
उत्तर प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने और ग्रामीण व शहरी क्षेत्रों में स्वरोजगार को जमीनी स्तर पर बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने एक ऐतिहासिक योजना लागू की है। राज्य सरकार ने पारंपरिक दस्तकारों के साथ-साथ आधुनिक तकनीकी हुनरमंदों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना-2’ का दायरा व्यापक कर दिया है। इस योजना के तहत अब मोबाइल मैकेनिक, बिजली मिस्त्री (इलेक्ट्रीशियन) और प्लंबर समेत कुल 14 ट्रेड के कारीगरों को खुद का व्यवसाय, वर्कशॉप या सर्विस सेंटर शुरू करने के लिए 10 लाख रुपये तक का बिना गारंटी और बिना ब्याज का ऋण (Interest-Free Loan) उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके साथ ही योगी सरकार ने लाभार्थियों के प्रोजेक्ट की लागत पर 15 प्रतिशत तक की मार्जिन मनी सब्सिडी देने और 15,000 रुपये तक की आधुनिक टूलकिट मुफ्त देने की भी व्यवस्था की है।
इन 14 ट्रेड के कारीगरों और तकनीशियनों को मिलेगा सीधा लाभ
पहले विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत केवल पारंपरिक जातिगत या पैतृक व्यवसायों से जुड़े ग्रामीण और शहरी कारीगरों को ही शामिल किया गया था। लेकिन बदलते समय और बाजार में आधुनिक सेवाओं की बढ़ती मांग को देखते हुए योगी सरकार ने इसमें तकनीकी और सर्विस सेक्टर के नए ट्रेड्स को भी जोड़ दिया है।
अब इस महा-योजना के अंतर्गत आने वाले सभी 14 ट्रेड इस प्रकार हैं:
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मोबाइल रिपेयरिंग मैकेनिक (Mobile Technician): स्मार्टफोन, टैबलेट और गैजेट्स रिपेयरिंग का काम करने वाले युवा।
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बिजली मिस्त्री (Electrician): घरेलू व औद्योगिक वायरिंग और इलेक्ट्रिकल उपकरणों की मरम्मत करने वाले कारीगर।
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प्लंबर (Plumber): पाइप फिटिंग, सेनेटरी और वॉटर सप्लाई का काम करने वाले प्लंबर।
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बढ़ई (Carpenter): लकड़ी का फर्नीचर और नक्काशी का काम करने वाले कारीगर।
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दर्जी (Tailor): सिलाई, बुनाई और परिधान डिजाइनिंग से जुड़े दस्तकार।
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कुम्हार (Potter): मिट्टी के बर्तन, दीये और सजावटी सामग्री बनाने वाले शिल्पकार।
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लोहार (Blacksmith): लोहे के औजार, ग्रिल और कृषि उपकरण बनाने वाले कारीगर।
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टोकरी बुनकर (Basket Weaver): बांस, बेंत और घास-फूस से टोकरी व सजावटी सामान बनाने वाले कारीगर।
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सुनार (Goldsmith): पारंपरिक आभूषण निर्माण और ज्वेलरी रिपेयरिंग से जुड़े कारीगर।
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नाई (Barber): हेयर कटिंग सैलून और ग्रूमिंग सर्विस से जुड़े युवा।
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हलवाई (Confectioner): पारंपरिक मिठाई, नमकीन और बेकरी निर्माण से जुड़े कारीगर।
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मोची (Cobbler): जूता-चप्पल निर्माण और लेदर रिपेयरिंग का काम करने वाले चर्मकार।
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राजमिस्त्री (Mason): भवन निर्माण, प्लास्टर और टाइल्स लगाने वाले कुशल मिस्त्री।
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धोबी (Washerman): कपड़े धोने, ड्राई क्लीनिंग और लॉन्ड्री सेवा प्रदाता।
बिना गारंटी 10 लाख का ब्याज मुक्त लोन और मार्जिन मनी सब्सिडी की सुविधा
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें युवाओं और छोटे कारीगरों को बैंकों के चक्कर लगाने या जमीन-मकान गिरवी रखने की कोई आवश्यकता नहीं होगी।
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शून्य ब्याज दर: प्रोजेक्ट लागत के आधार पर स्वीकृत होने वाले 10 लाख रुपये तक के ऋण पर सरकार शत-प्रतिशत ब्याज सब्सिडी वहन करेगी, यानी लाभार्थी को केवल मूल रकम ही आसान किस्तों में लौटानी होगी।
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बिना किसी कोलैटरल/गारंटी: योजना के तहत बैंक किसी भी लाभार्थी से थर्ड-पार्टी गारंटी या अचल संपत्ति की मांग नहीं करेंगे।
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मार्जिन मनी सब्सिडी: आमतौर पर किसी भी बैंक लोन के लिए आवेदक को प्रोजेक्ट लागत का 15 से 20 प्रतिशत खुद लगाना पड़ता है। योगी सरकार ने इस बाधा को समाप्त करते हुए प्रोजेक्ट लागत की 10 से 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी को सीधे सरकारी सब्सिडी (Grant) के रूप में समायोजित करने का फैसला किया है। इससे गरीब परिवारों के हुनरमंद युवाओं को बिना अपनी जेब से भारी पूंजी लगाए नया उद्यम शुरू करने का मौका मिलेगा।
10 दिन का मुफ्त कौशल प्रशिक्षण और 15,000 रुपये की एडवांस्ड टूलकिट
योजना के तहत लोन देने से पहले सभी चयनित लाभार्थियों की कार्यक्षमता और व्यावसायिक दक्षता बढ़ाने के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किया जाएगा। उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय (MSME Department) द्वारा मान्यता प्राप्त तकनीकी व प्रशिक्षण संस्थानों का चयन किया जा रहा है।
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10 दिवसीय आवासीय/गैर-आवासीय प्रशिक्षण: सभी कारीगरों को उनके ट्रेड के अनुसार आधुनिक मशीनों के संचालन, डिजिटल पेमेंट (UPI/क्यूआर कोड), बहीखाता प्रबंधन और ग्राहकों से बेहतर संवाद का 10 दिन का निःशुल्क प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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15,000 रुपये तक की फ्री टूलकिट: ट्रेनिंग सफलतापूर्वक पूरी करने के बाद संबंधित कारीगर को उसके ट्रेड से जुड़ी आधुनिक टूलकिट (जैसे—मोबाइल रिपेयरिंग मशीन किट, इलेक्ट्रीशियन टेस्टिंग किट, आधुनिक सिलाई मशीन, इलेक्ट्रॉनिक चाक आदि) पूरी तरह मुफ्त प्रदान की जाएगी।
योजना के लिए पात्रता की शर्तें और जरूरी नियम
इस योजना का लाभ उठाने के लिए सरकार ने बेहद सरल और पारदर्शी पात्रता मानदंड तय किए हैं:
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मूल निवास: आवेदक उत्तर प्रदेश का स्थायी/मूल निवासी होना अनिवार्य है।
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आयु सीमा: आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए।
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ट्रेड से जुड़ाव: आवेदक संबंधित 14 ट्रेडों में से किसी एक में कार्य करने का बुनियादी ज्ञान या पारंपरिक अनुभव रखता हो।
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पारिवारिक सीमा: परिवार के किसी एक सदस्य (पति या पत्नी) को ही इस योजना का लाभ एक बार में मिल सकेगा।
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पूर्व लाभ न लिया हो: आवेदक ने पिछले दो वर्षों में केंद्र या राज्य सरकार की किसी अन्य समान स्वरोजगार टूलकिट योजना का लाभ न उठाया हो।
आवेदन के लिए आवश्यक दस्तावेज (Required Documents)
योजना में ऑनलाइन फॉर्म भरते समय आवेदक के पास निम्नलिखित दस्तावेज होने चाहिए:
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आधार कार्ड (मोबाइल नंबर से लिंक)
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उत्तर प्रदेश का मूल निवास प्रमाण पत्र
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जाति प्रमाण पत्र (आरक्षित वर्ग के लिए)
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बैंक खाता पासबुक की कॉपी
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पासपोर्ट साइज फोटो और हस्ताक्षर/अंगूठे का निशान
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शैक्षणिक योग्यता प्रमाण पत्र (यदि उपलब्ध हो, अनिवार्य नहीं)
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आयु प्रमाण पत्र (हाईस्कूल अंकतालिका, पैन कार्ड या जन्म प्रमाण पत्र)
पोर्टल पर कैसे करें ऑनलाइन आवेदन? स्टेप-बाय-स्टेप प्रक्रिया
इच्छुक कारीगर और युवा घर बैठे या नजदीकी जन सेवा केंद्र (CSC) के माध्यम से आसानी से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं:
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आधिकारिक पोर्टल पर जाएं: उत्तर प्रदेश उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन निदेशालय की आधिकारिक वेबसाइट (
diupmsme.upsdc.gov.in) पर जाएं। -
नवीन उपयोगकर्ता पंजीकरण: होमपेज पर ‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’ लिंक पर क्लिक करें और ‘नवीन उपयोगकर्ता पंजीकरण’ (New User Registration) विकल्प चुनें।
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व्यक्तिगत विवरण भरें: अपना नाम, पिता का नाम, जन्मतिथि, मोबाइल नंबर, जिला और अपने 14 ट्रेड में से संबंधित ट्रेड का चयन करें।
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दस्तावेज अपलोड करें: यूजर आईडी और पासवर्ड से लॉग-इन करने के बाद अपना पूरा पता भरें और आधार कार्ड, फोटो, बैंक पासबुक आदि स्कैन करके अपलोड करें।
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फाइनल सबमिट: फॉर्म की जांच करने के बाद सबमिट बटन पर क्लिक करें और आवेदन पावती (Acknowledgement Slip) का प्रिंट आउट निकाल लें।
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सत्यापन और चयन: आवेदन के बाद जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केंद्र (DIC) के उपायुक्त द्वारा दस्तावेजों की स्क्रूटनी की जाएगी और चयनित अभ्यर्थियों को इंटरव्यू व प्रशिक्षण के लिए एसएमएस के जरिए सूचित किया जाएगा।
स्वरोजगार से आत्मनिर्भर यूपी: ‘जॉब सीकर’ नहीं ‘जॉब क्रिएटर’ बनेंगे युवा
योगी सरकार का यह फैसला केवल लोन बांटने का कार्यक्रम नहीं है, बल्कि यह उत्तर प्रदेश के असंगठित क्षेत्र के करोड़ों हुनरमंदों को मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था से जोड़ने का एक महा-अभियान है। मोबाइल रिपेयरिंग और बिजली मिस्त्री जैसे आधुनिक ट्रेडों को शामिल करने से शहरों और कस्बों के लाखों युवाओं को अपने पैरों पर खड़े होने का संबल मिलेगा। जब एक प्रशिक्षित इलेक्ट्रीशियन या मैकेनिक 10 लाख रुपये की पूंजी और सरकारी मार्जिन मनी से अपनी खुद की आधुनिक दुकान या सर्विस वर्कशॉप खोलेगा, तो वह न केवल खुद आत्मनिर्भर बनेगा बल्कि 2 से 4 अन्य सहायकों को भी रोजगार देगा। इस प्रकार यह योजना प्रदेश से बेरोजगारी को मिटाने और स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भर भारत के संकल्प को साकार करने में एक मील का पत्थर साबित होगी।
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