ममता बनर्जी की ‘कोर्ट रूम दलील’ पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर: याचिकाकर्ता को फटकार, CJI बोले— ‘यह संविधान में भरोसे का प्रतीक’

नई दिल्ली। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सुप्रीम कोर्ट में स्वयं पेश होकर दलीलें देने का मामला अब कानूनी और सियासी गलियारों में चर्चा का विषय बन गया है। जहाँ एक ओर ममता बनर्जी के इस कदम की सराहना हो रही है, वहीं दूसरी ओर अखिल भारत हिंदू महासभा ने इसे ‘संवैधानिक रूप से अनुचित’ बताते हुए अदालत में चुनौती दी थी। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका को सिरे से खारिज करते हुए याचिकाकर्ता को सख्त हिदायत दी है।

CJI की दो-टूक: ‘मामले का राजनीतिकरण न करें’

मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत की पीठ ने याचिकाकर्ता सतीश कुमार अग्रवाल की अर्जी पर सुनवाई से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी मुख्यमंत्री का स्वयं अदालत में आकर दलीलें देना संविधान के प्रति उनकी अटूट आस्था को दर्शाता है। CJI ने याचिकाकर्ता को फटकार लगाते हुए कहा:

“इसमें अनसुनी क्या बात है? यह हमारे संविधान में आस्था और भरोसे को दिखाता है। इस मामले का राजनीतिकरण न करें।”

क्या था पूरा विवाद?

पिछले सप्ताह ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के SIR (स्पेशल इंटेंसिव रिविजन) मामले में व्यक्तिगत रूप से सुप्रीम कोर्ट में पेश हुई थीं। उन्होंने चुनाव आयोग द्वारा माइक्रो ऑब्जर्वर की तैनाती के खिलाफ खुद जिरह की थी। हिंदू महासभा के उपाध्यक्ष ने अपनी याचिका में निम्नलिखित तर्क दिए थे:

  • संवैधानिक रूप से अनुचित: एक पदासीन मुख्यमंत्री का व्यक्तिगत रूप से पेश होना शक्तियों के पृथक्करण के सिद्धांत के खिलाफ है।

  • संस्थागत दबाव: मुख्यमंत्री की मौजूदगी से अदालत पर ‘प्रतीकात्मक दबाव’ पैदा हो सकता है।

  • परंपरा के विपरीत: जब राज्य का प्रतिनिधित्व वरिष्ठ वकील कर रहे हैं, तो मुख्यमंत्री की उपस्थिति न्यायिक परंपराओं के विरुद्ध है।

SIR मामला: ममता और चुनाव आयोग के बीच क्या हुआ?

सुनवाई के दौरान यह बात सामने आई कि चुनाव आयोग ने बंगाल में अधिकारियों की कमी का हवाला देते हुए माइक्रो ऑब्जर्वर तैनात किए थे। ममता बनर्जी ने खुद कोर्ट को आश्वस्त किया कि राज्य सरकार सक्षम अधिकारियों को यह जिम्मेदारी देने के लिए तैयार है।

  • 8,505 अधिकारियों की सूची: मुख्यमंत्री ने कोर्ट को बताया कि SIR प्रक्रिया के लिए राज्य ने 8,505 अधिकारियों का विवरण तैयार कर लिया है।

  • विवाद सुलझा: 7 फरवरी को राज्य सरकार ने चुनाव आयोग के वकीलों को सूचित किया कि वे जनशक्ति उपलब्ध करा रहे हैं। कोर्ट ने अब इस विवरण को रिकॉर्ड पर ले लिया है।

मुख्यमंत्री का ‘कोर्ट रूम’ रिकॉर्ड

सुप्रीम कोर्ट ने 4 फरवरी को ममता बनर्जी की उपस्थिति और उनके द्वारा दी गई दलीलों को आधिकारिक रिकॉर्ड का हिस्सा बनाया। अदालत ने माना कि मुख्यमंत्री ने इस मामले में राज्य की ओर से जिम्मेदारी लेने का जो संकल्प दिखाया, वह प्रक्रिया को तेज करने में सहायक रहा।

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