
मौसम में बदलाव और हवा में नमी बढ़ने के साथ ही श्वसन तंत्र को प्रभावित करने वाले वायरस सक्रिय हो जाते हैं। इनमें इन्फ्लूएंजा-ए वायरस का स्ट्रेन ‘H1N1’ (जिसे आमतौर पर स्वाइन फ्लू के नाम से भी जाना जाता है) सबसे ज्यादा संक्रामक और संवेदनशील माना जाता है। H1N1 वायरस सीधे तौर पर इंसान के ऊपरी और निचले श्वसन मार्ग (Respiratory Tract) पर हमला करता है। हालांकि स्वस्थ और मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले अधिकांश लोग समय पर सही देखभाल से इससे पूरी तरह उबर जाते हैं, लेकिन कई मामलों में मरीजों द्वारा की गई छोटी-छोटी गलतियां संक्रमण को गंभीर और जानलेवा स्थिति तक पहुंचा देती हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, H1N1 की पुष्टि होने या इसके लक्षण दिखने पर मरीज को अपनी जीवनशैली, दवाओं और खान-पान में अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए।
1. सामान्य मौसमी जुकाम समझकर जांच और इलाज में देरी करना
H1N1 संक्रमण की शुरुआत आमतौर पर तेज बुखार, गले में खराश, सूखी खांसी, नाक बहना, सिरदर्द और बदन दर्द के साथ होती है। चूंकि ये लक्षण सामान्य वायरल फीवर या कॉमन कोल्ड जैसे ही लगते हैं, इसलिए अधिकांश लोग इसे मामूली मौसमी फ्लू समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। यह H1N1 के मामले में की जाने वाली सबसे बड़ी और घातक गलती है। सामान्य फ्लू की तुलना में H1N1 फेफड़ों में बहुत तेजी से फैलता है। संक्रमण के शुरुआती 24 से 48 घंटे बेहद महत्वपूर्ण (Golden Period) माने जाते हैं। यदि इस दौरान डॉक्टर से परामर्श लेकर एंटीवायरल दवाएं शुरू नहीं की जाती हैं, तो वायरस फेफड़ों के वायुकोशों (Alveoli) को नुकसान पहुंचाना शुरू कर देता है, जिससे ब्रोंकाइटिस और वायरल निमोनिया का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।
2. बिना डॉक्टर की सलाह के एंटीबायोटिक्स और एस्पिरिन का सेवन
भारतीय घरों में सर्दी-खांसी और बुखार होते ही मेडिकल स्टोर से खुद जाकर एंटीबायोटिक्स या पेनकिलर खरीदकर खाने की बहुत पुरानी और खतरनाक आदत है। H1N1 पूरी तरह से एक वायरल संक्रमण है, जबकि एंटीबायोटिक्स दवाएं केवल बैक्टीरिया को मारने के लिए बनाई गई हैं। किसी भी वायरल फ्लू में एंटीबायोटिक लेने से वायरस पर कोई असर नहीं होता, बल्कि यह आंतों के अच्छे बैक्टीरिया को नष्ट कर देती है और मरीज में एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस का खतरा पैदा करती है। इसके अलावा, वायरल संक्रमण के दौरान बिना डॉक्टर की पर्ची के ‘एस्पिरिन’ (Aspirin) जैसी दवाएं लेना बच्चों और किशोरों में रेयेस सिंड्रोम (Reye’s Syndrome) जैसी जानलेवा बीमारी का कारण बन सकता है, जिससे लिवर और मस्तिष्क में गंभीर सूजन आ जाती है। बुखार और दर्द के लिए केवल डॉक्टर द्वारा सुझाई गई पैरासिटामोल जैसी सुरक्षित दवाएं ही तय खुराक में लेनी चाहिए।
3. आइसोलेशन से बचना और परिजनों व समाज के बीच खुलेआम घूमना
H1N1 एक अत्यधिक संक्रामक ड्रॉपलेट इंफेक्शन (Droplet Infection) है। जब संक्रमित व्यक्ति खांसता, छींकता या बातचीत करता है, तो हवा में सूक्ष्म वायरस कण फैल जाते हैं जो 6 फीट की दूरी तक किसी भी व्यक्ति को संक्रमित कर सकते हैं। कई लोग बुखार कम होते ही बाहर निकलना, ऑफिस जाना या घर के अन्य सदस्यों के साथ बिना मास्क के घुलना-मिलना शुरू कर देते हैं। यह लापरवाही घर के बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं और छोटे बच्चों के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। लक्षण दिखने के कम से कम 7 दिन तक या बुखार पूरी तरह ठीक होने के 24 घंटे बाद तक मरीज को एक अलग, हवादार कमरे में पूरी तरह आइसोलेट रहना चाहिए और हमेशा ट्रिपल-लेयर सर्जिकल मास्क या N-95 मास्क का उपयोग करना चाहिए।
4. शरीर में पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स की कमी (डिहाइड्रेशन) की अनदेखी
तेज बुखार, लगातार पसीना आने, तेजी से सांस लेने और कई बार उल्टी या दस्त के कारण H1N1 के मरीजों के शरीर से तरल पदार्थ बहुत तेजी से कम होते हैं। गले में दर्द और भूख न लगने के कारण मरीज पानी और खाना-पीना कम कर देते हैं। शरीर में पानी की कमी (Dehydration) होने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, बलगम गाढ़ा होकर श्वसन नलियों में चिपकने लगता है और रक्तचाप गिरने का खतरा रहता है। इससे उबरने के लिए मरीज को दिनभर में भरपूर मात्रा में गुनगुना पानी, ओआरएस (ORS) का घोल, नारियल पानी, ताजा सब्जियों का गर्म सूप और हर्बल काढ़ा लेते रहना चाहिए ताकि शरीर के टॉक्सिन्स बाहर निकल सकें और फेफड़ों का बलगम पतला होकर आसानी से बाहर आ सके।
5. सांस फूलने और ऑक्सीजन की कमी जैसे ‘रेड फ्लैग’ संकेतों को दबाना
H1N1 के दौरान सबसे गंभीर स्थिति तब उत्पन्न होती है जब संक्रमण फेफड़ों के निचले हिस्से में फैलकर ‘एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम’ (ARDS) का रूप ले लेता है। कई मरीज तब तक अस्पताल नहीं जाते जब तक स्थिति पूरी तरह नियंत्रण से बाहर न हो जाए। यदि आपको या मरीज को नीचे दिए गए चेतावनी संकेत दिखाई दें, तो इसे घर पर संभालने की गलती बिल्कुल न करें और तुरंत नजदीकी अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जाएं:
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सांस लेने में कठिनाई या तेजी से सांस चलना।
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सीने में लगातार तेज दर्द या भारीपन का अहसास होना।
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पल्स ऑक्सीमीटर पर ऑक्सीजन सेचुरेशन (SpO2) का 94% से नीचे गिरना।
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होठों, चेहरे या नाखूनों का नीला पड़ना (Cyanosis)।
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अत्यधिक चक्कर आना, भ्रम की स्थिति (Confusion) या बेहोशी जैसा लगना।
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बुखार एक बार उतरने के बाद अचानक बहुत तेज खांसी और सांस फूलने के साथ दोबारा लौटना।
6. हाई-रिस्क ग्रुप्स और पहले से मौजूद बीमारियों की अनदेखी करना
यदि H1N1 से संक्रमित व्यक्ति पहले से किसी गंभीर बीमारी जैसे डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, अस्थमा, सीओपीडी (COPD), क्रॉनिक किडनी रोग, हृदय रोग या कैंसर से पीड़ित है, तो उसके लिए यह संक्रमण सामान्य लोगों की तुलना में दस गुना अधिक जोखिम भरा होता है। इसके अलावा गर्भवती महिलाएं, 65 वर्ष से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिक और 5 वर्ष से छोटे बच्चे ‘हाई-रिस्क कैटेगरी’ में आते हैं। ऐसे मरीजों में लक्षण दिखते ही पहले दिन से विशेष चिकित्सकीय निगरानी और डॉक्टर की सलाह पर ओसेल्टामिविर (Oseltamivir/Tamiflu) जैसी एंटीवायरल थेरेपी शुरू करना अनिवार्य होता है। इन मरीजों को घर पर सामान्य घरेलू नुस्खों के भरोसे छोड़ना जान जोखिम में डालने जैसा है।
7. ठीक होते ही तुरंत भारी कामकाज या जिम शुरू कर देना
वायरल इन्फ्लूएंजा शरीर की पूरी ऊर्जा और मांसपेशियों की ताकत को निचोड़ देता है। बुखार उतरने और खांसी कम होने का मतलब यह नहीं है कि आपके फेफड़े और हृदय पूरी तरह से ठीक हो चुके हैं। कई लोग बुखार उतरते ही भारी एक्सरसाइज, जिमिंग, दौड़ना या अत्यधिक मानसिक व शारीरिक तनाव वाला काम शुरू कर देते हैं। इससे ‘पोस्ट-वायरल फटीग’ (Post-Viral Fatigue) और मायोकार्डिटिस (हृदय की मांसपेशियों में सूजन) का खतरा बढ़ जाता है। संक्रमण से उबरने के बाद शरीर को पूरी तरह सामान्य होने में कम से कम 2 से 3 सप्ताह का समय लगता है। इस दौरान 8 से 9 घंटे की भरपूर नींद लें, पौष्टिक व सुपाच्य प्रोटीन युक्त आहार खाएं और भारी शारीरिक श्रम से पूरी तरह बचें।
H1N1 से सुरक्षित रिकवरी के लिए क्या करें?
H1N1 से बचाव और सुरक्षित रिकवरी के लिए स्वच्छता का कड़ाई से पालन करें। बार-बार साबुन-पानी से 20 सेकंड तक हाथ धोएं या एल्कोहल-बेस्ड सैनिटाइजर का उपयोग करें। खांसते और छींकते समय डिस्पोजेबल टिशू का प्रयोग करें और उसे बंद डस्टबिन में फेंकें। गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे करें और दिन में दो बार भाप (Steam Inhalation) लें। वार्षिक इन्फ्लूएंजा वैक्सीन (Flu Shot) लगवाकर इस संक्रमण की गंभीरता से खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रखें।
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