नई दिल्ली/खेल ब्यूरो: आयरलैंड के खिलाफ दो मैचों की टी20 अंतरराष्ट्रीय सीरीज के पहले मुकाबले में भारतीय टीम को मिली चौंकाने वाली हार के बाद ऑलराउंडर वॉशिंगटन सुंदर (Washington Sundar) की टीम में भूमिका को लेकर एक बार फिर गंभीर बहस छिड़ गई है. इस 26 वर्षीय खिलाड़ी को भारतीय टी20 टीम में लगातार मौके तो मिल रहे हैं, लेकिन उनके प्रदर्शन और टीम मैनेजमेंट द्वारा उनके इस्तेमाल के तरीके ने उनकी जगह पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सुंदर एक ऐसे बल्लेबाज हैं जो उपयोगी ऑफ-स्पिन कर सकते हैं, या फिर एक विशेषज्ञ ऑफ-स्पिनर हैं जो जरूरत पड़ने पर निचले क्रम में बल्लेबाजी का योगदान दे सकते हैं?
आयरलैंड के खिलाफ बेअसर रहा प्रदर्शन
आयरलैंड के खिलाफ पहले टी20 मैच में वॉशिंगटन सुंदर का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा, जिसने इस बहस को और हवा दे दी:
-
गेंदबाजी: उन्हें मैच के दौरान केवल 1 ओवर फेंकने का मौका मिला, जिसमें उन्होंने बेहद महंगे साबित होते हुए 19 रन लुटा डाले.
-
बल्लेबाजी: रन गति को बढ़ाने के चक्कर में वे 12 गेंदों पर केवल 9 रन ही बना सके.
यह केवल एक मैच की कहानी नहीं है, बल्कि पिछले कुछ समय से टीम में उनके असंगत इस्तेमाल के कारण यह सवाल लगातार बना हुआ है.
61 मैचों के आंकड़े: न मुकम्मल फिनिशर, न मुख्य स्पिनर
आंकड़े साफ गवाही देते हैं कि सुंदर को इतने लंबे समय बाद भी अपनी एक मजबूत पहचान बनाने में संघर्ष करना पड़ रहा है:
-
बल्लेबाजी का स्तर: सुंदर ने अब तक खेले 61 टी20 अंतरराष्ट्रीय मैचों की 26 पारियों में बल्लेबाजी की है, लेकिन इस दौरान उनका स्ट्राइक रेट 130 से भी कम रहा है, जो आज के आधुनिक आक्रामक टी20 क्रिकेट के लिहाज से काफी धीमा माना जाता है.
-
औसत दर्जे की गेंदबाजी: 57 पारियों में उन्होंने 51 विकेट लिए हैं, लेकिन उनका इकॉनमी रेट 7 से अधिक का रहा है.
-
कोटा पूरा न होना: सुंदर ने अपने करियर में कुल 1049 वैध गेंदें फेंकी हैं, जिसका औसत निकाला जाए तो प्रति मैच केवल 17 गेंदें (लगभग 2.5 ओवर) बैठता है. यानी अधिकांश मैचों में कप्तान ने उन पर भरोसा जताकर उनका 4 ओवर का कोटा पूरा नहीं कराया है. पिछले 12 टी20 मैचों में से केवल 2 में ही उन्होंने अपने 4 ओवर पूरे किए हैं.
आर. अश्विन ने किया सपोर्ट, भूमिका स्पष्ट करने की मांग की
भारत के महान स्पिनर रविचंद्रन अश्विन (Ravichandran Ashwin) ने अपने यूट्यूब शो ‘ऐश की बात’ में सुंदर का बचाव करते हुए टीम मैनेजमेंट की रणनीति पर उंगली उठाई है.
अश्विन का बड़ा बयान: “वॉशिंगटन सुंदर को टीम में लगातार बैक (समर्थन) किया जा रहा है, लेकिन उनकी भूमिका बिल्कुल भी स्पष्ट नहीं है. कभी उन्हें सिर्फ एक ओवर मिलता है, तो कभी गेंदबाजी ही नहीं मिलती. हमें यह याद रखना होगा कि टी20 विश्व कप जैसे बड़े मंच पर उप-कप्तान अक्षर पटेल को टीम से बाहर रखकर वॉशिंगटन को मौका दिया गया था, जो दिखाता है कि मैनेजमेंट उन पर भरोसा करता है.”
‘अक्षर पटेल की तरह मिले रोल’: अश्विन ने आगे कहा कि सुंदर को जबरन एक ‘फिनिशर’ (आखिरी ओवरों का विशेषज्ञ) के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है, जबकि वह उस शैली के खिलाड़ी नहीं हैं. अगर उन्हें लंबे समय तक टीम में बनाए रखना है, तो पूर्व कोच राहुल द्रविड़ और कप्तान रोहित शर्मा के दौर में जैसे अक्षर पटेल को एक ‘फ्लोटर’ (परिस्थिति के अनुसार किसी भी क्रम पर खेलने वाला) के रूप में एक स्पष्ट भूमिका दी गई थी, वैसी ही भूमिका वॉशिंगटन को भी देनी होगी. उन्हें पूरे 4 ओवर का कोटा मिलना चाहिए, तभी वे एक बेहतरीन ऑलराउंडर के रूप में निखर पाएंगे.
हाल के दिनों में टी20 क्रिकेट में विस्फोटक बल्लेबाजी और कलाई के स्पिनरों (रिस्ट स्पिनर्स) की बढ़ती मांग के बीच वॉशिंगटन सुंदर के लिए टीम में अपनी जगह बचाए रखना एक बड़ी चुनौती बन गया है.
The News 11 – ताज़ा हिंदी समाचार, ब्रेकिंग न्यूज़, राजनीति, देश-दुनिया