
आज की मॉडर्न और भागदौड़ भरी जिंदगी में स्ट्रेस (तनाव) हर दूसरे व्यक्ति की समस्या बन चुका है। जब भी शरीर में स्ट्रेस बढ़ता है, तो कॉर्टिसोल (Cortisol) नामक स्ट्रेस हार्मोन का लेवल तेजी से बढ़ने लगता है। यह बढ़ा हुआ कॉर्टिसोल सीधे तौर पर हमारे मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है, जिससे शरीर में फैट स्टोरेज (चर्बी) बढ़ने लगती है और मोटापा तेजी से पैर पसारने लगता है।
अक्सर लोग वजन घटाने और स्ट्रेस कम करने के लिए जिम, क्रैश डाइट या बड़ी-बड़ी स्ट्रेटजी तो बना लेते हैं, लेकिन रोजमर्रा की उन छोटी और बुनियादी आदतों को भूल जाते हैं जो सबसे ज्यादा मायने रखती हैं। डॉक्टर तरंग अरोड़ा ने अपने अनुभव के आधार पर डेली रूटीन के ऐसे 4 बेहद सिंपल काम बताए हैं, जिन्हें अगर आप हर रोज फॉलो करना शुरू कर दें, तो बिना किसी कड़े नियम के आपका स्ट्रेस भी छूमंतर हो जाएगा और मोटापा भी कंट्रोल में आ जाएगा।
डॉक्टर तरंग अरोड़ा के वो 4 लाइफ-चेंजिंग टिप्स:
1. नींद को न करें इग्नोर (8 घंटे की गहरी नींद है जरूरी)
आजकल वर्क-लाइफ बैलेंस बनाने या देर रात तक स्क्रीन (मोबाइल/लैपटॉप) स्क्रॉल करने के चक्कर में लोग अपनी नींद से समझौता कर लेते हैं।
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असर: जब आप हर रात पूरे 8 घंटे की गहरी नींद लेते हैं, तो आपका शरीर और दिमाग दोनों पूरी तरह रिलैक्स (रिपेयर) होते हैं। वहीं, खराब या अधूरी नींद सीधे तौर पर कॉर्टिसोल हार्मोन को बढ़ाती है, जिससे पेट के आसपास फैट जमा होने लगता है।
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डॉक्टर की सलाह: हर रात सोने के लिए एक साफ-सुथरा, हल्का ठंडा और पूरी तरह से अंधेरा कमरा (Dark Room) तैयार करें। यह ‘स्लीप हाइजीन’ आपके स्ट्रेस को तेजी से कम करेगी।
2. अकेलेपन का शिकार न हों (सोशल कनेक्शन बनाए रखें)
अक्सर देखा जाता है कि जब लोग मानसिक तनाव में होते हैं, तो वे खुद को कमरे में बंद कर लेते हैं या अकेले रहना शुरू कर देते हैं।
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असर: अकेलापन स्ट्रेस को तो बढ़ाता ही है, साथ ही यह आपको ‘इमोशनल ईटिंग’ (Emotional Eating) की तरफ धकेलता है। तनाव में इंसान बिना भूख के भी मीठा, जंक फूड या ज्यादा कैलोरी वाली चीजें खाने लगता है, जिससे वजन तेजी से बढ़ता है।
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डॉक्टर की सलाह: जब भी आप तनाव या उदासी महसूस करें, अकेले बैठने के बजाय अपने परिवार, करीबियों और दोस्तों के बीच समय बिताएं। उनसे खुलकर बातें करें और अपनी परेशानियां साझा करें।
3. मूवमेंट करना न छोड़ें (जिम नहीं तो वॉक ही सही)
अगर आपके पास हर रोज जिम जाने, योगा क्लास करने या वर्कआउट करने का समय नहीं है, तो बिल्कुल भी परेशान न हों।
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असर: डॉक्टर तरंग अरोड़ा के मुताबिक, हैवी वर्कआउट से ज्यादा जरूरी है शरीर में लगातार ‘मूवमेंट’ (गतिविधि) का होना। लगातार एक जगह बैठे रहने से शरीर में आलस आता है और एनर्जी बर्न नहीं होती।
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डॉक्टर की सलाह: जब भी मौका मिले— जैसे ऑफिस में काम के बीच, फोन पर बात करते समय या खाना खाने के बाद— थोड़ी देर वॉक (सैर) जरूर करें। घर या ऑफिस की सीढ़ियों का इस्तेमाल करें। यह छोटी-छोटी मूवमेंट आपकी कैलोरी बर्न करने में बहुत मदद करेगी।
4. डायफ्रैमेटिक ब्रीदिंग (Diaphragmatic Breathing)
सांस लेने की यह खास तकनीक केवल सुबह या शाम के वक्त ही करनी है, ऐसा बिल्कुल जरूरी नहीं है। आप पूरे दिन में किसी भी समय, कहीं भी बैठे-बैठे इसकी प्रैक्टिस कर सकते हैं।
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असर: जब आप गहरी और पेट से सांस लेते हैं (डायफ्रैमेटिक ब्रीदिंग), तो यह आपके शरीर के पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम (Parasympathetic System) को एक्टिवेट कर देता है। यह सिस्टम एक्टिव होते ही दिमाग को शांत होने का सिग्नल मिलता है, जिससे बेवजह लगने वाली भूख कंट्रोल होती है और स्ट्रेस लेवल तुरंत नीचे आ जाता है।
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