अयोध्या/राजनीति डेस्क: अयोध्या राम मंदिर में हुए करीब 80 लाख रुपये के चढ़ावा चोरी प्रकरण (Ram Mandir Donation Theft Case) के बाद पैदा हुए सियासी भूचाल के बीच ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ (Shri Ram Janmbhoomi Teerth Kshetra Trust) से जुड़ी एक और बेहद बड़ी खबर सामने आई है. ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय (Champat Rai) और न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा (Dr. Anil Mishra) के इस्तीफे कन्फर्म होने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ खड़ा हुआ है कि राम मंदिर के प्रबंधन की कमान और चंपत राय की जगह कौन संभालेगा?
इन ऐतिहासिक और बड़े बदलावों को लेकर आगामी 11 जुलाई 2026 को राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की एक हाई-लेवल महाबैठक बुलाई गई है, जिसमें कई अभूतपूर्व और बड़े फैसले लिए जा सकते हैं.
कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी ने जारी की प्रेस विज्ञप्ति, दिया बड़ा बयान
शनिवार को ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरी महाराज ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर लगे सस्पेंस को पूरी तरह खत्म किया.
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बैठक में होगा फैसला: जारी बयान में कहा गया है कि ट्रस्ट को महामंत्री चंपत राय और न्यासी डॉ. अनिल मिश्रा के त्यागपत्र प्राप्त हो चुके हैं. इन दोनों बड़े इस्तीफों पर 11 जुलाई को होने वाली आगामी बैठक में विस्तृत विचार-विमर्श कर अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
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श्रद्धालुओं को दिया भरोसा: ट्रस्ट ने देश-विदेश के करोड़ों राम भक्तों को आश्वस्त करते हुए कहा कि जिन श्रद्धालुओं ने चांदी की ईंटें, सोने के आभूषण और अन्य बहुमूल्य वस्तुएं प्रभु श्रीराम के चरणों में व्यक्तिगत रूप से सौंपी थीं, वे सभी पूरी तरह सुरक्षित हैं और उनका पाई-पाई का हिसाब ट्रस्ट के बही-खातों में उपलब्ध है.
डॉ. अनिल मिश्रा की जगह ले सकते हैं कृष्ण मोहन, सुगबुगाहट हुई तेज
राम मंदिर परिसर के आंतरिक सूत्रों के मुताबिक, डॉ. अनिल मिश्रा के जाने के बाद उनका महत्वपूर्ण और प्रमुख दायित्व कृष्ण मोहन को सौंपे जाने की चर्चाएं और सुगबुगाहट अयोध्या के गलियारों में बेहद तेज हो गई हैं.
कौन हैं कृष्ण मोहन और क्यों चर्चा में आया नाम?
चढ़ावा चोरी मामले में आरोपियों के खिलाफ पुलिस में एफआईआर (FIR) दर्ज करवाने और वादी (शिकायतकर्ता) बनने के बाद से ही कृष्ण मोहन अचानक राष्ट्रीय सुर्खियों में आ गए हैं.
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बेदाग छवि और संघ का भरोसा: जानकार बताते हैं कि कृष्ण मोहन सरकारी नौकरी से सेवानिवृत्त (Retired) होने के बाद राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े. उन्होंने संघ में जिला चालक, प्रांत चालक से लेकर क्षेत्रीय संघचालक तक का लंबा और निष्कलंक सफर तय किया है.
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शीर्ष नेतृत्व की पसंद: संघ के शीर्ष नेतृत्व में कृष्ण मोहन की छवि बेहद ईमानदार और बेदाग मानी जाती है. उनके इसी सुशासन के ट्रैक रिकॉर्ड और प्रशासनिक अनुभव को देखते हुए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और ट्रस्ट की कोर कमेटी उन्हें डॉ. अनिल मिश्रा का प्रमुख दायित्व सौंपने की पूरी तैयारी में है.
11 जुलाई की बैठक क्यों है बेहद महत्वपूर्ण?
11 जुलाई 2026 को होने वाली यह बैठक राम मंदिर के इतिहास में एक नया टर्निंग पॉइंट साबित हो सकती है. इस बैठक में निम्नलिखित मुख्य मुद्दों पर मुहर लग सकती है:
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नए महासचिव का चुनाव: चंपत राय की जगह किसी ऐसे कद्दावर और निष्कलंक चेहरे को महासचिव का पद सौंपना, जो संघ और सरकार दोनों के साथ बेहतर तालमेल बिठा सके.
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नया डोनेशन मैनेजमेंट (SOP): हालिया चोरी की घटना के बाद दान की गिनती, सीसीटीवी सुरक्षा और कड़े ड्रेस कोड से जुड़े नए और फुल-प्रूफ सुरक्षा नियमों को लागू करना.
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प्रशासनिक फेरबदल: मंदिर के पूरे आंतरिक प्रबंधन और देखरेख के ढांचे में बड़े पैमाने पर बदलाव करना, ताकि भविष्य में साख पर कोई आंच न आए.
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