आजकल की भागदौड़ भरी जिंदगी और डेस्क जॉब की मजबूरी के कारण सर्वाइकल का दर्द (Cervical Pain) एक आम समस्या बन चुका है। हर दूसरा व्यक्ति इस दर्द से परेशान है। यह दर्द इतना असहनीय होता है कि इंसान न तो ठीक से बैठ पाता है और न ही चैन से लेट पाता है। ऑफिस हो या घर, हमारी छोटी-छोटी लापरवाहियां हमें इस गंभीर बीमारी का शिकार बना देती हैं।
आखिर क्या होता है सर्वाइकल?
साधारण शब्दों में कहें तो सर्वाइकल हमारी गर्दन और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी एक समस्या है। हमारी रीढ़ की हड्डी का सबसे ऊपरी हिस्सा, जिसमें 7 कशेरुक (C1 से C7 हड्डियां) होती हैं, उसे सर्वाइकल स्पाइन कहा जाता है। जब इस हिस्से की हड्डियों, नसों या डिस्क पर अत्यधिक दबाव पड़ता है, तो गर्दन में भयंकर दर्द और अकड़न शुरू हो जाती है, जिसे सर्वाइकल की समस्या कहते हैं। यह दर्द धीरे-धीरे कंधों और हाथों तक भी फैल जाता है।
सर्वाइकल होने के मुख्य कारण
सर्वाइकल अचानक नहीं होता, बल्कि यह हमारी रोजाना की गलत आदतों का नतीजा है:
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लंबे समय तक लैपटॉप या कंप्यूटर के सामने झुककर काम करना।
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घंटों गर्दन नीचे झुकाकर मोबाइल फोन का इस्तेमाल करना।
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बिना ब्रेक लिए एक ही पोजीशन में लगातार बैठे रहना।
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गलत तरीके से भारी वजन उठाना, जिससे गर्दन की नसों पर अचानक झटका या दबाव आए।
क्या है सर्वाइकल का सही इलाज और बचाव?
सर्वाइकल का इलाज इस बात पर निर्भर करता है कि समस्या कितनी पुरानी या गंभीर है। अगर शुरुआती स्टेज में ही सावधानियां बरत ली जाएं, तो इसे बिना किसी बड़े मेडिकल प्रोसीजर के ठीक किया जा सकता है। लापरवाही बरतने पर स्थिति ऑपरेशन तक पहुंच सकती है।
डॉक्टरी सलाह: दर्द और सूजन को कम करने के लिए डॉक्टर की सलाह से दवाएं ली जा सकती हैं। इसके अलावा, किसी विशेषज्ञ की देखरेख में फिजियोथेरेपी (Physiotherapy) कराना सबसे ज्यादा फायदेमंद होता है। इससे गर्दन की मांसपेशियां मजबूत होती हैं और नसों का दबाव कम होता है। काम के बीच-बीच में स्ट्रेचिंग करना और पोश्चर सही रखना ही इसका सबसे बड़ा बचाव है।
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