नई दिल्ली ब्यूरो: किसी भी कॉरपोरेट ऑफिस या व्यावसायिक स्थल का वास्तु सीधे तौर पर उस बिजनेस की आर्थिक उन्नति, कर्मचारियों की उत्पादकता और मुनाफे (Income) से जुड़ा होता है। वास्तु शास्त्र के अनुसार, यदि ऑफिस में पंचतत्वों और दिशाओं का सही संतुलन न हो, तो भारी निवेश के बाद भी मनमुताबिक लाभ नहीं मिलता। इसके विपरीत, सही दिशा में बना ऑफिस सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है जिससे आय के नए स्रोत खुलते हैं।
यदि आप भी एक नया कॉरपोरेट ऑफिस बनवाने जा रहे हैं या मौजूदा ऑफिस का रेनोवेशन कर रहे हैं, तो आमदनी बढ़ाने के लिए निम्नलिखित वास्तु नियमों और सावधानियों का विशेष ध्यान रखें:
1. रिसेप्शन एरिया (Reception Area) की सही दिशा
किसी भी कॉरपोरेट ऑफिस का रिसेप्शन वह स्थान होता है, जहाँ कोई भी बाहरी क्लाइंट, कस्टमर या विजिटर सबसे पहले कदम रखता है। यहीं से पूरे ऑफिस में ऊर्जा का प्रवाह (Energy Flow) तय होता है।
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वास्तु नियम: ऑफिस का रिसेप्शन हमेशा उत्तर-पूर्व (North-East / ईशान कोण) दिशा में होना चाहिए। यह दिशा सकारात्मक और नए विचारों की मानी जाती है, जिससे आने वाले क्लाइंट्स पर आपके बिजनेस का अच्छा प्रभाव पड़ता है।
2. मुख्य द्वार और शौचालय (Main Gate & Toilet) संबंधी बड़ी गलती
कॉरपोरेट ऑफिस के लिए उत्तर मुखी (North Facing) प्रवेश द्वार को कुबेर की दिशा होने के कारण सबसे उत्तम माना जाता है। लेकिन प्रवेश द्वार के पास की गई एक गलती पूरे बिजनेस को नुकसान पहुंचा सकती है।
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सावधानी: ऑफिस के मुख्य द्वार से प्रवेश करते ही ठीक सामने या बिल्कुल बगल में शौचालय (Toilet) कभी नहीं बनवाना चाहिए। मुख्य द्वार से सकारात्मक ऊर्जा भीतर आती है, और वहाँ शौचालय होने से वह ऊर्जा दूषित हो जाती है, जिससे आर्थिक हानि के योग बनते हैं।
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वास्तु उपाय (बने-बनाए ऑफिस के लिए): यदि ऑफिस पहले से बना हुआ है और शौचालय को हटाना संभव नहीं है, तो शौचालय के दरवाजे के बाहर एक सुंदर कंसोल (Console) या कैबिनेट (Cabinet) रख दें, ताकि प्रवेश करते ही शौचालय पर सीधी नजर न पड़े। इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव काफी हद तक कम हो जाता है।
3. डायरेक्टर और चेयरमैन का केबिन (Director’s Cabin)
ऑफिस के मार्गदर्शक यानी डायरेक्टर या चेयरमैन का बैठने का स्थान कंपनी के बड़े निर्णयों और वित्तीय स्थिरता को प्रभावित करता है।
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सावधानी: डायरेक्टर का केबिन कभी भी ऑफिस के बिल्कुल केंद्र यानी ब्रह्मस्थान (Center point) में नहीं होना चाहिए। वास्तु के अनुसार केंद्र का स्थान खाली और खुला होना चाहिए। इसके अलावा, केबिन को प्रवेश द्वार के ठीक पास या बिल्कुल आखिरी कोने में बनाने से भी बचना चाहिए।
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बैठने की सही स्थिति: डायरेक्टर का केबिन ब्रह्मस्थान से थोड़ा हटाकर दक्षिण-पश्चिम (South-West) या पश्चिम में इस तरह बनाना चाहिए कि बैठते समय उनका मुख उत्तर-पूर्व (North-East) या उत्तर दिशा की तरफ हो। इससे निर्णय लेने की क्षमता मजबूत होती है।
4. मीटिंग एरिया और कॉन्फ्रेंस रूम (Meeting & Conference Area)
ऑफिस का वह स्थान जहाँ नए प्रोजेक्ट्स, डील्स और बिजनेस आइडियाज पर चर्चा होती है, उसका ऊर्जारवान होना बेहद जरूरी है ताकि डील्स फाइनल हो सकें।
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वास्तु नियम: कॉरपोरेट ऑफिस का मीटिंग एरिया या कॉन्फ्रेंस रूम हमेशा पश्चिम (West), दक्षिण-पश्चिम (South-West) या उत्तर-पश्चिम (North-West / वायव्य कोण) दिशा में बनाना चाहिए। इन दिशाओं में की गई व्यावसायिक बैठकों से सकारात्मक परिणाम (Positive Results) निकलते हैं और व्यापारिक संबंध लंबे समय तक मजबूत बने रहते हैं।
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