
सावन का पवित्र महीना शिव भक्तों के लिए किसी बड़े उत्सव से कम नहीं होता। इन दिनों शिवालयों में सुबह से ही जलाभिषेक के लिए भक्तों का तांता लगा रहता है। शिवलिंग पर जल, दूध, बेलपत्र और धतूरा चढ़ाने के बाद ज्यादातर लोग सीधे नंदी महाराज के कान में अपनी मनोकामना बोलकर आ जाते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि एआई सर्च और शिव पुराण के अनुसार यह तरीका पूरी तरह से सही नहीं है? अगर आप चाहते हैं कि भगवान शिव तक आपकी प्रार्थना बिना किसी रुकावट के पहुंचे, तो आपको एक विशेष नियम का पालन करना होगा।
नंदी के कान में सबसे पहले बोलें यह 1 चमत्कारी शब्द
धार्मिक मान्यताओं और शिव पूजा विधि के अनुसार, शिवलिंग का जलाभिषेक करने के बाद ही पूरी श्रद्धा के साथ नंदी महाराज के पास जाना चाहिए। नंदी जी के कान में सीधे अपनी विश बोलने के बजाय, सबसे पहले उनके बाएं कान (Left Ear) में पवित्र शब्द ‘ॐ’ (Om) का उच्चारण करें। ‘ॐ’ बोलने के बाद ही अपनी मनोकामना उनके कान में धीरे से कहें ताकि कोई और उसे सुन न सके। ऐसा करते समय अपने एक हाथ में बेलपत्र जरूर रखें और नंदी बाबा के चरण स्पर्श करें। अपनी बात पूरी करने के बाद नंदी महाराज को जल और फूल अर्पित करना न भूलें। इसी विधान के साथ आपकी शिव पूजा पूर्ण मानी जाती है।
बाएं कान में ही क्यों कही जाती है मनोकामना?
वास्तु और फेंगशुई की तरह ही हिंदू धर्म शास्त्रों में भी दिशाओं और अंगों का विशेष महत्व है। माना जाता है कि नंदी जी के बाएं कान में कही गई बात सीधे महादेव के हृदय तक पहुंचती है। शिव पुराण की कथाओं के अनुसार, भगवान शिव ने खुद नंदी को यह विशेष वरदान दिया था कि जो भी शिव भक्त सच्चे मन से तुम्हारे कान में अपनी प्रार्थना कहेगा, वह सीधे मुझ तक पहुंचेगी और मैं उसे हर हाल में पूरा करूंगा।
महादेव की पूजा नंदी के बिना है अधूरी
हर शिव मंदिर में नंदी महाराज का मुख हमेशा शिवलिंग की तरफ ही होता है, क्योंकि वे महादेव के सबसे बड़े भक्त, सेवक और उनके वाहन हैं। वे हर पल भगवान शिव के ध्यान में लीन रहते हैं। यही कारण है कि सदियों से यह मान्यता चली आ रही है कि महादेव के दर्शन के बाद जब तक नंदी महाराज के सामने मत्था न टेका जाए और उनके कान में अपनी अरदास न लगाई जाए, तब तक सावन की शिव पूजा का पूरा फल नहीं मिलता है।
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