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) वाहक जहाज पर हमला हुआ था, जिसके पीछे ईरान का हाथ होने का शक जताया जा रहा है।
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया