
ज्योतिष शास्त्र में सूर्य के नक्षत्र परिवर्तन को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। आगामी 25 मई को सूर्य देव रोहिणी नक्षत्र में गोचर (Surya Gochar 2026) करने जा रहे हैं। रोहिणी वृषभ राशि का नक्षत्र है, जिसके स्वामी चंद्रमा हैं। सूर्य अभी शुक्र की राशि वृषभ में ही विराजमान हैं और अब वे चंद्रमा के नक्षत्र रोहिणी में प्रवेश करेंगे।
विशेष बात यह है कि यह खगोलीय और ज्योतिषीय घटना इस बार अधिकमास (मलमास) के दौरान हो रही है। सूर्य के रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करते ही ‘नौतपा’ की शुरुआत हो जाएगी। नौतपा का अर्थ है वे 9 दिन जिसमें धरती सबसे अधिक तपती है और इस अवधि में भीषण गर्मी पड़ती है। अधिकमास में सूर्य का यह गोचर कई राशियों के लिए भाग्यशाली योग लेकर आ रहा है। इसके बाद अगले महीने (जून में) सूर्य मिथुन राशि और मृगशिरा नक्षत्र में गोचर कर जाएंगे।
नौतपा और अधिकमास में इन 3 राशियों को मिलेगा बंपर लाभ
सूर्य के इस नक्षत्र परिवर्तन से तीन विशिष्ट राशियों के जातकों को करियर, धन और भाग्य का भरपूर साथ मिलने वाला है:
1. सिंह राशि (Leo)
सिंह राशि के जातकों के लिए यह गोचर बेहद शुभ और अच्छे योग बनाने वाला साबित होगा।
रुके हुए काम होंगे पूरे: भाग्य का पूरा साथ मिलने से आपके वे काम जो पिछले लंबे समय से किसी न किसी वजह से अटके हुए थे, वे अब बिना किसी बाधा के पूरे हो जाएंगे।
आर्थिक मजबूती: इस अवधि में आपके धन आगमन के नए रास्ते खुलेंगे, जिससे आपका बैंक बैलेंस काफी अच्छा और मजबूत हो जाएगा।
2. धनु राशि (Sagittarius)
धनु राशि के जातकों के लिए भी यह समय काफी अनुकूल रहने वाला है।
निवेश से लाभ: इस दौरान किया गया निवेश आपको एक के बाद एक लगातार बेहतरीन लाभ देगा।
संपत्ति और वाहन सुख: आपके लिए मकान, भूमि या नया वाहन खरीदने के प्रबल योग बन रहे हैं। इस दौरान दान-पुण्य करना आपके लिए विशेष रूप से उत्तम रहेगा।
3. वृष राशि (Taurus)
चूंकि सूर्य का गोचर आपकी ही राशि (वृषभ) के नक्षत्र में हो रहा है, इसलिए यह समय आपके लिए सर्वोत्तम रहेगा।
दोतरफा धन लाभ: आपको किसी एक नहीं, बल्कि दो अलग-अलग योजनाओं या माध्यमों के जरिए आकस्मिक धन लाभ हो सकता है।
सलाह: इस समय अपने कार्यक्षेत्र में थोड़ा धैर्य बनाए रखें और समय पर सही फैसले लें, ताकि आप इस गोचर का अधिक से अधिक आर्थिक लाभ उठा सकें।
अधिकमास और नौतपा के दौरान क्या करें और क्या न करें?
चूंकि यह गोचर अधिकमास में हो रहा है, इसलिए इस दौरान किए गए दान और पुण्य का फल कई गुना अधिक बढ़ जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस अवधि के लिए कुछ कड़े नियम और निर्देश दिए गए हैं:
क्या करें (इन कार्यों की है अनुमति):
दान का महत्व: नौतपा की भीषण गर्मी को देखते हुए जरूरतमंदों को छाता, ठंडा पानी, घड़ा और भोजन का दान करना चाहिए। इसके अलावा सूर्य देव से जुड़ी वस्तुओं का दान भी कल्याणकारी माना जाता है।
धार्मिक कार्य: अधिकमास में तीर्थ स्नान, देव-दर्शन, व्रत-उपवास, सीमन्तोन्नयन, ऋतुशान्ति, पुंसवन संस्कार और नवजात पुत्र आदि का मुख-दर्शन किया जा सकता है। इसके अलावा इस मास में राज्याभिषेक भी किया जा सकता है।
क्या न करें (इन कार्यों पर है पूरी तरह निषेध):
अधिकमास (मलमास) के दौरान सभी प्रकार के मांगलिक और नए कार्यों की शुरुआत वर्जित मानी गई है। इस दौरान निम्नलिखित कार्य भूलकर भी न करें:
नए व्रत का आरंभ (व्रतारम्भ), मूर्ति या मंदिर की प्रतिष्ठा, चूडाकर्म (मुंडन), उपनयन (जनेऊ संस्कार), मन्त्रोपासना और विवाह।
नए घर का निर्माण (नूतनगृह-निर्माण), गृह-प्रवेश, गौ आदि पशुओं का नया ग्रहण, नए आश्रम में प्रवेश, तीर्थयात्रा, अभिषेक-कर्म, वृषोत्सर्ग, कन्या का द्विरागमन (गौना) तथा किसी भी प्रकार के यज्ञ-यागादि का आयोजन मलमास में पूरी तरह निषेध है।
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