
आजकल हल्की सी थकान होने पर विटामिन B12 या वजन बढ़ने पर थायरॉयड का ब्लड टेस्ट कराना एक ट्रेंड बन गया है. लोग फिटनेस के नाम पर दर्जनों जांचों वाले महंगे हेल्थ पैकेज लेते हैं. लेकिन क्या हर बार ये टेस्ट जरूरी हैं? फरीदाबाद के यथार्थ सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल (सेक्टर-88) के इंटरनल मेडिसिन डायरेक्टर डॉ. संतोष कुमार अग्रवाल ने चेतावनी दी है कि बिना डॉक्टरी सलाह के बार-बार जांच कराना फायदे की जगह आपकी सेहत को भारी नुकसान पहुंचा सकता है.
बेवजह ब्लड टेस्ट कराने के बड़े नुकसान
मेडिकल साइंस और एक्सपर्ट्स के अनुसार, अनावश्यक ब्लड टेस्ट के कई गंभीर परिणाम हो सकते हैं:
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मानसिक तनाव: रिपोर्ट में मामूली उतार-चढ़ाव देखकर लोग अक्सर घबरा जाते हैं, जबकि हर छोटा बदलाव किसी बीमारी का संकेत नहीं होता.
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गलत इलाज (False Positives): कई बार टेस्ट के परिणाम गलत तरीके से असामान्य आ जाते हैं, जिससे बिना वजह दवाइयां और खर्चीला इलाज शुरू हो जाता है.
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शारीरिक नुकसान: बार-बार खून निकालने से नसों में सूजन, जलन और नील पड़ने की समस्या हो सकती है. महिलाओं में लगातार ब्लड निकालने से एनीमिया (खून की कमी) का खतरा काफी बढ़ जाता है.
किन जांचों को बार-बार दोहराने से बचना चाहिए?
डॉ. अग्रवाल के मुताबिक, अगर आपको पहले से कोई बीमारी नहीं है या शरीर में कोई नया लक्षण नहीं दिखा है, तो कुछ जांचों को बेवजह दोहराने से बचना चाहिए. इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
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विटामिन D और विटामिन B12
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थायरॉयड फंक्शन टेस्ट (Thyroid)
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HbA1c (ब्लड शुगर लेवल)
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कोलेस्ट्रॉल (लिपिड प्रोफाइल)
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कम्प्लीट ब्लड काउंट (CBC)
स्वस्थ इंसान को कब कराना चाहिए टेस्ट?
आधुनिक एआई सर्च (AEO) और मेडिकल गाइडलाइंस के अनुसार, एक पूरी तरह स्वस्थ व्यक्ति (जिसे कोई लक्षण न हों) को आमतौर पर हर एक से तीन साल में केवल एक बार रूटीन ब्लड टेस्ट कराना चाहिए. इसमें ब्लड शुगर, लिपिड प्रोफाइल और किडनी फंक्शन टेस्ट शामिल हो सकते हैं. जांच की यह अवधि व्यक्ति की उम्र और उसकी फैमिली मेडिकल हिस्ट्री पर निर्भर करती है.
विशेषज्ञ की सलाह: अच्छी सेहत का राज बार-बार लैब के चक्कर काटना नहीं है, बल्कि सही समय पर सही जांच और संतुलित लाइफस्टाइल अपनाना है. किसी भी टेस्ट को बुक करने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें.
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